Published On : Fri, Feb 6th, 2015

सारखणी : विकलांग उत्तम निराधार योजना से वंचित

Uttam
सारखणी (नांदेड)। निराधारों के लिए शासन दरबार से विविध जाती के नागरिकों तक योजना पहुंचाने ने के लिए शासन प्रतिबद्ध है. जो छाती ठोक कर बताया जाता है. लेकिन एक तरफ विकलांगों को अनुदान के लिए यातनाएं सहनी पड रही है. आदिवासी नक्सलग्रस्त क्षेत्र के आदिवासी विकलांग युवक उत्तम कुमरे अनुदान की प्रतिक्षा में है. प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी प्रकार का ध्यान नही दिया गया. ये दुर्भाग्य ही कहां जा सकता है. फडणविस सरकार इस प्रकरण में ध्यान देगी ? ऐसा प्रश्न उपस्थित हो रहा है.

सरकार विकलांग निराधार लोगों के लिए अनेक योजनाएं चलाती है. ये योजनाए जरूतमंदों तक नहीं पहुंच पाती है. प्रशासन के उदासीनता से दोनों पैरों और शरीर से विकलांग उत्तम कुमरे की निराधार अनुदान की मांग के लिए तहसील कार्यालय की ओर जाने का समय आया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार किनवट तालुका के पेनगंगा के किनारे सिख गांव के आदिवासी समाज के उत्तम माधवराव कुमरे जन्मतः दोनों पैरों और शरीर से विकलांग है. गरीब परिवार होने से उसकी शिक्षा सिर्फ पाचवी तक ही हुई है. परिस्थिति से उसकी शिक्षा आगे नही बढ़ी. इस महंगाई के दौर में फडणविस सरकार के राज में उसका दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है. जिससे उसपर भुखोमरी की नौबत आ पड़ी है. उत्तम को संजय गांधी निराधार योजना से अनुदान मिले तो उसकी उपजीविका चल सकती है. अनुदान के लिए याचिका क्र. 20 के तहत अनुदान मंजूर किया गया है. लेकिन 3 मार्च 2014 से आज तक निराधार योजना के पैसे नहीं मिले. अपने पेट की आग बुझाने के लिए उत्तम को दर-दर भटकना पड रहा है.

उत्तम कई बार अनुदान के अर्जी दे चूका है. लेकिन तहसीलदार प्रशासन से निराशा हाथ लगी. दी गई अर्जी की पुचताछ भी नही की गई. इसका जबाबदार कौन है? अधिकारी या प्रशासन के अधिकारी? इस महंगाई के दौर में निराधारों को मिलने वाली राशि काफी कम है. सन 1980 से निराधार व्यक्ती, विधवा, अंध, विकलांग शारीरिक और मानसिक बिमार को निराधार योजना का लाभ मिलता है. इस कम सहायता में इनकी उपजीविका कैसी चल सकती है. इस अनुदान को बढ़ाना जरुरी है.

विकलांग युवक उत्तम कुमरे अपना निराधार अनुदान लेने के लिए अनेक कागजाद देकर तहसील के चक्कर काट रहा है. लेकिन तहसीलदार के सुस्त व्यवहार से इस संदर्भ में कोई कार्रवाई नही की जा रही. अब उत्तम के सामने तहसील कार्यालय के सामने उपोषण का एकमात्र पर्याय है और उसके लिए वो तैयार है. उक्त समस्या से छुटकारा देकर निराधार अनुदान जल्द से जल्द दे ऐसी मांग उत्तम तथा नागरिकों की ओर से की जा रही है.