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    Published On : Thu, Jan 5th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    2 हजार के नोटों से गांधी जी उठकर चले गए

    note-1_050117-032921जी हां, बिना महात्मा गांधी की तस्वीर का नोट, वो भी असली. ये नोट मध्य प्रदेश के किसानों को मिले हैं. गुलाबी पत्ती यानी 2000 के ये नोट एसबीआई की ब्रांच ने दिए हैं. जब किसानों को ये नोट मिले तो वो उन्हें नकली समझ बैठे, लेकिन बैंक वालों का कहना था कि ये नोट असली हैं. बस प्रिंटिंग सही नहीं हुई है.

    मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की बड़ोदा तहसील में ये गड़बड़ी सामने आई है. बिच्छुखेड़ी गांव के लक्ष्मण मीणा और काडूखेड़ी के रहने वाले गुरमीत सिंह बैंक से 8-8 हजार रुपये निकालने एसबीआई ब्रांच पहुंचे थे. दोनों किसानों को बैंक ने दो-दो हजार रुपये के चार-चार नोट दिए. इन्होंने 2000 रुपये के नोट नहीं देखे थे. उन्होंने कैशियर से ये नोट ले लिए. जब दोनों बैंक से बाहर आए तो लोगों ने देखा तो नोट के ऊपर से महात्मा गांधी ही गायब थे. बैंक के बाहर लोगों में तो शोर मच गया. वहां मौजूद लोगों ने नोटों की फोटो खींच ली. इसके बाद ये वापस बैंक के अंदर गए और बैंक अफसरों को इस बारे में बताया। पहले तो बैंक अफसरों ने अनाकानी की. बाद में बैंक ने उनके नोट वापस ले लिए.

    टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक में ब्रांच के मैनेजर के हवाले से लिखा गया है, ‘नोट फर्जी नहीं हैं. नोट पर तस्वीर की जगह खाली छोड़ी गई है. हमने नोट वापस ले लिए हैं.’ खबर ये भी है की बैंकों के पास ऐसे नोटों का पूरा बंडल है. जब बैंक वालों से बात की गई तो उन्होंने बताने से इंकार कर दिया कि ऐसे और कितने नोट बैंक में हैं.

    जिस मकसद से नोटबंदी का फैसला लिया गया वो मकसद कामयाब होता नजर नहीं आया. पहला ये था कि जाली नोट बंद हो जाएंगे. ठीक है जो पहले से जाली नोट थे. बंद हो गए. लेकिन उसके बाद क्या. क्योंकि नए नोट तो लोगों ने जाली बाद में छापे, फोटोकॉपी ही चला दी. दूसरा था करप्शन पर रोक लगेगी. लेकिन आपने खुद नोटों के जखीरे पकडे जाने की ख़बरें पढ़ी होंगी ये तो वो थे जो पकड़े गए. और कितने जखीरे होंगे पता नहीं. रैलियों में दावे किये गए कि करीब 14 लाख करोड़ में 6 लाख करोड़ काला धन है, जो नोटबंदी के फैसले से सिस्टम से बाहर हो जाएगा. मगर ऐसा भी नहीं हुआ क्योंकि तकरीबन तकरीबन 14 लाख करोड़ रुपये बैंकों में जमा हो गए. यानी काला धन पर रोक लगाने में भी विफल हो गए. बस लोगों को परेशानियां ही बचीं. किसी को इलाज के कराने के लिए पैसे नहीं मिले तो किसी को शादी के लिए. हाँ वो लग बात थी कि मंत्रियों की प्यारी संतानों की शादी में कोई दिक्कत नहीं आई. वही ठाठ. करोड़ो रुपये के खर्चे. वो जानें या सिस्टम कि 4000 रूपये निकालने वाली पाबंदी होने के बावजूद उन्हें इतने पैसे कहां से मिल गए. जो कतारों में लोग खड़े रहे और उन्हें नहीं मिले.


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