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    Published On : Wed, Oct 17th, 2018

    दीपावली पूर्व मनपा को मिलेगा विशेष अनुदान

    आर्थिक तंगी से बचाने राज्य सरकार की पहल से मनपा को मिल सकती है राहत

    नागपुर : नागपुर मनपा की कड़की का अंदाजा पिछले एक सप्ताह से चल रहे ठेकेदारों के आंदोलन की तीव्रता से लगाया जा सकता है. यहां तक कि मनपा कर्मियों को सितम्बर माह का वेतन तक नहीं दिया गया. इसी बीच खबर मिली कि राज्य सरकार ने मनपा नागपुर को विशेष अनुदान के रूप में १५० करोड़ रुपए देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, संभवतः जिला प्रशासन के मार्फ़त मनपा के खाते में अगले सप्ताह आ जाएंगी.

    ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह स्थाई समिति सभापति विक्की कुकरेजा ने जानकारी दी कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ३२५ करोड़ का विशेष अनुदान के साथ मासिक जीएसटी में ३० से ३५ करोड़ बढ़ाने की सिफारिश की थी. इस सन्दर्भ में नागपुर के सांसद नितिन गडकरी ने भी मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत की थी. मुख्यमंत्री ने गडकरी व कुकरेजा की मांग पर सकारात्मक हामी भरी भी थी.

    उक्त मांग पर मुख्यमंत्री की पहल पर ३२५ करोड़ के विशेष अनुदान में से १५० करोड़ रुपए देने के प्रस्ताव को लगभग सभी प्रकार की मंजूरी प्रदान की जा चुकी है. उम्मीद है कि दीपावली पूर्व मनपा के खाते में उक्त अनुदान की पहला किश्त पहुँच जाएगी. मनपा का मासिक स्थाई खर्च ९२ करोड़ है. इतने अल्प राशि में तो सिर्फ बंदरबांट ही हो सकती है.

    ठेकेदारों का आंदोलन चरम पर
    दूसरी ओर मनपा के अधिकृत ठेकेदार, ठेकेदार कंपनी को मार्च २०१८ से भुगतान नहीं किया गया है, जो कि आज तक बढ़ कर लगभग ३०० करोड़ तक पहुंच चुका है. कुछ ठेकेदारों की ‘आयकर रिटर्न’ भरने की हैसियत नहीं रही. छोटे सैकड़ों ठेकेदारों ने तो ब्याज पर पैसे लेकर मनपा के काम पूर्ण किए, कड़की के कारण वे भागे-भागे फिर रहे हैं.

    कल मंगलवार को आंदोलन और तीव्र हो गया था, क्यूंकि एक दिन पूर्व मनपा अतिरिक्त आयुक्त ने आंदोलन बंद करने की सख्त हिदायत दी थी. कल शाम उक्त अधिकारी के कक्ष में उनके आमंत्रण पर आंदोलनकारी शिष्टमंडल मिला. चर्चा में तय रणनीति के तहत आंदोलन स्थल पर प्रशासन चल कर आया. आंदोलनकारियों द्वारा अपनी-अपनी व्यथा बतला ही रहे थे कि इस बीच किसी ने धार्मिक मुद्दा उठाकर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया. प्रशासन ने जाते हुए बकाया भुगतान करने का आश्वासन दिया, समय बताने में असमर्थता दिखाई. इससे नाराज होकर उलटे पांव लौट गया. प्रशासन के लौटते ही ठेकेदारों ने जमकर हंगामा किया और निर्णय लिया कि आज प्रशासन के खिलाफ और तीव्र आंदोलन करेंगे.

    कर्मियों को सितम्बर से वेतन नहीं
    मनपा के अनेक अधिकारी-कर्मियों को सितम्बर माह का वेतन नहीं मिला है. दशहरा पर्व आनेवाली है और अगले माह के पहले सप्ताह में दीपावली पर्व है. लगभग २ माह से वेतन न मिलने से सभी सकते में हैं. दूसरी ओर अल्प सदस्यीय मनपा कर्मचारी संगठन ने पुराने बकाया मांग को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दे रखा है, जबकि इस कड़की से मनपा को उबारने के लिए प्रशासन को सकारात्मक सहयोग देना चाहिए. प्रत्येक वर्ष मनपा बजट में कर्मचारियों के बकाया संबंधी जिक्र होता है. जिसे पूरा करने के लिए प्रशासन के साथ कर्मचारी संगठन आजतक निष्क्रिय रहा.

    जगह नहीं तो अनुदान बंद
    राज्य सरकार ने हाल ही में एक अध्यादेश जारी किया कि राज्य के मनपाओं को केंद्र और राज्य सरकार महत्वपूर्ण प्रकल्प के साथ निधि भी देती हैं.जिस मनपा ने प्रकल्प के लिए जरूरतानुसार जगह उपलब्ध नहीं करवाई तो उसका अनुदान बंद कर दिया जाएगा।खासकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट,सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट,पम्पिंग स्टेशन आदि.

    यह भी जानकारी मिली है कि मनपा को सीमेंट सड़क अपने खर्चे से निर्माण करना होगा. बाद में सीमेंट सड़क के लिए राज्य सरकार अनुदान की राशि उपलब्ध करवाएंगी.

    टेंडर,वर्कऑर्डर के मार्ग में प्रशासन बनी रोड़ा
    वर्ष २०१८-१९ के बजट के अनुसार मनपा वित्त विभाग के अनुसार स्थाई समिति की सम्पूर्ण राशि ख़त्म हो गई. महापौर,उपमहापौर की विशेष निधि भी ७५% ख़त्म हो गई. लेकिन मनपा आयुक्त सह प्रशासन की सभी प्रकार की मंजूरी बाद भी न टेंडर,न कोटेशन और न ही वर्क आर्डर देने का क्रम शुरू हुआ. अधिकांश पूर्ण प्रस्ताव आयुक्त के कार्यालय में जमा हैं. कहा जा रहा है कि आयुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई समिति के अंतिम निर्णय के बाद टेंडर,वर्कऑर्डर व कोटेशन के कामकाज जारी किए जाएंगे.

    … फिर भी टेंडर उठ रहे,वह भी ‘बिलो’ में
    ऐसा नहीं है कि मनपा की कड़की से मनपा का कामकाज प्रभावित हो गया है. लगभग हर सप्ताह लाखों,करोड़ों के प्रस्ताव को मंजूरी मिल रही है. टेंडर भी जारी हो रहे हैं. टेंडर भी उठ रहे. वह भी काफी ‘बिलो’ में. इस घटनाक्रम से सभी हतप्रभ है कि एक तरफ ठेकेदारों का आंदोलन शबाब पर तो दूसरी ओर ‘बिलो’ दर में टेंडर उठाया जा रहा है. उल्लेखनीय यह है कि ‘बिलो’ के बाद ‘टेबल दर टेबल’ की ‘फिक्स’ देनगी में ३० से ३५% राशि ख़त्म हो जाती है. इसके अलावा १५ से २०% ठेकेदार की कमाई के बाद ५०से ५५ % बची राशि में गुणवत्तापूर्ण काम की उम्मी बेमानी है.

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