Published On : Sat, Oct 21st, 2017

दरगाह के करीब फलता नशे का कारोबार बन सकता है खतरा!

Sitabuldi-Police-Station
नागपुर: विधानभवन से सटे मीठा नीम दरगाह के इर्द-गिर्द के चंद घरों में 24 घंटे मादक पदार्थों की बिक्री और कश लगाने की व्यवस्था उपलब्ध है। शायद सुरक्षा व्यवस्था के नुमाइंदे इससे अनभिज्ञ हैं। समझा जा रहा है कि वर्षों से चल रहे इस कारोबार पर क्षेत्रीय पुलिस-प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है! इसलिए सारे शहर में मादक पदार्थों की बिक्री व उसके सेवन का सर्वोत्तम व सुरक्षित इलाका मीठा नीम दरगाह परिसर बनता जा रहा है, जो विधान भवन की सुरक्षा में सेंध लगाता नजर आ रहा है. वहीं यहां फलता-फूलता नशा का कारोबार दिन प्रतिदिन खतरा बनता जा रहा है। इस परिसर में पूजा सामग्री का व्यवसाय कर अपने परिजनों का पेट भरने वालों को पुलिस विभाग आअ दिन अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई कर १०००-२००० का जुर्माना थोंप देती है तो दूसरी ओर मादक पदार्थों का खुलेआम धंधा करने वालों पर आज तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.

विधान भवन परिसर से सटा प्रसिद्ध मीठा नीम दरगाह है. उर्स के अवसर पर यहां जायरीनों की भीड़ देखते ही बनती है. इनमें 5 प्रतिशत ऐसे फर्जी श्रद्धालु होते हैं, जो सम्पूर्ण देश के धार्मिक स्थल को बदनाम करते फिरते हैं। वे यहां पहुंच मादक पदार्थ (गाँजा, चरस, अफीम, डोडा, मुनक्का, शराब आदि) की बिक्री करते हैं, और इनके बंदों को इसी धार्मिक स्थल के इर्द-गिर्द पीने के लिए जगह मुहैया करवाते हैं. जो सच्चे भक्तों (महिला, युवती, बच्चे सहित पुरुष) को नुकसान पहुंचा सकता है. पहले की तुलना में अब भक्तों की आवाजाही कम देखी जा रही है.

दरगाह के आसपास गांजा, चरस, अफीम, डोडा, मुनक्का शराब आदि खुलेआम सेवन व खरीदी करते देखे जा सकते हैं। इन्हें भय इसीलिए नहीं है क्योंकि इन नशेडिय़ों में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, मनपा कर्मचारी आदि खासकर युवा वर्ग रोजाना यहां पहुंचते हैं। यहां के विक्रेताओं का कहना है कि जब पुलिस महकमा ही हमारे ग्राहक और खरीदार हैं तो फिर हमें डर किस बात का. गांजा, चरस, अफीम, डोडा, मुनक्का, शराब आदि की लत से युवा वर्ग चपेटे में आ चुका है। वे नशे की हालत में डेरिंग के साथ चोरी करते हैं। वे श्रद्धालुओं के वाहन-सामान भी चोरी करने से नहीं हिचकिचाते। इसके अलावा ताजुद्दीन बाबा के दरगाह पर चढ़े नगद राशि को पालक झपकते ही गायब कर उससे अपना शौक पूरा करते हैं.

अधिवेशन के दौरान यहां परिसर के दोनों ओर कड़ा बंदोबस्त-पहरा रहता है। इस दौरान राज्य सरकार सहित सम्पूर्ण सरकारी महकमा विधान भवन में होता है। तब भी दरगाह के समीप नशा बाजार खुलेआम 24 घंटे शुरू रहता है. ऐसे में नेताओं व अन्य अधिकारियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह जरूरी हो जाता है कि परिसर में चल रहे नशे के कारोबार को प्रशासन आड़े हाथों लेकर बंद कराये। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विधान मंडल के शीतकालीन सत्र में पहुंचने वाले नेताओं के लिए इस परिसर के नशा कारोबारियों से खतरा उत्पन्न हो सकता है? अथवा क्या सुरक्षा के चाक-चौबंद में जुटे अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे?