Published On : Sat, Mar 23rd, 2019

क्रिकेट सट्टे के शौक ने शहर के कई सभ्य घरानों को किया कंगाल

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IPL शुरूः सट्टेबाजों की सज गई दुकान

नागपुर: इंडियन प्रिमीयर लीग (आयपीएल) के टिवेंटी-20 क्रिकेट के महाकुंभ का आगा़ज 12 वें संस्करण के रूप में आज से शुरू हो रहा है। 23 मार्च से 5 मई तक लीग मैच खेले जायेंगे तत्पश्‍चात क्वॉटर फाइनल, सेमी फाइनल और फायनल खेला जायेगा।
पहला मुकाबला आज रात 8 बजे चेन्नई सुपर किंग (CSK) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के कप्तान धोनी और कोहली के बीच बादशाहत की जंग के साथ शुरू होगा। लगभग 60 दिनों तक चलनेवाले इस क्रिकेट महाकुंभ के लिए गोंदिया के सटोरियों ने अपनी दुकानें सजा ली है।
सूत्रों की मानें तो आयपीएल में जो दिखता है, वो होता नहीं? और जो होता है, वो दिखता नहीं? कुल मिलाकर करोड़ों की हर मैच पर लगवाड़ी करनेवाले फन्टरों के लिए गोंदिया में सक्रिय 2 दर्जन बुकी- भावन, अनिल (लंबू), फत्ता, फिरोज, आमीन, ताहिर, मनीष, मोहसिन, सुनील (आलू), मुकेश, अभिनंदन, कमाल और शास्त्री आदि बुकीयों ने ने भाव खोल दिए है।

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हॉट लाइन, वीवीआयपी नंबर, फन्टर का सौदा हार्डडिस्क में रिकार्ड
इस टुर्नामेंट में प्रतिदिन एक तो कभी 2 मैच खेले जा रहे है। कच्ची उम्र के स्कूली छात्र से लेकर व्यस्क युवक व लक्ष्मीपूत्र कारोबारी और अधिकारी तक हारी-जीत पर दांव लगाते है। कुछ बुकियों ने इस बार सुरक्षित ठिकानों के रूप में पांगडी, ढाकनी जैसे ग्रामीण इलाकों का रुख कर लिया है। यहां स्थित रिसोर्ट में बैठकर मौजमस्ती के साथ सट्टा कारोबार चलाया जायेगा। लगवाड़ी व खायवाली का धंधा बुकी हॉट लाइन कनेक्शन लेकर अपने वीवीआयपी नंबरों से उसे जोडकर कर रहे है। अधिकांश नंबर बोगस आधार कार्ड पर हासिल कर लिए गए है।

सौदा लगाने वाले की आवाज कम्प्युटर (लैपटॉप) के हार्डडिस्क में रिकार्ड हो जाती है और एैसे में फन्टर अपने लगाए सौदे से मुकर नहीं सकता? भविष्य में फन्टर के नटने पर उसकी आवाज उसे सुनाई जा सके, इसकी तैयारी भी बकायदा कर ली गई है।

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फन्टर को बेवकूफ बनाने के लिए सैटेलाईट डिश और एप का सहारा
विश्‍वनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार शहर के कुछ चतुर सट्टा कारोबारियों ने 2 से 3 लाख के बीच मिलनेवाले सैटेलाईट डिश कनेक्शन ले रखे है, जिसमें बिना विज्ञापन प्रसारण के मैच दिखाया जाता है तथा उसकी टायमिंग 1-2 मिनट आगे होती है। मैच के दौरान फेंकी गई 1-2 बॉल पर क्या नतीजा रहा? विकेट गया या चौका लगा? यह बुकी को पता होता है तथा इन डिश कनेक्शन के माध्यम से टीवी पर मैच देख रहे फन्टरों को बेवकूफ बनाकर रूपया ऐंठा जाता है। अब बदलते वक्त के साथ एैसे कई एप भी बाजार में आ गए है, जिसका सहारा बुकी लेकर सट्टा लगाने के शौकिनों ( फन्टरों ) को बेवकूफ बनाने में जुटे है।

तेजी से बढ़ा फैन्सी क्रिकेट सट्टे का चलन
क्रिकेट सट्टा बाजार में इन दिनों फैन्सी क्रिकेट का खूब चलन है। 1 से 4 ओवर के पॉवर-प्ले सेशन के बीच कितने रन बनेंगे? नो-बॉल होगी या नहीं? व्हाईट बॉल कितनी होगी? कौनसी गेंद पर चौका लगेगा और कौनसी गेंद पर छक्का? फेंके जानेवाले ओवर में कुल कितने रन बनेेंगे? विकेट बोल्ड गिरेगा या कैच आउट होगा या फिर रन आउट? मैच में टॉस कौन जितेगा? चालू मैच में बारिश होगी या नहीं? मैच में कुल कितने छक्के और चौके पड़ेंगे? पहले खेलने वाली टीम का स्कोर क्या होगा? इस तरह के निर्णयों पर लगनेवाले सट्टे को फैन्सी सट्टा कहते है। सबसे अधिक रुपयों की लॉटरी सटोरियों की इसपर ही लगती है और फन्टर (शौकीनों) को कंगाल बनाया जाता है।

अकेले गोंदिया में रो़ज 500 करोड़ का कारोबार
सूत्रों की मानें तो गोंदिया में कुल छोटेˆबड़े बुकियों की संख्या 40 से अधिक है। जिसमें से 2 दर्जन बड़े बुकी है। जो 50 से अधिक मोबाइल, टेपिंग सिस्टम और कम्प्यूटर हार्ड डिस्क (डिब्बा) से लैस होकर धंधे पर बैठते है। गोंदिया के यह बुकी अपने सौदे की उतारी नागपुर के बुकी हरचंदानी (जरिपटका), छब्बू भाई (कामठी), अफरोज (बंगाली पंजा), छोटू (सीताबर्डी) सहित 3-4 बड़े बुकियों के पास करते है साथ ही इंदौर, मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली इत्यादी शहरों में करते है तथा गोंदिया के इन 2 दर्जन बड़ेे बुकियों को जिले से तो खायवाली मिलती ही है। वहीं मध्यप्रदेश के बालाघाट, सिवनी, नैनपुर, महाराष्ट्र के वड़सा, गडचिरोली के छोटे बुकीयों का धंधा भी गोंदिया के भरोसे चलता है। इस ग्रहण की गई खायवाली को यह बड़े बुकी 2-3 प्रतिशत के कमिशन पर सौदे काट देते है। विश्‍वसनीय सूत्रों की मानें तो 2 दर्जन बुकी प्रतिदिन आयपीएल के होने वाले 2 मैच के दौरान लगभग 500 करोड़ तक का कारोबार करेंगे।

पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए नायब तौर-तरीके
कुछ बड़े बुकीयों ने घर, ऑफिस और गुप्त ठिकानों के बाहर नाईट विजन कैमरे तक लगा रखे है। इस सीसीटीवी खुफिया कैमरों की मदद से बाहर की हर हरकत पर कमरे के भीतर बैठकर नजर रखी जाती है, मकसद है पुलिस की छापामार कार्रवाई से बचना।

क्रिकेट सट्टा कारोबारी फर्जी नामों से सैकड़ों मोबाइल सिम खरिदते है तथा स्थान, शहर व मकान बदलकर अपना काला कारोबार सुव्यवस्थित व सुचारू रूप से चलाने में जुट गए है तथा जिले के गांव, देहातों के रिसोर्ट यहां तक की कार और मिनी वैन जैसे चलते-फिरते वाहनोें में भी बड़े ही नायाब तरिके से धंधा संचालित करने हेतु अपना पुरा नेटवर्क बिछा चुके है। अब देखना दिलचस्प होगा कि, चूहे-बिल्ली के इस खेल में क्या पुलिस के हाथ इन बुकियों के गिरेबान तक पहुँच भी पाते है या नहीं?

वसूली के लिए गुण्डों का इस्तेमाल
क्रिकेट सट्टा कारोबार के बेइमानी का धंधा भी हालांकि पुरी इमानदारी से खेला जाता है। किन्तु लगवाड़ी लगानेवाले फन्टरों के पास अगर खुदा न खास्ता रकम फंस गई तो लेन-देन के वसूली के लिए गुण्डों का इस्तेमाल करने से भी बुकी नहीं हिचकिचाते? पैसे देने से इन्कार करने पर मारपीट, धमकाने-चमकाने से लेकर तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते है। बुकी इसके लिए 20 से 30 प्रतिशत की कमिशन गुण्डों को देते है। पुलिस चाहे तो इन वसूली पथक बने गुण्डों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शहर के बिगड़ते हालातों पर लगाम लगा सकती है?

विशेष उल्लेखनीय है कि, गोंदिया के बहुतांश पुलिस विभाग कर्मियों को सभी बुकीयों के बारे में अच्छी खासी जानकारी है, अब यह उनकी इच्छाशक्ति पर निर्भर है, कि समाज में फैल रही जुआ नामक बुराई को मिटाने के लिए पुलिस कितनी दिलचस्पी दिखाती है।

– राजीव कुशवाहा / रवि आर्य

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