Published On : Fri, Dec 8th, 2017

समान निधि वितरण को लेकर उग्र हुए नगरसेवक पुणेकर

नागपुर: आज आमसभा में प्रशोत्तर काल के दौरान कांग्रेस के नगरसेवक रमेश पुणेकर ने महापौर, उपमहापौर, स्थाई समिति द्वारा नगरसेवकों को समान विकास निधि नहीं दी जा रही है। अतिरिक्त आयुक्त सिद्दीक़ी का साफ कहना है कि पहले सत्तापक्ष से अनुमति दिलाए। इस मामले में महापौर और सत्तापक्ष का सकारात्मक जवाब न मिलने से नाराज पुणेकर ने सभा त्याग किया।

वहीं सत्तापक्ष के नगरसेवकों ने बताया कि स्थाई समिति की मंजूरी के बाद भी टेंडर नहीं निकाला जा रहा है। सत्तापक्ष नेता ने उलट जवाब दिया कि जब पुणेकर जब भाजपा में थे उन्हें भरपूर निधि दी गई थी। पुणेकर ने जवाब दिया कि हमें नहीं विकास कार्य के लिए दिया गया था। सत्तापक्ष के एक नगरसेवक ने तो यहां तक कह दिया समान निधि चाहिए आरक्षण क्यों चाहिए?

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सभी नगरसेवकों के हित में प्रशासन और सत्तापक्ष से खुल्लमखुल्ला लड़ने वाले रमेश पुणेकर को खुद के पक्ष के तथाकथित नेताओं ने साथ नहीं दिया।इनकी मिलीभगत से प्रशासन गोलमोल और सत्तापक्ष उग्रता से पुणेकर के सवालों का जवाब दे रहे थे। कांग्रेस नगरसेवकों में आपसी गुटबाजी के कारण पुणेकर को सत्तापक्ष ने गंभीरता से नहीं लिया,फिर भी पुणेकर के उग्रता से सदन,प्रशासन,सत्तापक्ष सकते में जरूर आ गया।

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जब प्रशासन और सत्तापक्ष ने पुणेकर के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया तो उन्होंने एजेंडा और माइक को फेंक सभागृह के बाहर चले गए। बात-बात पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाली बसपा की चुप्पी समझ से परे थी,शायद उन्हें संतोषजनक निधि मिली या आश्वासन दे दिया होंगा। जनता से चुनकर आये व हज़ारों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नगरसेवकों को स्थाई समिति सभापति के निजी सहायक एवं बिल्डर फरकसे बड़ी बेरहमी से नगरसेवकों के साथ बर्ताव करते हैं। ये हैं अदना सा कर्मी लेकिन सत्तापक्ष के आशीर्वाद से रौबदार पद पर आसीन होकर बड़े बड़े अधिकारियों को भी आये दिन फटकार लगाते या उनकी खोट निकालते देखे गए। इस चक्कर में वर्तमान स्थाई समिति सभापति पर उंगलियां उठनी लाजमी हैं।मनपा आयुक्त ने सबसे पहले फरकसे को उनके मूल विभाग भेजना चाहिए,अन्यथा उनकी कार्यशैली पर भी उंगलियां उठती देर नहीं लगेगी। पुणेकर के उग्र तेवर को देख प्रभारी आयुक्त रिज़वान सिद्दीकी की हालत देखने लायक थी,क्योंकि प्रभारी महापौर नए नए थे,वर्ना पुराने होते तो कटघरे में खड़ा कर उठे सवालों का जवाब देने को मजबूर कर देते। सिद्दीक़ी की आमसभा में हालत का पीछे बैठे अधिकारी गण मुस्कुरा-मुस्कुरा कर मजे ले रहे थे।

उल्लेखनीय यह हैं कि जब पुणेकर सभा त्याग कर बाहर चले गए तो वे बाहर कैंटीन में बैठ गए जहाँ उन्हें समझाने बिल्डर एवं स्थाई समिति सभापति के निजी सहायक फरकसे पहुंचे, दरअसल इनके ही मनमानी की वजह से सारा मामला बिगड़ा बताया जा रहा है।

– Rajeev Ranjan Kushwaha

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