Published On : Sat, Jan 7th, 2017

आदिवासी विद्यार्थियों के शोषण मामले में तुली पब्लिक स्कूल को कारण बताओ नोटिस

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नागपुर:
कोराडी रोड स्थित तुली पब्लिक स्कूल में आदिवासियों विद्यार्थियों के साथ छेड़खानी को महाराष्ट्र सरकार के आदिवासी मंत्रालय ने अतिशय गंभीरता से लिया है और इस मामले के लिए स्कूल प्रशासन को प्रथमदृष्टया लापरवाह और प्रकरण दबाने का दोषी मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आदिवासी विकास विभाग के अवर आयुक्त एस.डब्ल्यू सावरकर ने एक विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी है।

उल्लेखनीय है कि गत 4 जनवरी को आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के एक दल ने कोराडी रोड स्थित तुली पब्लिक स्कूल के औचक निरीक्षण में यह पाया था कि स्कूल की कुछ आदिवासी छात्राओं के साथ लंबे समय से छेड़खानी हो रही है और इन बच्चियों को मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। स्कूल प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद इन छात्राओं को ही चुप कराने और मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।

न तो इस प्रकरण की उस समय पुलिस में शिकायत की गई और न ही स्कूल प्रशासन ने अपने स्तर पर कोई जाँच कराने की पहल ही की, जबकि कानून ऐसा करना जरूरी होता है। और तो और आदिवासी विकास विभाग को इस प्रकरण की सूचना तक नहीं दी गई, यह भी इस तरह के मामले में की जाने वाली एक जरूरी कार्रवाई होती है। हालाँकि निरीक्षण दल ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोराडी थाने में मामले की शिकायत की और पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी को भारतीय दण्ड विधान की धारा 354 (अ) प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेस एक्ट 2012 की धाराएं 7, 8, 11, 12 की तहत एवं एट्रोसिटी एक्ट की तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार किया।

विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि शनिवार 7 तारीख को आदिवासी विभाग के अवर आयुक्त, कोराडी पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक, जिला बाल संरक्षक अधिकारी, सहायक परियोजना अधिकारी समेत इतर अधिकारियों ने तुली शाला प्रबंधन से चर्चा की और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।

अवर आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों ने परियोजना अधिकारी को यह भी निर्देश दिया है कि अगले सप्ताह पीड़ित छात्राओं को बाल कल्याण समिति (बाल न्यायालय) के समक्ष पेश कर उनके बयान दर्ज कराए जाएं और इन छात्राओं की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।