Published On : Wed, Jan 2nd, 2019

पदाधिकारी की जिद और अधिकारियों की मनमानी से ठेकेदार के 3 बैंक खाते हुए एनपीए !

वर्हाडे ,कोहाड़, पुरी की मनमानी से आयुक्त की घोषणाए साबित हो रही बेमानी

नागपुर: नागपुर मनपा के इतिहास में आज तक ऐसे पदाधिकारी न देखे और न सुने गए, जिन्होंने हदों से ज्यादा ठेकेदारों का शोषण किया हो . लेकिन इस दौर में यह अनुभव अमूमन सभी ठेकेदार महसूस कर रहे हैं. नतीजा ठेकेदारों ने पदाधिकारियों को नज़रअंदाज कर दिया और आज आलम यह है कि एक-एक निविदा चौथी-पांचवीं बार बुलाई जा रही है फिर भी ठेका लेने वाला कोई तैयार नहीं. कई दर्जन ठेकेदार बैंक से भागे-भागे फिर रहे है तो कई बकायेदारों से बचते. कुछ के तो बैंक वालों ने उनके सारे के सारे खाते ‘एनपीए’ कर दिए जाने की सूचना मिली है.

खबर छपते ही पदाधिकारी और अकड़ गया
हुआ यूँ कि इस वर्तमान पदाधिकारी ने मनपा के पंजीकृत ठेकेदार से अपने घर,किचन,कुछ कार्यालय पर लाखों खर्च करवाया. ऊपर से नगदी भी लाखों में वसूल लिया. साथ में आधा दर्जन बार शराब-कबाब मुफ्त में बुलाकर आनंद ले लिया. इतना ही नहीं ठेकेदार से वर्क आर्डर में तय जगह के बजाय अन्यत्र जगहों में छोटे-मोटे विकास कार्य भी करवा लिया. पदाधिकारी के इस कारनामें में उपअभियंता कोहाड़ और वार्ड अधिकारी प्रकाश वराडे का योगदान उल्लेखनीय हैं.

नागपुर टुडे ने उक्त मसले को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था. खबर प्रकाशित होते ही उपअभियंता की पदाधिकारी के घर पर बैठक हुई. जिसमें ठेकेदार के मसले सुलझाने के बजाय चौथी बार विकास कार्य स्थल के मुआयना की जिद्द पदाधिकारी करने लगे. जबकि सभी जगहों का चयन उन्होंने ही किया था. अब पदाधिकारी खोट ढूंढ कर ठेकेदार को डुबोना चाह रहे हैं और नगदी लौटने या घर-कार्यालय का कायापलट का खर्च देने के मामले में पदाधिकारी मुकर गया. उपअभियंता भी पदाधिकारी का पक्ष ले रहे हैं. उपअभियंता ने ठेकेदार को चेताया कि चुपचाप पदाधिकारी के निर्देश का पालन करें अन्यथा पैसे डूब जाएंगे.

दूसरी ओर खबर मिली कि इस ठेकेदार के ३ विभिन्न बैंक खाते थे. समय पर भुगतान न करने से बैंक प्रशासन ने उसे ‘एनपीए’ श्रेणी में डाल दिया और जुर्माने के तौर पर ठेकेदार से लगभग ४ लाख रुपए वसूले. बताया जाता है कि ठेकेदार ने बैंक का जुर्माना चुकाने के लिए ब्याज पर पैसे लिए जिससे ठेकेदार कर्जदार हो गया.


उक्त ठेकेदार ने गांधीबाग जोन अंतर्गत ३ नगरसेवकों के निर्देश पर लाखों रुपयों का विकासकार्य किया. लेकिन यहां के सहायक अभियंता पुरी इस ठेकेदार का बिल बनाने के बजाय पिछले १० माह से उससे चक्कर लगना रहे हैं. जब भी ठेकदार इनसे बिल बनाने की मांग करता तो ये ‘साइट निरिक्षण’ की धमकी देते. जब ‘साइड’ दिखाने की तैयारी ठेकेदार दर्शाता तो मौके पर सहायक अभियंता पुरी पलट जाते.

अब ठेकेदार मनपा आयुक्त से गुहार लगा रहे हैं कि इस तरह के मामलों को मनपा आयुक्त गंभीरता से लें, अन्यथा उनकी कथनी और करनी में फर्क नज़र आने लगेगा. कोहाड़ और पुरी पर गंभीर कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे छुपे-दबे मामले सार्वजानिक होना शुरू हो जाएंगे. तो दूसरी ओर ऐसे पदाधिकारी पर भी राजनीतिक दलों को लगाम लगाना की जरूरत है जो पक्ष की छवि को बट्टा लगाने में गुरेज नहीं करते.