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    Published On : Sun, Sep 21st, 2014

    विदर्भ में भाजपा और कांग्रेस पड़ते हैं शिव सेना, राकांपा पर भारी !

    नागपुर टुडे.

    राज्य में विधान सभा चुनावों के लिए भाजपा और शिव सेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर पहले ही खींचतान चल रही है जिसमे सेना अपनी मांग मनवाने पर अड़ी है हालांकि विदर्भ में हालत इससे बिलकुल अलग हैं. यही बात कांग्रेस और राकांपा पर भी लागू होती है.
    क्षेत्रीय पार्टी के रूप में अपना प्रभाव रखने वाली शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस को विदर्भ में भाजपा और कांग्रेस की दयादृष्टि पर आश्रित रहना पड़ता है, लेकिन चुनाव आते ही नजारा बदल सा जाता है और अपने अपने गठबंधन सहयोगियों को बनाने में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही एड़ी छोटी का जोर लगाना पड़ता है.
    कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान विदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिए ११ सीटें छोड़ी थी. इनमें से राष्ट्रवादी सिर्फ ४ सीटें जीतने में सफलता पा सकी. भाजपा ने शिवसेना के लिए २८ छोड़ी थी, ८ जगह ही जीत दर्ज कर पाई.
    इस बार कांग्रेस और भाजपा पिछले चुनाव के दौरान क्रमशः राष्ट्रवादी कांग्रेस व शिवसेना को दी गई जगह कम करने के लिए शक्ति प्रदर्शन कर रहा है.
    उक्त नीति को देख शिवसेना लगातार भाजपा से कह रही है कि सेना बड़ा भाई है,वही विदर्भ में सेना छोटे भाई की भूमिका से आज तक उभर कर नहीं आ सकी है. दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस प्रभावी दर्शाने में कभी कोताही नहीं बरतती है, फिर भी विदर्भ में खुद को स्थापित नहीं कर सकी.

    नागपुर में कमजोर है सेना
    नागपुर राज्य की उपराजधानी होने के साथ साथ विदर्भ का सबसे अहम शहर है.इस शहर की ६ विधान सभाओं में से शिवसेना के पास एक सीट है,जिसे बढ़ाने में सेना ने कभी रूचि नहीं दिखाई।सेना एक ही सीट को लेकर कभी पूर्व नागपुर तो कभी दक्षिण नागपुर के मध्य हिचखोले खाती रही है.इस बार शिवसैनिकों मेँ यह भी सीट गंवाने का डर समाया है.

    शिव सेना के हाथ से जाएगा दक्षिण नागपुर!
    विदर्भ में भाजपा की राजनीति पर नियंत्रण वाले केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का शिवसेना से ज्यादा लगाव नहीं है.लोकसभा चुनाव में गडकरी को शिवसेना ने कथित रूप से धौंस दिखाई थी, लेकिन उनकी चल नहीं पाई.इसी लोकसभा में नितिन गडकरी को दक्षिण नागपुर से ९०००० मत मिले, जिसके कारण भाजपा इस दक्षिण नागपुर विधानसभा को सेना से हथियाने हेतु जी-तोड़ मेहनत कर रही है.इस चक्कर में इच्छुक किरण पांडव,शेखर सावरबांधे,किशोर कुमेरिया,किशोर कन्हेरे आदि नेताओं की ख्वाहिशों पर तत्काल पानी फिर रहा है.

    विदर्भ में पिछड़े सेना और राकांपा
    राज्य में कांग्रेस से २८८ में से आधी सीटें मांगने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस के पास नागपुर में एक भी विधानसभा क्षेत्र नहीं है.जिले के ६ में से हिंगणा और काटोल विस क्षेत्र है.शहर की एक सीट के लिए लालायित राष्ट्रवादी कांग्रेस को कांग्रेस घास नहीं डाल रही है.राष्ट्रवादी नेता अजित पवार की शह पर पूर्व नागपुर से अतुल लोंढे तैयारी कर रहे हैं,लेकिन कांग्रेस लोंढे को महत्त्व नहीं दे रही है.
    पिछले विधानसभा चुनाव में जिले के राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार ने आपसी कलह के चलते हिंगणा सीट गंवा दी थी. इस बार भी सेना और कांग्रेस को भाजपा व कांग्रेस की दयादृष्टि पर आश्रित रहना होगा,इसलिए कि सेना और राष्ट्रवादी नेताओं ने विदर्भ में अपने कार्यकर्ताओ को प्रोत्साहित करने की कभी कोई ठोस पहल नहीं की.

    pic-41द्वारा:-राजीव रंजन कुशवाहा


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