Published On : Wed, Jan 15th, 2020

स्पर्धा धार्मिकता धर्मानुरागी धर्मात्मा बनाने मे लगी है- मनोज बंड

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नागपुर : धार्मिकता धर्मानुरागी धर्मात्मा बनाने मे लगी है यह उक्ताशय पुलक मंच परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष मनोज बंड ने अखिल दिगंबर सैतवाल संस्था के रौप्य महोत्सवी अधिवेशन मे आलंदी (पुणे) मे व्यक्त किया.

मनोज बंड ने कहा आज का युवक यथार्थवादी है वह सपने देखता है पर पारिवारिक संस्कार धर्म के विषय मे कौतुहल गुरु महाराजो के प्रति आकर्षण समाज मे कुछ करने का जुनुन इन सब बातों से वह धर्म मंदिर समाज मे सम्मीलित होता है. हमारा यथार्थवादी आज का युवा जो सोशल मीडिया के इस जमाने मे व्हाट्सअप्प, फेसबुक या अन्य माध्यम से खुद को अपडेट करते रहता है ऐसे समय जब वह मंदिर या धार्मिक कार्य मे जाता है तो उसे वहा की क्रिया बनावटी नाटकीय दिखायी देती है और वह देखता है की वह देखता है की यहा पाप पुण्य को पैसे मे तोला जा रहा है. हमारा युवा मंच माला मे उलझ जाता है.

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वह तो धर्म समझने आया था पर यहा तो स्पर्धा धार्मिकता धर्मानुरागी, धर्मात्मा बनाने मे लगी है और बढावे से पाये मे है और हमारे युवा युवाओं को यहा पसंद नही उसके लिये धर्म सीधा चाहिये, आनंदी चाहिये जिसमे पाप और पुण्य नही आत्मिक आनंद उठाना चाहिये, सेवा चाहिये और जब उसे यह सब नही मिला और देखा की लोग तो भगवान को सोने-चांदी के सिंहासन पर बिठा रहे है, बोली के माध्यम से पुण्यातमा तय हो रहे है तो उसने भगवान से प्रश्न किया क्या धर्म यही है. समाज के तरफ जाता है तो वहा का चित्र बडा ही विचित्र है समाज मे अनेक संस्थाओं का निर्माण हुआ है सभी संस्थाये अपने आपको बडी करने मे लगी है.

हमारे वरिष्ठो को पता है हम है तो ही संस्था बडी हो पायेंगी इसलिये वो पद छोडने को तैयार नही और हमारा युवा वहा का कार्यकर्ता है और सबसे मजेदार बात तो यह की हमारे वरिष्ठो को लगता है यह तो युवा कार्यकर्ता है इसको समाज मे मैने लाया है अब इसने सिर्फ मेरे साथ ही काम करना चाहिये, किसी और संस्था मे नही और फिर उसको रोक लगायी जाती है और हमारा युवा वहा से भी अलग हो जाता है, हम फिर उसे दोष देते है की आज का युवा धर्म से दूर है क्यो है. आज के युवाओं से भी अपेक्षा है की आप वह आज कल समय का बहाना बहुत बहुत बहुत बनाते है पर टीवी, मोबाईल, व्हाट्सअप्प, आदि मे घंटो समय बर्बाद कर देते है पर जब स्वयं के कल्याण के लिये धर्म की बात आती है तो कहते है की हमारे पास समय नही है, दुसरे कार्य के लिये समय निकालते है तो थोडा समय धर्मध्यान के लिये भी समय निकालना चाहिये.

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