Published On : Mon, Feb 23rd, 2015

अकोला : आम जनता उतरी रास्ते पर, चौराहे बैठकर नागरिकों की नारेबाजी ओर रास्ता रोको


मनपा की निष्क्रियता के खिलाफ

on the road
अकोला। बुधवार 18 फरवरी को अशोक वाटिका चौराहे पर तीन वर्षीय अथर्व उजाडे को जान से हाथ धोना पडा था. चौराहे पर लगातार जारी लीकेज के कारण बने गड्ढे में फिसलने से अथर्व की मौत हुई थी. इस घटना के निषेध में आज सौरव चौधरी के नेतृत्व में नागरिक रास्ते पर उतरकर वाटिका चौराहे पर रास्ता रोको आंदोलन किया. जिसके कारण महामार्ग का यातायात लगभग 40 मिनट बाधित रहा. नगर पुलिस उपाधीक्षक डा. प्रवीण मुंढे तथा आयुक्त सोमनाथ शेटे के आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म किया गया.

शहर के रास्तों पर बने जानलेवा गड्ढों के कारण आए दिन घटनेवाली दुर्घटनाएं, नागरिकों को होनेवाली शारीरिक परेशानियों तथा गड्ढों में भरी गंदगी के कारण शहरवासियों का स्वास्थ्य खतरे में पड गया है, जिसे देखते हुए महापालिका प्रशासन के खिलाफ आज नागरिकों का आक्रोश रास्ता रोको के रूप में फूटा. कल दोपहर अशोक वाटिका चौराहे पर नागरिकों ने मनपा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रास्ता रोका. तीन दिन पूर्व वाटिका चौक पर बने गड्ढे में वाहन फिसलने के कारण डा. उजाडे समेत उनकी मां एवं तीन वर्षीय अथर्व दुर्घटनाग्रस्त हुए थे, जिसमें अथर्व की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस संदर्भ में एक दिन पहले आप पार्टी की ओर से रास्ता रोको किया गया था. बावजूद इसके दुर्घटना के बाद भी रास्ते की न तो मरम्मत हुई न किसी के खिलाफ कार्रवाई.

फलस्वरूप गुस्साए नागरिकों ने रास्ता रोको आंदोलन कर अपना विरोध प्रदर्शित किया. हाथ में ली तख्तियों में मनपा प्रशासन का निषेध, रास्ते की मरम्मत करने की मांग, सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई थी. आंदोलनकर्ता शहर की अव्यवस्था को सुधारने तथा रास्तों के गड्ढे पाटने एवं लिकेज बंद करने की मांग कर रहे है. आरंभ में नारेबाजी करनेवाले प्रदर्शनकारियों ने रास्ते पर बैठकर रास्ता रोको आंदोलन किया, जिससे चौराहे के चारों रास्तों का यातायात बाधित हुआ और सडक पर वाहनों की कतारें लग गई. यातायात पुलिस निरीक्षक प्रकाश सावकार, कोतवाली निरीक्षक अढाऊ समेत डा. प्रवीण मुंढे के समझाने के बाद भी आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन खत्म नहीं किया. फलस्वरूप मनपा आयुक्त सोमनाथ शेटे ने स्वयं आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर अव्यवस्था को सुधारने, रास्तों पर बने गड्ढे पाटने का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन खत्म किया गया.

आंदोलनकर्ताओं में शाहिद खान, मनोज पाटील, एड.सुमीत बजाज, फैजल अजीजी, आशीष सिरसाट, योगेश ढोरे, पियूष धुमाले, अजय चव्हाण, निशिकांत बडगे, विक्की बावरी, यूसुफ भाई, किशोर अग्रवाल, पवन माहेश्वरी, सोहेल खान, जुबेर सिंघानिया, शकुर लोधी, राहुल महल्ले, नितीन चिलात्रे, गणेश देशमुख, अमित बन्सल, विनय लालवाणी, रिजवान खान, नकीम खान, शहजाद अनवर एवं कार्तिक डिंगडिंगे का समावेश था.