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    Published On : Sat, Jun 5th, 2021

    वाघोड़ा-शिवरा घाट पर जांच के नाम पर सांठगांठ

    – जिला खनन अधिकारी कार्यालय के कार्यप्रणाली संदिग्ध,कुछ सफेदपोशों के हित में सक्रिय

    नागपुर – बांधकाम के लिए अहम सामग्री ‘रेत’ के अवैध उत्खनन,परिवहन,खरीद-बिक्री पिछले 1 साल से पूर्ण शबाब पर हैं।इससे सरकार को राजस्व नुकसान,सृष्टि को पर्यावरण के असंतुलन की मार झेलनी पड़ रही।इस बीच जिला प्रशासन और उसके खनिकर्म विभाग को जेब में रखने का दावा कर पिछले साल से जब कोरोना महामारी पूर्ण उफान पर था तब से लेकर आजतक केंद्रीय पर्यावरण विभाग के दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर सरकारी-गैरसरकारी मांगकर्ताओं को ‘रेत’ की पूर्तता कर रहे.गुरुवार को वाघोड़ा-शिवरा घाट पर जिला खनन विभाग की दस्ता ने दस्तक दी और ग़ैरकृत नज़र आने के बाद दोनों घाट संचालकों से समझौता कर बिना कार्रवाई किये उलटे पांव लौट गई.इस सन्दर्भ में जिला खनन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाई.अक्सर ऐसे मामलों में वे सप्ताह भर संपर्क करने वालों से दूरी बना लेते हैं.

    पिछले वर्ष जिले के सबसे बड़े रेत माफिया जो सफेदपोश कहलाते हैं,उन्होंने जिलाधिकारी से कोरोना काल में ‘रेत’ का स्टॉक को बेचने की अनुमति दिलवाई।इसके आड़ में रेत माफिया के संरक्षण में जिले के लगभग आधा दर्जन रेत घाटों में जमकर ‘रेत’ का अवैध उत्खनन किया गया.इससे राज्य सरकार को करोड़ों में राजस्व और पर्यावरण का नुकसान हुआ.इसकी शिकायत जिलाधिकारी रविंद्र ठाकरे से की गई तो वे अपना पल्ला झाड़ राज्य सरकार से शिकायत करने का निर्देश दिए.अर्थात उक्त ग़ैरकृत में जिला प्रशासन का भी पूर्ण सहयोग था.

    इसके बाद इस वर्ष जिले के डेढ़ दर्जन रेत घाटों की निलामी हुई.इसके पूर्व उक्त रेत माफिया ने एक होटल में जिले के सभी रेत माफियाओं/व्यवसायियों की एक बैठक ली और टेंडर न हो इसलिए आपस में समझौता हो जाए,ऐसा प्रयास किया।लेकिन बैठक के आयोजक के क्षेत्र में ही समझौता होने के बजाय स्पर्धा हो गई.ऐसे में आयोजक रेत माफिया ने जिले के रेत घाटों में एकाधिकार हो इसलिए महत्वपूर्ण रेत घाटों में स्थानीय गुर्गो की तैनातगी कर दी.तैनात गुर्गो ने प्रतिस्पर्धी रेत घाट संचालकों को जिला प्रशासन सह जिला खनन विभाग मार्फ़त नाना प्रकार से दिक्कतें देने लगे और इस बीच अपने करीबियों के रेत घाटों का रेत सरकारी-गैरसरकारी मांगकर्ताओं को फर्जी रॉयल्टी पेश कर रेत पूर्ति करते रहे.

    उल्लेखनीय यह हैं कि जिले के प्रमुख रेत माफियाओं के रेत घाटों (वाघोड़ा-शिवरा) पर गुरुवार को जिला खनन विभाग का दस्ता पाटिल के नेतृत्व में दस्तक दिया।दोनों घाटों पर अवैध रेत का स्टॉक दिखा,जबकि नियमानुसार रेत का स्टॉक 5 किलोमीटर दूर होना चाहिए था.इन घाटों पर रेत उत्खनन के लिए मशीन भी दिखी,वैसे जिले के सभी रेत घाटों पर रेत का उत्खनन मशीन से हो रहा,वह भी 24 घंटे।इन रेत के स्टॉक सह अन्य ग़ैरकृत पर कार्रवाई करने के बजाय रेत घाट संचालकों से समझौता कर बिना कार्रवाई किये उलटे पांव लौट गए.

    इस सन्दर्भ में जिला खनन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।फ़िलहाल जिले के रेत घाटों पर रेत माफियाओं का साम्राज्य हैं,जिलाधिकारी और जिला खनन अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.इससे पर्यावरण का नुकसान के साथ सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा.इस सन्दर्भ में राजस्व मंत्रालय की भी चुप्पी समझ से परे हैं.

    लगभग 15000 ब्रास स्टॉक मिला वाघोड़ा में
    जिला खनन(माइनिंग) विभाग का दस्ता पाटिल के नेतृत्व में वाघोड़ा पहुंचा,जहाँ उन्हें के निकट स्टॉक(अवैध) में लगभग 15000 बरस रेत मिली।संभवतः इस घाट के संचालकों को इतने ही ब्रास की रॉयल्टी दी गई थी.इससे ज्यादा रेत घाट संचालकों ने पिछले ४ माह में बेच डाली।अगर रॉयल्टी के हिसाब से रेत की बिक्री की होगी तो स्टॉक में जमा रेत की बिकी के लिए घाट संचालकों के पास अब रॉयल्टी नहीं होगी और फर्जी रॉयल्टी पर पहले रेत बिक्री की होंगी तो शेष रॉयल्टी के आधार पर जमा रेत की बिक्री की जाएगी।इसका अंदाजा पाटिल ने लगा लिया था और इसी आधार पर समझौता किये जाने की खबर हैं,अगर समझौता नहीं किया तो कार्रवाई करने में देरी क्यों ? इस गैरकृत में SDO की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही,क्यूंकि ग़ैरकृत पर रेत जप्त करने का अधिकार SDO को होने के बावजूद वे मामले को नज़रअंदाज कर रहे !

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