– स्थानीय वेकोलि प्रशासन की मिलीभगत , निकटवर्ती कोयले की टालों की जाँच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा
कन्हान -बहुत पुरानी और सटीक कहावत हैं कि कोयले की दलाली में हाथ काला होता हैं.ऐसा ही कुछ वेस्टर्न कोल्फ़ील्ड्स लिमिटेड की ओपनकास्ट कोयला खदान कन्हान में हैं.जिन्हें इंदर और गोंडगांव के नाम से जाना-पहचाना जाता हैं.जहाँ से प्रत्येक 24 घंटे में एक दर्जन गाड़ियों से कोयला चोरी हो रहा और स्थानीय वेकोलि (WCL) प्रशासन सिरे से नज़रअंदाज कर रहा.इससे वेकोलि को पिछले कुछ दशकों से बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा.इस मामले की जाँच के लिए वेकोलि प्रबंधन को खदानों के निकट के कोयले की टालों की जाँच करने से ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो सकता हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त खदानों से कोयला चोरी करने वाली आधा दर्जन स्थानीय लोगों की टोली हैं,जो रातभर कोयला चुनने का काम करते है और इसी दरम्यान 10 से 16 गाड़ियों में भरते हैं.इसके बाद रोजाना लगभग 4 से 5 बजे सुबह अपने गंतव्य स्थल या फिर निकटवर्ती टालों में खाली करते हैं.इस प्रक्रिया से आम नागरिकों को इसकी आपत्तिजनक भनक नहीं लगती।
उक्त आधा दर्जन टोली चोरी करते या कोयला चुनते वक़्त उस परिसर में नए व्यक्ति के आवाजाही या इस काम में बाधा डालने हेतु औजारों से लैस होते हैं,इसलिए कोई स्थानीय सफेदपोश इनका विरोध नहीं करता।इतना ही नहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन भी ले-दे कर मामले को नज़रअंदाज कर रहा हैं.
बताया जा रहा कि रोजाना चोरी हो रही कोयले की प्रत्येक ट्रकों का वजन किया जाए तो 20 से 23 टन अर्थात 200 से 250 टन कोयला पिछले 2 से 3 दशक से चोरी हो रहा.
इसकी जानकारी वेकोलि की स्थानीय उपक्षेत्रीय कार्यालय के सभी संबंधितों को हैं,क्यूंकि उनकी और खदानों के सुरक्षा कर्मी सह कांटा घर में तैनात सभी को उनका मासिक हिस्सा समय पर मिलता रहता हैं,इसलिए कोई उक्त चोरी पर कार्रवाई करने की हिमाकत नहीं करता हैं.
स्थानीय जागरूक नागरिकों ने वेकोलि के नए CMD मनोज कुमार गुप्ता से गुजारिश की हैं कि वेकोलि में पिछले लगभग 3 दशक से जारी कोयला चोरी रोक सरकारी नुकसान पर अंकुश लगाया जाए.इसके लिए स्थानीय कोयले की टालों ( रमेश,भुजंग,मुकेश,कुंदन,फारुख,शैलेश,कुणाल आदि संचालकों) की सूक्ष्म जाँच की जाए तो मामले का पर्दाफाश हो सकता हैं.उक्त कोयला चोरी के लिए सक्रीय टोली इन्हीं टालों से ताल्लुक रखती हैं.
एमओडीआई फाउंडेशन ने CMD से यह भी मांग की हैं कि वेकोलि में खदानों की सुरक्षा के लिए CISF की तैनातगी की पहल शुरू की जाये,इससे PRODUCTION LOSS कम से कम होगा।अब देखना यह हैं कि नए CMD उक्त मामले को किस नज़रिये से देखते और कदम उठाते हैं.
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