
तत्कालीन चुनाव आयोग के मुखिया वीएस संपथ ने 3 अक्टूबर को गुजरात और हिमाचल प्रदेश में एक साथ चुनाव की तारीख की घोषणा की थी। रूपानी ने कहा कि उस वक्त आदर्श आचार संहिता 83 दिनों तक चला था। उस वक्त चुनाव आयोग में वीएस संपथ, नसीम जैदी और एचएस ब्रह्मा थे। लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री के आरोपों को वीएस संपथ ने सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है। संपथ ने कहा कि रूपानी अनुचित और बेबुनियाद बात कर रहे हैं, चुनाव आयोग हमेशा स्वतंत्रता और उच्चतम परंपरा का पालन करता है, वह कभी अपने संवैधानिक कर्तव्यों से समझौता नहीं करता।
रूपानी के आरोपों पर एचएस ब्रह्मा ने भी खारिज किया है, उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने 2012 में किसी दबाव में आकर काम नहीं किया था। हालांकि आदर्श आचार संहिता लंबे समय तक के लिए थी, लेकिन यह आरोप लगाना कि ऐसा किसी दल के दबाव में किया गया है यह बेबुनियाद है। गौरतलब है कि गुजरात में हिमाचल प्रदेश के साथ चुनावों की तारीख की घोषणा नहीं की गई है जिसको लेकर काफी विवाद हो रहा है। तमाम विपक्षी दल इसके लिए भाजपा और मोदी सरकार को जिम्मदार ठहरा रही हैं। उनका आरोप है कि ऐसा भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।
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