
नागपुर: मीसा बंदियो को राज्य में पेंशन दिए जाने की माँग लंबे समय से की जा रही है। बुधवार को सदन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी पेंशन दिए जाने का आश्वाशन दिया है। राज्य में बीजेपी की सरकार आने के बाद उम्मीद थी कि बीजेपी शाषित अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी मीसा बंदियों को पेंशन शुरू होगी लेकिन अब तक ऐसा हो ही नहीं पाया है।
मीसा बंदियों के लिए लड़ाई लड़ रहे संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ के मुताबिक उन्हें बीते तीन वर्षो से राज्य सरकार सिर्फ़ आश्वाशन ही दे रही है, संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रवि कासखेड़ीकर कहना है बीते साल सितंबर के महीने में सरकार को इस संबंध में निवेदन भी दिया गया था लेकिन तब से अब तक सरकार महज़ विचार ही कर रही है।
राज्य में करीब 9000 हज़ार मीसा बंदी है। आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आदेश पर 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 के दौरान सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले को जेल में बंद कर दिया जाता है। आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम कानून के तरह गिरफ़्तार किये गए लोग लगभग कांग्रेस से इतर अन्य विचारधारा और राजनितिक दलों के लोग थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,समाजवादी दल और रेल हड़ताल से जुड़े लोगो को मीसा एक्ट के तहत जेल में ठूसा गया था। संघ का मानना है की आपातकाल के दौरान देश में लड़ी गई लड़ाई स्वतंत्रता की लड़ाई जैसी ही थी। फ़िलहाल में मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,झारखंड,उत्तरप्रदेश, बिहार,राजस्थान में मीसा बंदियों को पेंशन लागू है।
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