Published On : Fri, Feb 6th, 2015

अकोला : अनुसंधान को मूर्त रूप दें कृषि विश्वविद्यालय : मुख्यमंत्री

 

डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के 29 वें दीक्षांत समारोह में 1570 छात्रों को उपाधि प्रदान
25 आचार्य उपाधियां, 28 स्वर्ण, 16 रजत पदक व 36 नगद पुरस्कार प्रदान

Dr. panjabrao Deshmukh Krushi University Akola  (1)
अकोला। बदलते हुए मौसम में उन्नत तकनीक व उत्पादनक्षम बीजों का अनुसंधान करने की क्षमता प्रदेश के चारों कृषि विश्वविद्यालयों में है. अपने अनुसंधान व तकनीक को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए विश्वविद्यालय इसे किसानों की जमीनों तक पहुंचाने का प्रयास करें तभी सही मायने में किसानों की प्रगति संभव है. यह प्रतिपादन प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन करते हुए किया.

उन्होंने अपने भाषण में प्रदेश की वर्तमान कृषि समस्याओं को सुलझाने के लिए जलसंवर्धन के महत्व को अधोरेखित करते हुए ‘जलयुक्त शिवार’ अभियान में प्रदेश के 4 हजार गांवों में जलसंवर्धन के लिए आवश्यक सभी काम करने पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य के चारों कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि क्षेत्र में आनेवाले संकटों से निबटाने की क्षमता है. लेकिन जब तक कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसंधान कागजों से उतरकर किसानों के खेतों में प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखाई देंगे इसके अच्छे परिणाम सामने नहीं आएंगे. इसलिए जरूरी है कि कृषि विश्वविद्यालय अपने विस्तार शिक्षा की कक्षा को और मजबूत बनाते हुए किसानों तक उन्नत तकनीक व अनुसंधान पहुंचाने का प्रयास करें जिससें कृषि में एक नए अध्याय की शुरूआत हो. गुरूवार 5 फरवरी को डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विवि के दीक्षांत सभागृह में कुल 1570 स्नातकों को विभिन्न उपाधियां प्रदान की गई. समारोह में 25 छात्रों को आचार्य, 28 स्वर्ण, 16 रौप्य पदक व 36 नगद पुरस्कार प्रदान किइ गए. पीकेवी के वैज्ञानिकों तथा प्राध्यापकों को उत्कृष्ठ पुरस्कारों से नवाजा गया. समारोह की अध्यक्षता विश्व विद्यालय के प्रतिकुलपति प्रदेश के कृषि मंत्री एकनाथ खडसे ने की, पीकेवी के उपकुलपति डा. रविप्रकाश दाणी ने विवि का ब्यौरा पढा व स्वागतपूर्ण भाषण कर छात्रों को बधाई दी. मंच पर दीक्षांत समारोह के लिए प्रमुख रूप से उपस्थित कोंकण विश्व विद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा. किसन लवांदे, कुल सचिव ज्ञानेश्वर भारती, कार्यकारी परिषद के सदस्य, विद्वत परिषद के सदस्य पीकेवी के वैज्ञानिक उपस्थित थे.

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सफल कार्य से अपने व्यक्तित्व का प्रदर्शन करें छात्र : डा. दाणी

अध्ययन करते हुए छात्रों ने इस संस्था का गौरव बढाया है. यह उद्बोधन डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति डा. रविप्रकाश दाणी ने उपाधिकांक्षी छात्रों को किया. पीकेवी के २९ वे दीक्षात समारोह में स्वागतपूर्ण भाषण दीक्षांत समारोह में उपाधि व पुरस्कार प्राप्त छात्रों का उन्होंने अभिनंदन किया. विवि के छात्रों ने सामाजिक व शैक्षिक क्षेत्र में गौरव बढाया है. 2014-15 में डा.अभय शिराले, गणेश चौधरी, बापी दास इन छात्रों ने कृषि चयन मंडल की परीक्षा उत्तिर्ण कर भारती कृषि अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिक के रूप में अपना स्थान निश्चित किया है. अंकित शर्मा ने ऊंची कूद में कांस्य पदक प्राप्त किया है, कु. प्रतीक्षा वाघमारे ने आंतर विद्यालय युवा महोत्सव में कला विभाग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है, तेजस्वीता बडगुजर इस छात्रा ने गणतंत्र दिन की परेड में शामिल होकर सम्मान बढाया है.

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साधनों की कमी से जूझ रहे कृषि विश्वविद्यालय : डा. लवांदे

कृषि विश्वविद्यालयों का उत्तरदायित्व सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. इसे नकारा नहीं जा सकता. लेकिन कृषि विश्वविद्यालयों से अपेक्षा करते समय इसमें लगने वाले सभी संसाधनों की पूर्ति की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. यह प्रतिपादन डा. बालासाहब सावंत कृषि विश्वविद्यालय दापोली के पूर्व उपकुलपति डा. किसन लवांदे ने किया. डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के 29 वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने दीक्षांत उद्बोधन करते हुए कृषि विवि. को समन्वय के अभाव में आने वाली समस्याओं को उजागर किया . विश्वविद्यालयों के अधूरे साधन सामग्री को लेकर चिंता जताते हुइ उन्होंने कहा कि विगत चार वर्षो से 40 प्रतिशत प्राध्यापक संवर्ग के पद रिक्त हैं. निजी महाविद्यालय सरकारी महाविद्यालयों की तुलना में पांच गुना बढ गए है. वर्तमान में देश में 62 कृषि विश्व विद्यालय व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्ग 60 अनुसंधान संस्थाओं का कार्य चलता है. कृषि में चुनौतियां गंभीर है. बदलती हुई स्थितियों में यह अधिक गंभीर होंगी. कठोर परिश्रम, लगन, प्रामाणिकता व अनुशासन के बल पर ही इन चुनौतियों से लढा जा सकता है. अपने दीक्षांत भाषण का समापन डा. लवांदे ने कुछ इस तरह से किया उन्होंने कहा ‘वतन की फिक्र कर ए नादान मुसीबत आने वाली है. यह मुसीबत भूख और प्यास की है. और इसका इलाज केवल उन्नत कृषि से ही हो सकता है.