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    Published On : Wed, Aug 12th, 2020

    सीएफसी’ ठेकेदार प्रस्थापितों से मिले,सभी ने किए हाथ खड़े

    मनपा प्रशासन को स्थाई समिति की मुहर का बेसब्री से इंतज़ार

    नागपुर – मनपा में नई व सीधी भर्ती लगभग 3 दशक से बंद हैं। कार्यरत कर्मियों की जगह भरपाई के लिए एक सोची समझी रणनीत की तर्ज पर ‘सीएफसी’ के तहत एक ठेकेदार को कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध करवाने जिम्मा दिया गया। ठेकेदार का कार्यकाल समाप्ति पर आ चुका हैं, मनपा प्रशासन ने भी ठेकेदार मुक्त ‘सीएफसी’ की नीति तैयार कर मंजूरी हेतु स्थाई समिति को प्रस्ताव भेज दिया,जहां फिलहाल मामला थम सा गया,इस बीच ठेकेदार ने मनपा में तथाकथित प्रस्थापितों जनप्रतिनिधियों से पुनर्स्थापना के लिए समर्थन जुटाने की हर संभव प्रयास की लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए।इससे ठेकेदार काफी हतोत्साहित हो गया और तो और कल कोविड-19 की जांच में पॉजिटिव भी पाया गया।

    याद रहे कि ठेकेदार ने शुरुआत में मनमानी शोषण किया।पिछले कुछ वर्षों से 2800 रुपए/ऑपरेटर/माह कमा रहा।मनपा प्रशासन की वक्रदृष्टि पड़ी तो ठेकेदार को निपटाने की योजना बनाई गई।मामला अंतिम मोड़ पर पहुंच चुका और स्थाई समिति की मुहर बाद ठेकेदार की छुट्टी बाद मनपा का मासिक लाखों की बचत होंगी।अब ठेकेदार मनपायुक्त पर दबाव के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहा हैं ताकि उसे कायम रखा जाए.

    ‘सीएफसी’ के तहत मनपा को कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध करवाने का ठेका देशपांडे नामक ठेकेदार को मिलीभगत के तहत ठेका दिया गया था। तब 5 दर्जन से कुछ अधिक ऑपरेटर उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव को नियमों में ढाल कर ठेका दिया गया था,शुरुआत में ठेकेदार ने ऑपरेटरों का मनमानी आर्थिक शोषण किया करता था। आधे से अधिक पेमेंट हजम कर लिया जाता था। न भविष्य निधि भरी जाती थी और न ही मेडिकल सुविधा के रूप में ईएसआईसी का पंजीयन कर्मियों सह उनके पारिवारिक सदस्यों का करवाया गया था। इसके नाम में ठेकेदार ऑपरेटरों से वेतन काट जरूर लेते थे।
    दिनों दिन मनपा में सेवानिवृति बढ़ते गई और कर्मियों की कमी होती गई.इनकी भरपाई या तो एवजदारों या फिर ‘सीएफसी’ के ऑपरेटरों से की जाती रही.इस चक्कर में पूर्व महापौर सह कई सफेदपोशों और पूर्व के आयुक्तों ने भी अपने-अपने करीबियों के परिजनों को ‘सीएफसी’ के तहत ऑपरेटर बनवाकर आर्थिक लाभ उठाते देखें गए.आज की सूरत में 184 ऑपरेटर मनपा के विभिन्न विभागों कागजों पर तैनात हैं.

    जुगाड़ू ऑपरेटर मनपा को चुना लगा रहे
    ‘सीएफसी’ के तहत तथाकथित 184 ऑपरेटरों में से आधे सही मायने में मनपा को अमूल्य सेवाएं दे रहे,शेष आधे जुगाड़ू ऑपरेटर मनपा को आर्थिक चुना लगा रहे.इसमें से कई दर्जन ऐसे भी ऑपरेटर हैं जो सिर्फ सहल करने और फैशन परेड करते अन्यत्र विभागों में घंटों ‘टाइमपास’ करते दिख जाएंगे।कुछ ऑपरेटर ऐसे भी हैं जिनके शौक का खर्चा मासिक वेतन से निकल रहा,आते हैं कारों से.दरअसल मनपा प्रशासन ने कभी ऑपरेटरों की जरुरत मामले पर कभी समीक्षा नहीं की.कि होती तो मनपा को भी प्रत्येक माह लाखों का बचत हो रहा होता।

    उक्त ठेकेदार देशपांडे-सिंह का मनपा के साथ हुआ करार समाप्ति पर हैं,इसलिए मनपा प्रशासन के निर्देश पर आर्थिक बचत के मद्देनज़र ठेकेदार को हटाने और उनके ऑपरेटरों को कायम रखने का निर्णय लिया गया.ठेकेदार को हटाने से मनपा प्रशासन का मासिक 5 लाख रूपए का कम से कम बचत होंगा।

    वहीं दूसरी ओर ऑपरेटरों की नई सिरे से भर्ती की जाएंगी,नए ऑपरेटरों को 15000 मासिक वेतन दिया जाएगा।अर्थात ऑपरेटरों के मासिक वेतन में से कुल 8300 के लगभग कटौती की जाएंगी।इससे मनपा का 1525000 मासिक बचत होंगा अर्थात मनपा प्रशासन को ठेकेदार हटाने से 2025000 रूपए का मासिक बचत होंगा। इस नई आर्थिक व्यवस्था को स्वीकार करने वाले ऑपरेटर ही मनपा में टिक पाएंगे।

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    दूसरी ओर उक्त मासिक नुकसान और बेदखल से बचने के लिए उक्त ठेकेदार मनपा प्रशासन पर दबाव लेन के लिए सक्रिय देखा जा रहा.
    उक्त प्रस्ताव सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कर स्थाई समिति तक पहुँच गई हैं,जिसे अगली बैठक में मुहर लग सकती हैं,गर ठेकेदार देशपांडे -सिंह द्वारा कोई पॉलिटिकल दबाव नहीं लाया गया तो समिति की मुहर आसानी से लग जाएंगी वर्ना तय परंपरा के अनुसार पुनर्विचार के लिए सम्बंधित विभाग को लौटा दिया जाएगा।

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