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    Published On : Mon, Aug 31st, 2020

    सीमेंट सड़क ; फेज-२ की जानकारी देने में आनाकानी कर रही पीडब्लूडी

    -नए मनपायुक्त के लिए बड़ी चुनौती, भ्रष्टाचार का संदेह इसलिए आरटीआई निवेदन का जवाब देने के बजाय पत्र दर पत्र भेज कर समय काटा जा रहा

    नागपुर : भ्रष्टाचार को हवा देने और मूल कागजात को छिपाने के लिए शुरू से ही मनपा लोककर्म विभाग चर्चे में रहा.क्यूंकि इस विभाग का कभी सूक्ष्मता से अंकेक्षण नहीं हुआ.इस विभाग पर भी नए मनपायुक्त गौर करें अन्यथा विभाग के घाघ अधिकारी यूँ ही भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत कर मनपा को चुना लगाते रहेंगे।

    गत माह जुलाई के अंतिम सप्ताह मनपा लोककर्म विभाग के प्रमुख अधीक्षक अभियंता मनोज तालेवार को सीमेंट सड़क फेज-२ संबंधी जानकारी मांगी गई.टेलीफोनिक चर्चा में उन्होंने खुद को जिलाधिकारी की मीटिंग का जानकारी देकर मीटिंग बाद जानकारी उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।उसी दिन दोपहर को उन्हें पुनः संपर्क किया गया तो वे कॉल नहीं स्वीकारें।अंततः उनके कार्यालय के निकट मुलाकात हुई.उन्होंने प्रत्यक्ष जानकारी देने के बजाय अपने सहायक उप अभियंता उइके को जानकारी देने का निर्देश दिया।यह वहीं सक्षम उइके हैं जो अधीक्षक अभियंता के वरदहस्त से अधीक्षक अभियंता कार्यालय और मनपा प्रयोगशाला विभाग दोनों आज के प्रचलन पद्दत से संचलन कर रहा.

    उइके ने उक्त सवाल का विस्तारित जानकारी देने अथवा उपलब्ध करवाने से हाथ खड़े कर दिया और लकड़गंज के सम्बंधित उपअभियंता से सीधा संपर्क करने का निर्देश दिया।

    जब लकड़गंज के उपअभियंता गेडाम से संपर्क किया गया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि अधीक्षक अभियंता तालेवार से अनुमति लेनी पड़ेंगी।फिर कुछ देर बाद गेडाम का कॉल आया कि उक्त जानकारी आरटीआई के तहत मांग करने पर तुरंत उपलब्ध करवा दिया जाएगा। ३१ जुलाई २०२० को आरटीआई के तहत जानकारी के लिए आवेदन किया गया,आज १ माह पूर्ण हो गया लेकिन आजतक जवाब नहीं मिला।

    इस बीच गुमराह करने के लिए ४ पत्र जरूर गेडाम ने आवेदक तक पहुंचाए।गेडाम का पहला पत्र ४ अगस्त २०२० को प्राप्त हुआ कि सवाल क्रमांक ६,७ लोककर्म विभाग से सम्बंधित नहीं हैं,इसलिए आवेदक अपने स्तर से अलग से करें।जबकि यह प्रश्न लोककर्म विभाग अंतर्गत किये गए काम के भुगतान का मामला हैं.दूसरा पत्र १२ अगस्त २०२० को भेजा गया,वह यह कि जिस ठेकेदार कंपनी से सम्बंधित जानकारी मांगी गई थी,उस ठेकेदार कंपनी को पत्र लिख उनसे अनुमति मांगी गई कि काम के लिए उपयोग किया गया जॉइंट वेंचर की प्रत उक्त आवेदक को दे अथवा न दे.इसके साथ तीसरा प्रत यह भेजा गया कि आवेदक के मांग के अनुरूप की फाइल स्थाई समिति कार्यालय में हैं,आवेदक को जानकारी देने के लिए आवश्यक हैं इसलिए उक्त फाइल लकड़गंज जोन को लौटाए।

    गेडाम का चौथा पत्र २५ अगस्त २०२० को प्राप्त हुआ,जिसमें ११६२ रूपए भरने का निर्देश दिया गया था.उक्त ठेकेदार कंपनी से सम्बंधित जॉइंट वेंचर अग्रीमेंट देने से मना किया गया,विभाग ने काम पूर्ण होने के बाद कम्प्लीशन सर्टिफिकेट नहीं दिए जाने की जानकारी दी,जबकि इसी विभाग के पहल पर भुगतान कर दिया गया.

    उक्त हालातों के मद्देनज़र नए मनपा आयुक्त ने लोककर्म विभाग अंतर्गत मांगी गई जानकारी पर व्यक्त किये गए संदेह की गंभीरता को देखते हुए सूक्ष्म जाँच करें।

    उक्त घटनाक्रम से स्थाई समिति सभापति को भी अवगत करवाया गया.बावजूद इसके सम्बंधित अधिकारी को उच्च अधिकारी का अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जाना समझ से परे हैं.

    अब देखना यह हैं नए मनपायुक्त उक्त मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं.

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