Published On : Thu, Dec 25th, 2014

मूल : प्रबोधनात्मक प्रसंग के प्रस्तुतिकरण से गणेशोत्सव मनाये – पो.उ.अ. महामुनि

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Wardha ganeshotsav  (2)
मूल (चंद्रपुर)। उत्सव के लिए जमा किये चंदे का गलत इस्तेमाल न करते हुए अच्छे कार्यो के लिए उसका उपयोग करें. जिससे आत्मिक समाधान मिलेगा. इसलिए प्रबोधनात्मक प्रसंग के प्रस्तुतिकरण से गणेशोत्सव मनाये. ऐसा उपविभागीय पुलिस अधिकारी बाबाराव महामुनि ने कहां.

जिला पुलिस प्रशासन और पुलिस स्टेशन मूल की ओर से आयोजित गणेशोत्सव स्पर्धा में 2013 का पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में वे बोल रहे थे. इस दौरान नगराध्यक्ष रीना थेरकर, उपाध्यक्ष प्रवीण मोहुर्ले, जेष्ठ पत्रकार रामकृष्ण नखाते आदि उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुवात नगरध्यक्षा रीना थेरकर ने गणेश पुजन और दिप प्रज्वलन कर किया. इस दौरान गणेशोत्सव स्पर्धा मुल्यांकन समिती के परिक्षक प्रा. मिलिंद लगड़ेकर का निधन होने से उन्हें सामुहिक श्रद्धांजलि दी गयी. अपने मनोगत में पत्रकार रामकृष्ण नखाते और रीना थेरकर ने पुलिस प्रशासन के सामाजिक और धार्मिक दायित्व के लिए आभार माना.
इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से आयोजित गणेशोत्सव स्पर्धा का मुल्यांकन करने वाले परीक्षक रामकृष्ण नखाते, प्रा. दिलीप जगनाडे, प्रा. राजश्री मस्तीलवार, भारत सलाम, अशोक येरमे, विठ्ठलराव लगड़ेवार, संजय पडोले ने कार्यकर्ता नानाजी गजभिये, प्रमोद बोरेवार, रसूल इब्राहिम शेख और प्रवीण आगड़े का मान्यवरों के हांथो सम्मानचिन्ह तथा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मान किया गया.

गणेशोत्सव स्पर्धा में प्रथम क्रमांक प्राप्त करने वाले नेताजी सार्वजनिक गणेश मंडल को उपविभागीय अधिकारी महामुनि के हांथो 10 हजार रूपये का चेक, सम्मानचिन्ह तथा प्रशस्तिपत्र, द्वितीय क्रमांक के संगम गणेश मंडल को नगराध्यक्ष रीना थेरकर के हांतो 5 हजार का चेक, सम्मानचिन्ह तथा प्रशस्तिपत्र, तथा तीसरे क्रमांक के शिव गणेश मंडल को उपाध्यक्ष प्रवीण मोहुर्ले के हांतो 3 हजार रूपये का चेक सम्मानचिन्ह तथा प्रशस्तिपत्र देकर अभिनंदन किया गया. सरस्वती गणेश और युवाशक्ति गणेश मंडल को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.

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Wardha ganeshotsav  (1)
प्रास्ताविक और आभार व्यक्त करते हुए थानेदार जी. आर. विखे ने नए साल में होनेवाले गणेशोतस्व स्पर्धा में सहभागी होने के लिए मंडल ने शुरुवात से ही झांकिया निर्माण करके सहकार्य करने की विनंती की. संजय पडोले ने कार्यक्रम का संचालन किया. कार्यक्रम की सफलता के लिए सपोनी कुंघाडक़र, कोहरे, रामटेके, पोउनि गडपायले, वासुदेव आत्राम, श्रीराम कुमरे, सुनील मेश्राम, सुरेश खोब्रागड़े ने परिश्रम लिया.

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