Published On : Wed, Sep 23rd, 2020

सितंबर नहीं अक्टूबर में पेश हो सकती हैं 4 माह के लिए बजट

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– वर्ष 2020-21 का रिवाइज व 2021-22 का प्रस्तावित बजट 15 फरवरी के पूर्व पेश करेंगे मनपायुक्त

नागपुर – मनपा का वर्ष 2020-21 का बजट वैसे अप्रैल 2020 तक प्रस्तुत हो जाना चाहिए था लेकिन तत्कालीन आयुक्त तुकाराम मुंढे की नित के कारण लगभग 6 माह की देरी हो गई,विशेषज्ञ के अध्ययन और अति विशेषज्ञ के अनुमति में देरी की वजह से यह बजट अक्टूबर में प्रस्तुत हो सकता हैं।अर्थात प्रस्तुत बजट को क्रियान्वयन के लिए मात्र 4 माह ही मिलने हैं।

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मनपा परंपरा और नियम के अनुसार प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी के पूर्व मनपा आयुक्त का रिवाइज व अगले आर्थिक वर्ष के लिए प्रस्तावित बजट पेश किया जाता रहा हैं। अगर अक्टूबर में बजट पेश भी हुई तो आयुक्त की मंजूरी मिलने में अक्टूबर माह चला जाएगा। नवंबर से 15 फरवरी तक प्रस्तुत बजट के हिसाब से आयुक्त की मंजूरी बाद क्रियान्वयन होंगा,फिर आयुक्त के बजट में परंपरा अनुसार प्रस्तुत बजट में कटौती होनी हैं। अर्थात आयुक्त के रिवाइज बजट के हिसाब से वर्ष 2021-22 का आम बजट पेश होने तक क्रियान्वयन होंगा।

इस 4 माह की बजट में स्थाई समिति को पिछले 6 माह के आय और अगले 6 माह की संभावित आय के हिसाब से तैयार करना होगा। मनपा पर कर्मियों का 84 माह का बकाया,उनके वेतन से कटौती की गई जीपीएफ व डीसीपीएस आदि काटी गई लेकिन भरा नहीं गया उसे ब्याज सह भरना,7 वां वेतन आयोग के सिफारिश अनुसार वेतन लागू करना,सेवानिवृत्त कर्मियों को उनकी जमा-पूंजी देना सह पेंशन का मासिक भुगतान,ठेकेदार कंपनियों को करोड़ों में भुगतान बकाया देना,राज्य व केंद्र सरकार के प्रकल्पों में मनपा की भागीदारी का शेयर देना प्राथमिकता तो हैं लेकिन इसे बजट में कितनी महत्व मिलती,यह समय ही बताएगा। क्योंकि वर्ष 2022 के फरवरी में मनपा चुनाव हैं, और 10000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर्मियों से जुड़ा मामला हैं। इसके अलावा नगरसेवकों के मासिक मानधन व मेडिकल भुगतान का प्रावधान सह उनकी ‘फिक्स प्रायोरिटी’ को भी बजट में प्रमुखता से स्थान दिया जा सकता हैं।

मनपा के सर्वपक्षीय दिग्गज नगरसेवकों की इस बजट को लेकर बस इतनी सी ख्वाइस हैं कि पिछले बजट के टेंडर होने के बाद और वर्क आर्डर जारी होने के बाद के काम रोके गए,उन्हें पूरा करने के मामले को प्राथमिकता मिले। ऐसा हुआ तो एक भी नया काम को बजट में जगह नहीं मिल पाएगी,मिल भी गई तो किसी न किसी मद में बड़ी कटौती होनी तय हैं।

सीएफसी का नया टेंडर का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
पूर्व मनपायुक्त मुंढे के कार्यकाल में सीएफसी (लगभग180 कंप्यूटर ऑपरेटर) का टेंडर खत्म होने के बाद मुंढे ने पुराने ठेकेदार को हटाकर सिर्फ कंप्यूटर ऑपरेटर की सीधी ठेके पद्धति पर नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार करवाया।जिसे 2 माह पूर्व मंजूरी के लिए स्थाई समिति में भेजा गया। लेकिन आजतक उसे स्थाई समिति की बैठक के विषय पत्रिका में स्थान नहीं मिला। उधर पुराना ठेकेदार कायम रहने के लिए हर तरफ से हाथ पांव मार रहा लेकिन दाल नहीं गल रही। दूसरी ओर विषय पत्रिका में स्थान न मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे ?

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