Published On : Tue, Sep 16th, 2014

उमरखेड़ : बौद्ध धम्म ही सुखी जीवन जीने का मार्ग


भदंत सदानंद महाथेरो ने कहा, महावंदना-धम्मदेशना कार्यक्रम हुआ

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उमरखेड़ (यवतमाल)।
भौतिक सुखों की लालसा के चलते दुःखों की खाई में गिरे विश्व के लोगों के सुख, शांति और संतोष के लिए तथागत बुद्भ ने धम्म का रास्ता बताया है. यही सुखी जीवन जीने का मार्ग है. अखिल भारतीय भिक्षु संघ के संघनायक भदंत सदानंद महाथेरो ने यह विचार व्यक्त किए.

उमरखेड़ के बोधिवन में फुले-आंबेडकरी साहित्य संसद और सुमेधबोधी धम्मप्रसारक मंडल के तत्वावधान में आयोजित महावंदना तथा धम्मदेशना कार्यक्रम के अध्यक्ष के नाते वे बोल रहे थे. इस अवसर पर मंच पर श्रीलंका से पधारे भदंत पैय्यतिस महाथेरो, भदंत सुमेधबोधी महाथेरो, भदंत गुणानंद, भदंत महानाग, भदंत सारिपुत्र, भदंत प्राचार्य खेमधम्मो महाथेरो, भदंत विपस्सी, भदंत सुमंगल, भदंत अखघोष, भदंत राहुल, भदंत सुबोध, भदंत बोधानंद, भदंत मेतानन्द, भदंत धम्मदीप, भदंत संघबोधी, भदंत विशुधनन्द, भदंत नित्यानंद, भदंत आनंद, भदंत धम्मदिन सहित भिक्षुसंघ उपस्थित था.

महावंदना पर्व के संयोजक किशोर भगत ने प्रारंभ में आयोजन की भूमिका विशद की. महावंदना की शुरुआत भदंत प्राचार्य खेमधम्मो महाथेरो ने की. सावित्रीबाई फुले महिला मंडल की ओर से उपस्थित भिक्षु संघ को चीवरदान सहित आठ वस्तुएं भेंट स्वरूप दी गईं. इस मौके पर भदंत गुणानंद, भदंत सारिपुत्र, भदंत महानाग की धम्मदेशना हुई.

कार्यक्रम का संचालन आत्माराम हापसे ने किया, जबकि मिलिंद मुनेश्वर ने आभार माना. प्रा. राजाभाऊ धांडे ने प्रास्ताविक भाषण किया. विधायक विजय खडसे ने अपने संबोधन में एक होने की सलाह दी. कार्यक्रम की सफलता के लिए सुमेधबोधी धम्मप्रसारक मंडल, सावित्रीबाई फुले महिला मंडल, फुले आंबेडकरी साहित्य संसद के सदस्यों ने प्रयास किया.