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    Published On : Wed, Sep 30th, 2020

    पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति के रास्ते में महानिदेशक कार्यालय की बाधा

    वर्ष 2013 में पुलिस कांस्टेबलों ने परीक्षा पास होने के बाद भी पुलिस के उप-निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के रास्ते में महानिदेशक कार्यालय ही सबसे बड़ी बाधा है और रिटायर्ड के कगार पर मौजूद पुलिस के सिपाहियों में भारी असंतोष है। गृह मंत्री अनिल देशमुख के हस्ताक्षर के बाद मुंबई की सूची तैयार होने के बाद भी पुलिस महानिदेशक के कार्यालय ने पदोन्नति देने से परहेज किया।

    आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, गृह मंत्री अनिल देशमुख और अतिरिक्त मुख्य सचिव सीताराम कुंटे के दो बार पत्राचार के बावजूद डीजीपी कार्यालय के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने वर्ष 2019 और 2020 में पुलिस परीक्षा में उप-निरीक्षक उत्तीर्ण करने वालों को पदोन्नति देने के लिए जानकारी मांगी थी। महाराष्ट्र में पास हुए मुंबई के 318 पुलिस कांस्टेबलों की कैडर सहित पूरी जानकारी पिछले छह महीने से पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा लंबित रखी गई है। गृह विभाग ने पहले इस जानकारी प्राप्त करने के लिए अनुमति मांगी थी, विशेषकर इसमें विधि विभाग और राजस्व विभाग की अनुमती मांगी थी।

    सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में एक सरकारी परिपत्र दिनांक 29/12/2017 जारी किया है जिसमें पिछड़े वर्ग के पुलिस कांस्टेबल ने वर्ष 2004 के बाद पदोन्नति को स्वीकार किया था। उनके नाम को छोड़कर, मुंबई पुलिस आयुक्तालय में 318 पुलिस कांस्टेबल से जानकारी मांगी गई थी, लेकिन डीजीपी कार्यालय ने फिर से गृह विभाग को लिखा कि वरिष्ठता के अनुसार पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों / कांस्टेबलों को कैसे प्रमोशन दिया जाए। दिनांक 28/09/2020 को राज्य के गृह मंत्री, अनिल देशमुख ने वर्ष 2013 में  परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कांस्टेबलों की पदोन्नति को मंजूरी दी। 

    गृह मंत्री की मंजूरी के बाद भी दिनांक 29/09/2020 को विशेष पुलिस महानिरीक्षक स्थापना शाखा राजेश प्रधान ने एक आदेश जारी किया है, जो पुलिस कांस्टेबलों को पदोन्नत करने के लिए 06/10/2020 से पहले कैडर की जानकारी का अनुरोध कर रहे हैं, जिन्होंने आरक्षण का लाभ उठाकर पुलिस उप-निरीक्षक के पद पर पहुंच गए हैं। इससे 318 पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति बाधित हुई है। वास्तव में, 318 पुलिस कांस्टेबलों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के बावजूद, उनके प्रमोशन पर रोक लगाई गई इसमें से कुछ सेवानिवृत्ति के कगार पर थे, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई।

    पुलिस महानिदेशक के कार्यालय के नए पत्र के बाद, सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ दिनांक 29/12/2017 के परिपत्र का उल्लंघन किया गया है। कई पुलिस कांस्टेबल डीजीपी कार्यालय की शैली से तंग आ चुके हैं। जैसा कि कोई पुलिस कांस्टेबल नहीं है, पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में जानबूझकर समय-समय पर नीतियों का हेरफेर किया और अपनाया जा रहा है।

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