Published On : Thu, Sep 28th, 2017

प्रभाग ३५ में उपचुनाव: बाहरी पर स्थानीय भारी

Sandeep Gavai

नागपुर: शहर के दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत प्रभाग ३५(अ) के नगरसेवक नीलेश कुंभारे के निधन के बाद उपचुनाव लिया जा रहा है. कुंभारे भाजपा के नगरसेवक थे. इस उपचुनाव में भाजपा ने कुंभारे परिवार और स्थानीय कार्यकर्ताओं को विश्वास में न लेकर पश्चिम नागपुर में रहने वाले संदीप गवई को उम्मीदवार बनाया. इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में रोष है. जिसका असर प्रचार के साथ सम्पूर्ण मतदान व चुनाव प्रक्रिया पर दिख रहा हैं.

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने पुराने उम्मीदवार थोरात को पुनः मौका दिया है. यह प्रभाग का स्थानीय रहवासी और सर्वपक्षीय समर्थक कहा जा रहा है. बसपा का उम्मीदवार भी भाजपा के स्थानीय नेताओं के मनमाफिक है, तय रणनीति के हिसाब से भाजपा के जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का दावा स्थानीय भाजपाई कर रहे हैं. प्रमुख तीनों उम्मीदवारों में सबसे संपन्न व मजबूत भाजपा उम्मीदवार हैं लेकिन उसे कांग्रेसी स्थानीय उम्मीदवार अब तक बराबरी का टक्कर दे रहा है.

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इस चुनाव के लिए मतदान ११ अक्टूबर व् मतगणना १२ अक्टूबर को होने वाली है. २७ सितंबर को उम्मीदवारों द्वारा दाखिल नाम वापिस लेने की अंतिम तारीख थी. तीन उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया.

उल्लेखनीय यह है कि राजनीति में जिन्दा रहने के लिए गवई ने नगरसेवक जैसे चुनाव का सहारा लिया. जिसके मनसूबे पूरे करने के लिए एवं आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र भाजपा नेता गडकरी ने गवई को अवसर दिया. भले ही सम्पूर्ण प्रभाग में विरोध की लहर हो. प्रभाग में ६०-६२ हज़ार मतदाता हैं. इनमें से पिछले चुनाव में ५५ से ६०% मतदाताओं ने मतदान किया था. इस बार त्योहारों का मौसम होने के साथ ही साथ चुनाव की अहमियत नहीं होने के कारण मतदान ३० से ३५% प्रतिशत तक घटने का अनुमान है.

इस चुनाव में सबसे ज्यादा मतदान जोगी नगर, भीम नगर, पंचासी प्लॉट में होने की संभावना है. इस क्षेत्र में पकड़ रखने वाला उम्मीदवार चुनाव के परिणाम पर असर करेगा. सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि स्वर्गीय नीलेश कुंभारे के परिजनों उसके नौकरी पेशे भाई ने भाजपा नेतृत्व से उम्मीदवारी मांगी थी. उम्मीदवारी नहीं मिलने पर बागी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर ही गए थे कि कल अचानक भाजपा नेतृत्व पर विशवास जताते हुए अपना नाम वापिस ले लिया. साथ ही बसपा के पूर्व नगरसेवक अजय डांगे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी जंग में कूद पड़े थे, उनका भी नाम वापिस ले लिया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है.

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