Published On : Sun, Sep 21st, 2014

भंडारा : भाजपा में जिलाध्यक्ष पद पर नाराजगी

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भंडारा।
भारतीय जनता पार्टी सत्ता से ज्यादा संघटना को महत्व देने वाला पक्ष जाना जाता है. लेकिन कुछ समय से संघटना से ज्यादा सत्ता को महत्व दिया जा रहा है. सत्ता और संघटना में जब-जब सत्ता हावी हुयी है, तब-तब भाजपा के कमजोर होने के उदाहरण बहुत है. अब ऐसी ही कुछ स्थिति नज़र है. पूर्व खासदार शिशुपाल पटले की ओर से भाजपा जिलाध्यक्ष पद डेढ़ साल पहले विधायक नाना पटोले को हस्तांतरित किया गया था. उसके बाद अप्रेल-मई 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में नाना पटोले खासदार बने. अभी विधानसभा के चुनाव होने वाले है लेकिन जिलाध्यक्ष का पद उनके ही पास है.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह खासदार हुए और देश के गृहमंत्री का पद संभाला. गृहमंत्री बनते ही उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और अमित शाह नये अध्यक्ष बने. खासदार नाना पटोले के उपर ये फार्मूला लागु नहीं होता क्या, ऐसा प्रश्न भाजपा का एक गुट उठा रहा है. खासदार होने से पटोले को अधिक समय दिल्ली में रहना पड़ता है और निवास स्थान नागपूर में होने से पक्ष संघटना के कार्य को समय नहीं दे पा रहे है. जब कभी वे मतदार संघ में आते है तो उनके आसपास समस्या लेकर लोग आते है. फिर पक्ष कार्यकर्ता कब अपने कार्य संदर्भ में चर्चा करेंगे. ऐसा प्रश्न भाजपा कार्यकर्ता पूछ रहे है.

पक्ष संघटना में जिलाध्यक्ष के अतिरिक्त अन्य पदाधिकारी होकर भी उनका निर्णय स्वतंत्र नहीं है. 90 प्रतिशत पदाधिकारी विधानसभा चुनाव के टिकिट लेने के लिए व्यस्त है. ऐसे में पक्ष संघटना की हालत खराब हुई तो हैरानी की बात नहीं है. प्रत्येक विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा मतदार संघ की 3-4 सभा होती है. इस दौरान ऐसी कोई भी सभा विधानसभा मतदार संघ में नहीं हुयी. पक्ष संघटना से ग्रामीण कार्यकर्ताओं को जोड़कर रखने का काम भी नहीं किया जा रहा. पक्ष की जिला बैठक, समन्वयी बैठक,बूथ कमिटी बैठक, ये सभी बंद है. ऐसे में विधानसभा चुनाव में भाजपा पार्टी का संघटना की ओर अनदेखी होने से क्या होगा इसकी ओर सभी का ध्यान है.

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