Published On : Thu, Jun 29th, 2017

बाहरी कार्यकर्ताओं से “ओवरलोड” होते जा रही भाजपा

BJP

Representational Pic


नागपुर:
नागपुर में एक पक्ष हल्का हो रहा तो दूसरा प्रमुख पक्ष “ओवरलोड” हो रहा है.वजह साफ़ है कि “ओवरलोड” होते जा रहे पक्ष को अभी से ही अगले लोकसभा चुनाव की चिंता सता रही है तो दूसरी ओर दिनोंदिन “हल्का” होते जा रहे पक्ष का कोई वाली नहीं होने से सभी बिखरे हुए है.

कार्यकर्ताओँ के मामले में “ओवरलोड” होते जा रहे पक्ष शुरू से ही संगठित है,जिसका इस देश में कोई तोड़ नहीं है.

पिछले लोकसभा चुनाव पूर्व से नगर के राजनीति ने सक्रिय कार्यकर्ता का हुजूम राजनैतिक हवा का रुख देख भाजपा की ओर लगातार बढ़ते जा रहे है.इस वजह से भाजपा कार्यकर्ताओँ के मामले में “ओवरलोड” सी हो गई है.भाजपा प्रवेश करने वाले कोई न कोई आश्वासन लेकर प्रवेश किये या करवाए गए.भाजपा को इनके उम्मीदों पर खरा उतरना अपने आप में एक प्रकार की चुनौती ही है.

इससे भाजपा ने दरी उठाने से लेकर दूसरे चरण याने युवा ब्रिगेड काफी अस्वस्थ नज़र आ रही है.बाहरी पक्ष से आने वाले कार्यकर्ताओं के श्रेणी के भाजपा में पहले से ही मूल कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद है.जिन्हे भाजपा को गल्ली से लेकर दिल्ली तक सत्ता में आने के बाद भी राजनैतिक लाभ नहीं मिला।वहीं बाहरी कार्यकर्ताओं जो भाजपा समर्थक या हाल-फिलहाल में आये उनमे से कुछ को भाजपा नेताओं नेताओं ने न सिर्फ प्रमुख जिम्मेदारियां दी बल्कि कुछ को प्रमुख पदों पर असिन किया गया,इतना ही नहीं कुछ निष्क्रियो को भी महामंडलों में जगह दी गई.

क्योंकि भाजपा शिष्टाचार से लबरेज पक्ष है, इसलिए यहाँ कुल तौर पर पार्टी अंतर्गत मामलों को सार्वजानिक नहीं किया जाता है,बल्कि दबी जुबान से दुखड़ा जरूर रोते-गाते भाजपाई कार्यकर्ता दिख जायेंगे।

कांग्रेस का कोई वाली नहीं
कांग्रेस पिछले काफी वर्षो से नगर में ख़त्म सी हो गई है.इसकी सबसे अहम् वजह यह है कि कांग्रेस आलाकमान को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में कोई रूचि नहीं है.इस वजह से पिछले लगभग एक दशक से स्थानीय कांग्रेस नाम की रह गई है,यहाँ दर्जनों गुट सक्रिय है,जिसका नमुना कोई भी चुनाव के दौरान खुल कर दिखाई देता है.इस वजह से बेलगाम नेताओं के चक्कर में अपना भविष्य ख़राब करने के बजाय सक्रीय/सक्षम कार्यकर्ता व उपेक्षित पदाधिकारी भाजपा की ओर बढ़ते जा रहे है.अगर यही आलम रहा तो अगले लोस,विस चुनाव का परिणाम भी कांग्रेस के विरोध में आना निश्चित हो गया है.कार्यकर्ताओं का चुनाव याने मनपा चुनाव ख़त्म हो गया,कार्यकर्ताओं को स्थानीय नेताओं ने जो चखमे दिए,उसका जवाब देने के लिए कार्यकर्तागण आगामी लोस-विस चुनाव का इंतजार कर रही है.