Published On : Tue, Nov 29th, 2016

मेसर्स दत्तात्रय एडवरटाइजिंग कंपनी को ठेका देने के लिए पॉलिसी में किया जा रहा बढ़ा बदलाव

  • नियम को तक पर रख मनपा प्रशासन सह पक्ष-विपक्ष कर रहे प्रयास
  • कंपनी ने दी १०० चौराहों के डिवाइडरों पर यूनिपोल लगाने का ठेका संबंधी “फर्स्ट फाइंडर” के तहत प्रस्ताव
  • मनपा क़ानूनी सलाहकार न उक्त प्रस्ताव के प्रति नकारात्मक रुख

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नागपुर: मुम्बई उच्च न्यायलय की नागपुर खंडपीठ के निर्देश पर नागपुर महानगरपालिका ने वर्ष २००० ( सुधारित २००१) में आउटडोर विज्ञापन पॉलिसी बनाई,आज १५ वर्ष बाद निजी स्वार्थ के लिए मनपा प्रशासन की मिलीभगत से पक्ष-विपक्ष किसी विज्ञापन एजेंसी को मुनाफा पहुँचाने के उद्देश्य से नियम-शर्तो में बड़ा बदलाव लाने हेतु आगामी आमसभा में प्रस्ताव ला रही है,तय रणनीति के अनुसार उक्त प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाएँगी। जबकि नियम-शर्ते बनाने व बदलाव का अधिकार राज्य सरकार को है,सरकार के नियम-शर्तो का पालन करने हेतु मनपा अपनी पॉलिसी बना सकती है.कहीँ ऐसा न हो कि आमसभा के मंजूरी के बाद उक्त मामले को लेकर जनहित याचिका न दायर हो जाये,इससे मनपा प्रशासन की किरकिरी होने को नाकारा नहीं जा सकता है.

मनपा के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार पक्ष-विपक्ष की सकारात्मक रुख के बाद अमरावती की मेसर्स दत्तात्रय एडवरटाइजिंग कंपनी ने विगत माह मनपा प्रशासन के संबंधित विभाग को नागपुर शहरभर के १०० प्रमुख चौराहे के सड़क विभाजक ( डिवाइडर ) पर बतौर “फर्स्ट फाइंडर” यूनिपोल लगाने का ठेका देने का प्रस्ताव दिया।इस प्रस्ताव के अनुसार उक्त कंपनी ने सम्पूर्ण लागत के मद्देनज़र ११ वर्ष के लिए ठेके देने की मांग की थी.प्रत्येक यूनिपोल २० बाय १० का रहेंगा। प्रस्ताव के अनुसार मनपा विज्ञापन नीति में “फर्स्ट फाइंडर” के अन्तर्गत आने वाले प्रस्ताव का ठेका के लिए ३ वर्ष का समयावधि निश्चित की गई थी,जिसे बदलकर ११ वर्ष करने की मांग की गई थी.

उक्त दत्तात्रय एडवरटाइजिंग कंपनी के प्रस्ताव को मनपा प्रशासन का संबंधित विभाग ने एक तीर से कई निशान साधने के उद्देश्य से तत्परता दिखानी शुरू की.जिसके तहत मनपा की “द आउटडोर एडवरटाइजिंग पॉलिसी २००१” के प्रमुख १६ नियमो को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया।इस बदलाव से मेसर्स दत्तात्रय एडवरटाइजिंग कंपनी के साथ कई को फायदा पहुँचाने की पहल की गई.

मनपा स्थावर विभाग ( विज्ञापन विभाग) ने वर्त्तमान विज्ञापन नीति में अंकित कुछ प्रमुख नियमो को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया।

– होर्डिंग की साइज में मुख्य बदलाव
– होर्डिंग की क्लेरेंस( clearance height) हाइट बढ़ा दिया
– नियमानुसार रोड लाइन ( रोड से दुरी ) में बदलाव
– एक होर्डिंग से दूसरे होर्डिंग की दुरी में बदलाव
– क्लबिंग ऑफ होर्डिंग नया नियम लाया
– वर्त्तमान पॉलिसी के क्लॉज़-२० ( रिस्ट्रिक्शन ) में बदलाव
– फर्स्ट फाइंडर पॉलिसी अधिकतम ३ साल को शिथिल करने
– यूनिपोल के नियम में मुख्य बदलाव
– दीवार के ऊपर होर्डिंग के साइज में बदलाव
– रोड शो के विज्ञापन के नियम में बदलाव
– इनोवेटिव मीडिया के समयावधि में बदलाव
– वाहनों पर विज्ञापन के कर प्रणाली में बदलाव
– स्पॉन्सर अडवेर्टीस्मेंट के समयावधि में बदलाव

उक्त बदलाव संबंधी प्रस्ताव मनपा स्थावर ( इस्टेट) विभाग २४ अक्टूबर २०१६ को तैयार कर वित्त विभाग को भेजा,वित्त विभाग ने २६ अक्टूबर २०१६ को क़ानूनी सलाह के लिए मनपा के क़ानूनी सलाहकार को भेजा।क़ानूनी सलाहकार ने ९ नवम्बर २०१६ को मनपा प्रशासन के उम्मीदों के विपरीत नकारात्मक जवाब मनपा प्रशासन को दिया।इस क़ानूनी सलाहकार के सलाह की तिलांजलि देकर मनपा प्रशासन ने स्थाई समिति की मुहर लगवा ली,और आमसभा के के मंजूरी के लिए प्रशासन को निर्देश दिया।संभवतः १ दिसम्बर २०१६ के आमसभा में उक्त प्रस्ताव मंजूरी हेतु लाया जाएंगे और पक्ष-विपक्ष की तय रणनीति के अनुसार उसे मंजूरी प्रदान कर दी जाएँगी।

उल्लेखनीय यह है कि मनपा की पॉलिसी के अन्तर्गत नियमो को बदलने के लिए राज्य सरकार का अधिकार है.लेकिन मनपा प्रशासन और पक्ष-विपक्ष की संयुक्त मिलीभगत से उक्त गैरकृत को सफल अंजाम देने की कोशिश की जा रही है.

यूनिपोल का प्रस्ताव शहर के चौराहों से आवाजाही करने वालों के लिए खतरनाक है,विज्ञापन नीति के अनुसार विज्ञापन की होर्डिंग मुख्य सड़क से २५ मीटर की दुरी पर स्थापित किया जाने का नियम है.ऐसे ही एक प्रकरण पर जनहित याचिका दायर हो चुकी है.

उक्त कंपनी के प्रस्ताव में यह भी अंकित है कि वह चौराहों के मार्ग विभाजक पर होर्डिंग(यूनिपोल) पर सीसीटीवी भी लगाएंगी,जबकि राज्य सरकार ने नागपुर शहर के चौराहों पर सीसीटीवी लगाने के लिए स्मार्ट सिटी अन्तर्गत प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर एल एंड टी को काम सौंप दे चुकी है.

प्रस्ताव देने वाली कंपनी के अनुसार उक्त प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए ढाई से तीन करोड़ का खर्च का अनुमान लगाया गया है,इसमें सहयोग करने वालों को खुश करने हेतु भरपूर प्रावधान किया गया है. यह भी तय है कि किसी भी षड्यंत्र के तहत उक्त प्रस्ताव को मंजूरी दी गई तो अल्पावधि ने उक्त प्रकरण जनहित याचिका के रूप में उच्च न्यायलय के दर पर न्याय हेतु गुहार लगाने की तैयारी की जानकारी मिली है.

नियम यह भी है कि मनपा विज्ञापन नीति के अनुसार फर्स्ट फाइंडर के अन्तर्गत आने वाले प्रस्तावों को सिर्फ ३ साल की मुद्दत ही दी जाती है.इसके बाद सम्पूर्ण संपत्ति मनपा की हो जाती है.उक्त ठेकेदार ने ३ साल को बढाकर ११ साल करने के लिए दबाव बनाया ,वही मनपा प्रशासन ३ साल को बढाकर ६ साल करने के लिए मानसिकता बना चुकी है.नियम यह भी है कि सरकारी जमीन पर फर्स्ट फाइंडर जैसे प्रस्ताव के सन्दर्भ में टेंडर बुलाना अनिवार्य है,मनपा के पूर्व आयुक्त संजीव जैस्वाल ने अपने कार्यकाल में फर्स्ट फाइंडर के अन्तर्गत आने वाले सभी प्रस्तावों के लिए टेंडर बुलाये थे. स्वच्छ छवि के लिए जाने जाने वाले मनपायुक्त और महापौर के लिए चुनौती भरा यह आखरी आमसभा होंगा,उक्त प्रस्ताव पारित होते ही साफ़ हो जायेगा,दूध का दूध और पानी का पानी।इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलवाने के लिए स्थाई समिति की रूचि है,अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो गई तो विपक्ष नेता के सूची में सत्तापक्ष द्वारा किये गए अनियमितताओं में एक और मुद्दा जुड़ जायेगा।अब देखना यह है कि सत्तापक्ष के बहुमत के मध्य विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अख्तियार करता है.

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– राजीव रंजन कुशवाहा