Published On : Sun, Sep 6th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

विधायक बंटी भांगडिया के दोनों डिस्चार्ज आवेदन खारिज, 7 सितंबर को चार्ज फ्रेमिंग

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विधायक बंटी भांगडिया के दोनों डिस्चार्ज आवेदन खारिज, 7 सितंबर को चार्ज फ्रेमिंगनागपुर | चिमूर के विधायक कीर्तिकुमार उर्फ बंटी भांगडिया को NIT घरकुल मामले में अदालत से झटका लगा है। नागपुर की 6th Joint C.J.J.D. & J.M.F.C. अदालत ने 3 सितंबर 2026 को उनके द्वारा दाखिल किए गए दोनों डिस्चार्ज आवेदन खारिज कर दिए।

दोनों मामले R.C.C. No. 2685/2024 और R.C.C. No. 4517/2024 हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, दोनों मामलों में उपलब्ध सामग्री और साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। अदालत ने दोनों मामलों में अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को चार्ज फ्रेमिंग के लिए निर्धारित की है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता अधिवक्ता तरुण परमार ने अधिवक्ता सतीश उके के माध्यम से प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (विशेष विधायक-सांसद न्यायालय), नागपुर में दो अलग-अलग शिकायतें दाखिल की थीं।

शिकायत के आधार पर वर्ष 2020 में अदालत ने नागपुर के सक्करदरा और इमामवाड़ा पुलिस थानों को अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। पुलिस जांच के बाद विधायक बंटी भांगडिया के खिलाफ दोनों मामलों में आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए गए।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भांगडिया ने खुद को बेघर बताकर NIT की घरकुल योजना के तहत दो फ्लैट बेहद कम कीमत पर हासिल किए। आगे आरोप है कि इन फ्लैटों में विभाजन कर उन्हें किराए पर दिया गया और उससे आय अर्जित की गई।

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हालांकि, ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और अभी अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

3 सितंबर के अदालत के आदेश में क्या हुआ?

दोनों मामलों में 3 सितंबर 2026 को आरोपी की ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन पेश किया गया था। अदालत ने उस दिन के लिए उपस्थिति से छूट प्रदान की।

लेकिन डिस्चार्ज आवेदन पर अदालत ने “Application is rejected” कहते हुए उसे खारिज कर दिया और अगली तारीख पर आरोपी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

R.C.C./0002685/2024 में अदालत ने अगली तारीख 7 सितंबर 2026 — Charge निर्धारित की है।

R.C.C./0004517/2024 में भी अगली तारीख 7 सितंबर 2026 — Charge निर्धारित की गई है।

आगे क्या होगा?

अब दोनों मामलों में 7 सितंबर 2026 को आरोप तय करने (Charge Framing) की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यह भी स्पष्ट है कि डिस्चार्ज आवेदन खारिज होना दोषसिद्धि नहीं है। अदालत ने अभी यह तय नहीं किया है कि लगाए गए आरोप साबित हुए हैं या नहीं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपों पर सुनवाई होगी।

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