
नागपुर – नागपुर शहर में सरकारी विभागों में शिकायत करने और पुलिस व आबकारी विभाग की कार्रवाई कराने का डर दिखाकर व्यापारियों को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने के मामले में प्रमोद परेश भागचंदानी को तहसील पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ फिरौती मांगने के आरोप में छठवीं एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस हिरासत (पीसीआर) में भेज दिया गया।
भागचंदानी के खिलाफ शहर के अलग-अलग पुलिस थानों में मामले दर्ज होने और अन्य लोगों से भी शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस मामले में शिकायतों की पड़ताल करने के साथ ही कथित वसूली के पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। इस कार्रवाई से उन व्यापारियों को भी शिकायत दर्ज कराने का हौसला मिलने की उम्मीद है, जो अब तक कथित धमकियों के कारण सामने आने से बच रहे थे।
2018 में शुरू हुआ कथित धमकी और वसूली का मामला
तहसील पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, बैरामजी टाउन निवासी हरीश रोचलदास केवलरामानी (62) कपड़ों के थोक व्यापारी हैं। गांधीबाग क्षेत्र में उनका स्टोर है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में पहली बार प्रमोद परेश भागचंदानी ने उन्हें फोन किया था। इस दौरान कथित तौर पर गालीगलौज करते हुए उन्हें विवाद में फंसाने की धमकी दी गई।
व्यापारी होने के कारण केवलरामानी किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते थे। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर उनसे 50 हजार रुपये ले लिए गए। उस समय उन्होंने मामले को आगे बढ़ाने के बजाय चुप रहना ही उचित समझा।
हालांकि, शिकायत के मुताबिक, यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। कुछ वर्षों बाद एक बार फिर उन्हें निशाना बनाया गया और सरकारी विभागों में शिकायत करने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई।
2024 में फिर पांच लाख रुपये की मांग का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2024 में भागचंदानी ने दोबारा फोन कर उनसे संपर्क किया। इस बार कथित तौर पर पुलिस और आबकारी विभाग में शिकायत करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की गई।
शिकायत में बताया गया है कि केवलरामानी ने विवाद और संभावित परेशानियों से बचने के लिए दो लाख रुपये दे दिए। इसके बावजूद कथित तौर पर पैसों की मांग बंद नहीं हुई। भागचंदानी लगातार रुपये मांग रहा था, जबकि व्यापारी उसे टालने का प्रयास कर रहे थे।
आरोप है कि जब केवलरामानी ने आगे रुपये देने से इनकार किया, तो उन्हें परेशान करने के लिए सरकारी विभागों में शिकायतें करने का सिलसिला शुरू कर दिया गया।
कारोबारी कार्यक्रमों में अधिकारियों को भेजने का भी आरोप
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। केवलरामानी के अनुसार, भागचंदानी पुलिस और आबकारी विभाग में शिकायत करने की धमकी देता था। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता के संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में भी कथित तौर पर इन विभागों के अधिकारियों को भेजने लगा।
इससे व्यापारी को अपने व्यवसाय और प्रतिष्ठा को लेकर परेशानी होने लगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह किसी तरह का विवाद नहीं चाहता था, लेकिन कथित तौर पर बार-बार पैसों की मांग और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाए जाने से उसकी मुश्किलें बढ़ती गईं।
शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि शिकायतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या किसी विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे वसूलने की कोशिश की गई थी।
शहर के अलग-अलग थानों में मामले दर्ज होने की चर्चा
प्रमोद परेश भागचंदानी के खिलाफ नागपुर शहर के विभिन्न पुलिस थानों में मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। तहसील थाने में दर्ज ताजा एफआईआर को उसके खिलाफ फिरौती से जुड़ा छठवां मामला बताया गया है।
इस मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर लंबे समय तक परेशान किए जाने की बात कही है। पुलिस को भागचंदानी के खिलाफ अन्य लोगों से भी शिकायतें मिलने की जानकारी है।
हालांकि, उसके खिलाफ दर्ज सभी मामलों की प्रकृति, उनमें लगाए गए आरोपों और प्रत्येक मामले की मौजूदा कानूनी स्थिति की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक है। किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है।
गिरफ्तारी के बाद चार दिन की पुलिस हिरासत
तहसील पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रमोद परेश भागचंदानी के खिलाफ फिरौती मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया। इसके बाद बुधवार को उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
न्यायालय ने पुलिस की मांग पर उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस दौरान पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच और पूछताछ कर सकती है।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतकर्ता से कथित तौर पर कितनी रकम ली गई, पैसे किस माध्यम से दिए गए, धमकियों के संबंध में कोई कॉल रिकॉर्डिंग या संदेश उपलब्ध हैं या नहीं और सरकारी विभागों में की गई शिकायतों का इस्तेमाल कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए किया गया था या नहीं।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि दूसरे शिकायतकर्ताओं के आरोपों में कोई समानता है या नहीं और क्या सभी मामलों में एक जैसी कार्यप्रणाली अपनाए जाने के संकेत मिलते हैं।
अन्य शिकायतकर्ताओं की भूमिका भी अहम
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अन्य संभावित पीड़ितों की शिकायतें हैं। यदि दूसरे व्यापारी या नागरिक भी इसी तरह की धमकियों और पैसों की मांग का सामना करने की बात सामने रखते हैं, तो पुलिस को घटनाओं की स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी।
ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं के बयान, आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड, फोन कॉल, संदेश और संबंधित सरकारी कार्यालयों में दर्ज शिकायतों की जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि अलग-अलग शिकायतों में एक जैसी कार्यप्रणाली सामने आती है, तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि, किसी कथित नेटवर्क या अन्य लोगों की संलिप्तता के बारे में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
प्रमोद परेश भागचंदानी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि शिकायतकर्ता के साथ कथित तौर पर क्या हुआ और शहर में उसके खिलाफ सामने आ रही अन्य शिकायतों की वास्तविक स्थिति क्या है।
चार दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के आरोपों, कथित लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर सकते हैं। साथ ही, अन्य मामलों से जुड़े तथ्यों का मिलान भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल, भागचंदानी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच जारी है। मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं, इस पर व्यापारियों और शहर के नागरिकों की नजरें टिकी हुई हैं।



