Published On : Fri, Mar 22nd, 2019

सुपारी के काले कारोबार में लिप्त हैं खाकी और खादी भी

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सम्बंधित विभाग की नज़रअंदाजगी से फलफूल रहा व्यवसाय नागपुर.

नागपुर: सड़ी सुपारी का सेवन सेहत के लिए काफी घातक है. इसके कई तथ्यपूर्ण उदहारण स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ दे सकते हैं. सुपारी का कारोबार करनेवाले कई ऐसे व्यापारी भी हैं जो रुपयों के लालच में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने से भी गुरेज नहीं करते. ऐसे ही सुपारी कारोबीरी सड़ी सुपारी में सुगंध मिलाकर उसे बेचते हैं.

ऐसी सुगंधित सुपारी की थोक खेप इंडोनेशिया के रास्ते नागपुर के साथ दूसरे राज्यों के शहरों में पहुंचते हैं. इस व्यवसाय में कई कारोबारी और ट्रांसपोर्टर आदि लिप्त हैं. देश में सादी सुपारी का आयत कई गुणा महंगा पड़ता हैं. इसलिए देश में इससे जुड़े व्यवसायी सार्क देशों के माध्यम से सुपारी देश में ला रहे हैं. जिससे उन्हें मात्र ९% ही कर अदा करना पड़ता है.

नागपुर में सुपारी की खपत आयात के मुकाबले कहीं ज्यादा है. यहां पान मसाला और खर्रे के लिए इसका उपयोग ज्यादा होता है. ऐसे में माल की उपलब्धता के मुकाबले उसकी मांग ज्यादा होने से इसमें खराब क्वालिटी का माल भी खपाया जाता है. खर्रा और पान मसालों के लिए इसी तरह की सड़ी गली सुपारियों का इस्तेमाल होता है. इस अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए ट्रांस्पोर्टर महती भूमिका अदा करते हैं. कई बार ये फर्जी कागजातों के आधार पर ट्रेनों से भी मंगाई जाती है. इस व्यवसाय का हिसाब-किताब भी हवाला के जरिये होने की खबर प्राप्त हुई है. इन सुपारियों को सुगंधित करने से सड़ी-गली सुपारी के इस्तेमाल का आभास भी नहीं होता है. इन सड़ी और घटिया सुपारी के सेवन से पेट से जुड़ी कई बीमारियां होती हैं. जिसका प्रमाण दिनों-दिन बढ़ते जा रहा है. सड़ी -गली सुपारियों का हब नागपुर के साथ इंदौर बनते जा रहा. इंदौर को हवाला का गढ़ भी कहा जाता है. नागपुर में लगभग एक दर्जन कंटेनर सुपारी उतरती थी,अब इसमें से आधी इंदौर में उतारी जा रही है.

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इस व्यवसाय में जैन, संजय, टिंकू, ट्रांसपोर्टर अरविंद व अनूप, मुंबई के ट्रांसपोर्टर धर्मेंद्र व जयंती आदि प्रमुख हैं. इसके साथ ही शहर व जिले के गोदाम वाले हैं. जिन्हें अन्य सामग्री से ज्यादा कीमतें सुपारी रखने से प्राप्त होती है. इनके धंदे में भी पुलिसवालों की नजरें लगी रहती हैं. इन गोदाम के मालिकों ने स्थानीय विधायक से समझौता कर गृह मंत्रालय से शहर पुलिस को कार्रवाई करने पर रोक लगा रखी है. नागपुर के इतवारी,गांधीबाग,मसकासाथ,जूनी कामठी व पारडी परिसर में सड़ी सुपारियों को भूनने की कई भट्टियां हैं.

इस कारोबार के अग्रणी जैन कई वर्षों से करोड़ों की आबकारी चोरी मामले में फरार बताए जा रहे हैं. डीआरआई से उनकी अच्छी खासी बनती है, इसलिए गिरफ्त से दूर हैं. नागपुर शहर सीमा के बहार इनके कई गोदाम हैं. इन गोदामों में अधिकांश सुपारियों का स्टॉक देखा जा सकता है. शहर में पुलिस,फ़ूड एंड ड्रग विभाग,डीआरआई विभाग को काफी जानकारियां होने के बाद भी इनकी चुप्पी से सड़ी-गली सुपारियों का कारोबारी राजू भाई गैस वाले जैसे काफी फलफूल रहे हैं. इस व्यवसाय में लिप्त महिला कारोबारी का खुलासा जनवरी २०१९ को जीएसटी के डीजी ने किया था. इससे ५० लाख रुपए का जीएसटी भी वसूल किया गया था. इस धंधे से होने वाली अच्छी-खासी कमाई से आकर्षित होकर शिवसेना के तथाकथित नेता ने भी सड़ी-गली सुपारियों को सुगन्धित व भूंजने के धंधे में साझेदारी की है.

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