Published On : Wed, Aug 2nd, 2017

अन्ना भाऊ साठे की जयंती पर नियमों को धता बताकर लगाए गए बैनर


नागपुर:
मोहल्ले-मोहल्ले में लोकप्रियता की चाहत रखने वाले शख्स मिल जायेगे। किसी भी उत्सव किसी भी त्यौहार के दौरान बधाई संदेश देते बैनर -पोस्टर शहर की किसी भी गली मोहल्ले में मिल जाएंगे। शहर की सुंदरता को दरकिनार कर किसी भी स्थान पर लोकप्रिय व्यक्तियों के पोस्टर अक्सर दिखाई देते है। लोकप्रियता को वजन दिलाने के लिए बैनर लगाने वाले किसी नेता की तस्वीर का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकते। क़ायदे से बिना इजाज़त बैनर पोस्टर लगाना भले ही जुर्म क्यूँ न हो पर इसका ज्यादा असर दिखाई नहीं देता। असर तो उच्च न्यायालय के आदेश का भी नहीं है। विदर्भ भूमि के प्रसिद्ध सपूत अन्ना भाऊ साठे की मंगलवार को जयंती थी।

अन्ना भाऊ का जीवन समाज को जागृत करने में बीता उनकी बातों में साहित्य में बेहतर समाज निर्माण के संदेश थे। पता नहीं कितने लोगो ने उनके साहित्य को पढ़ा होगा उसका अनुसरण निजी जीवन में करते होंगे। लेकिन मौका उनकी जयंती का था तो शहर भर में बधाई संदेश देते पोस्टर लगाए गए। नियम के अनुसार चौराहों पर पोस्टर लगाना कानूनन जुर्म है इस पोस्टरों को देख कर ऐसा भी नहीं लगता की इजाज़त लेकर इन्हे लगाया होगा।

दीक्षा भूमि चौक पर सड़क डिवाईडर पर एक पोस्टर में बाकायदा विधायक परिणय फुके की भी तस्वीर लगी है। लंबे वक्त तक विज्ञापन के क्षेत्र में जुड़े रहे फुके का पोस्टर भी नियम के विरुद्ध ही लगा दिखाई दिया। जनप्रतिनिधि के तस्वीर का इस्तेमाल उनकी इजाज़त से किया गया या उन्हें धोखे में रखकर यह तो पता नहीं लेकिन नियम के मुताबिक ऑउटडोर विज्ञापन के लिए शहर भर में जगहें सुनिश्चित है। विज्ञापन के माध्यम से ही मनपा को करोड़ो का राजस्व होता है और ग़ैरकानूनी रूप से लगे पोस्टर से नुकसान भी।