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    Published On : Mon, May 3rd, 2021

    आर्यिका माताजी समाज की, देश की गौरव हैं- आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव

    नागपुर : जैन समाज की सर्वोच्च गणिनी प्रमुख ज्ञानचंद्रिका आर्यिका ज्ञानमती माताजी, आर्यिकाश्री चंदनामती माताजी, आर्यिका आस्थाश्री माताजी जो ऐसी मॉ हैं, समाज की गौरव, देश की गौरव हैं यह उदबोधन वात्सल्य सिंधु दिगंबर जैनाचार्य गुप्तिनंदीजी गुरूदेव ने विश्व शांति अमृत ऋषभोत्सव के अंतर्गत श्री. धर्मराजश्री तपोभूमि दिगंबर जैन ट्रस्ट और धर्मतीर्थ विकास समिति द्वारा आयोजित ऑनलाइन धर्मसभा में दिया.

    गुरुदेव ने कहा गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी लक्ष्मी स्वरूपा तो हैं, सरस्वती स्वरूपा भी हैं. जिस काम को हाथ में लेती है चंद समय, चंद वर्ष में पूर्ण करती हैं. जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी हैं क्योंकि उनकी दीक्षा के 66 वर्ष पूर्ण हुए हैं. सभी साधु संतों में दीक्षा सबसे वरिष्ठ क्रम हैं, उनसे पहले दीक्षा लेनेवाले आज कोई नहीं हैं.

    संगठन में आज बहुत बड़ी शक्ति हैं- आर्यिका चंदनामती माताजी
    प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी ने धर्मसभा में कहा संगठन में आज बहुत बड़ी शक्ति हैं. संगठन, समाज से अलग हो जाते हैं तो उसकी किंमत कम हो जाती हैं, संगठित रहते हैं तो किंमत बहुत ज्यादा रहती हैं. जब तक हम संगठित रहेंगे तब तक एक रहेंगे हर संकट से दूर होने की क्षमता बढ़ेगी. हम विभक्त हो जायेंगे तो गिर जायेंगे, हमारे समाज, संगठन की शक्ति कम हो जायेंगी. भगवान के आत्म स्मरण से शांति मिलती हैं, परिवार में शांति होती हैं और हमारे भारत में शांति होगी. सरोवर की शोभा कमल से होती हैं, भोजन की शोभा नमक से होती हैं, नारी की शोभा शील से होती हैं, पक्षी शोभा पंख से होती हैं, प्रत्येक धर्म, समाज की शोभा अहिंसा परमो धर्म से हैं. अहिंसा परमो धर्म को छोड़कर हम शांति के मार्ग पर नहीं जा सकते. अहिंसा प्यार का सच्चा दर्शन हैं, जिसे अनेक वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया हैं. पक्षी को जीवन दान दिया जाता हैं तो वह उपकार करता हैं किसी ना किसी भव में. जीवंधर कुमार ने कुत्ते को णमोकार महामंत्र सुनाया अगले जन्म में देवता बनकर पग पग में उनकी सहायता की.

    दया, अहिंसा, मैत्री का भाव लेकर पशु पक्षियों ने अपनत्व भाव जागृत कर देता हैं. सारे विश्व में भारत में लोकतंत्र हैं, कई जाती, पंथ एक होकर एकता का संदेश देते हैं, एकता के सूत्र में बंधे हैं, पूरा भारत अहिंसा के बल पर आजाद हो चुका हैं. आजाद हिंद, आजाद देश के निवासी हैं. साधु साध्वी देश का गौरव सदा बढ़ाते हैं. माताजी ने एक गीत के माध्यम से भाव, मैत्री का संदेश दिया. आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव विश्व शांति के लिए महामृत्युंजय विधान कर रहे हैं. गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी बरसों से विश्व की शांति के लिए, जन-जन की शांति के लिए प्रतिदिन कुछ ना कुछ कार्यक्रम कराती हैं. पूज्यपाद स्वामी के शांति भक्ति पाठ करते हैं. आज का ऋषभदेव भगवान का संदेश चेतन तीर्थों से, साधु संतों, आर्यिकाओं से प्राप्त होगा. हमारे आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव, गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने शक्ति का परिचय दे रहे हैं.

    कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए धैर्य, क्षमता यह प्राप्त करने के लिए विश्व शांति के कार्यक्रम कर के एकता का परिचय देना हैं. विश्व शांति होना हैं तो हमें अहिंसा का सहारा लेना पडेगा. कोरोना काल में हमारे संतों द्वारा शांति के संदेश, शांति के सूत्र, मंत्र, विधान, पूजन यह कार्यक्रम हो रहे हैं, इससे हमारे परिवार सुरक्षित रहेंगे. देश की एकता ने देश को आजाद कराया. संतवाद, पंथवाद से दूर रहे. सभी दिगंबर संत एक हैं, उनकी चर्या एक जैसी हैं. धर्मसभा का संचालन स्वरकोकिला आस्थाश्री माताजी ने किया.


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