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    Published On : Wed, Sep 19th, 2018

    अरविंद इंडो स्कूल की अनियमिताओं को लेकर इसी महीने डाली जाएगी हाईकोर्ट में याचिका

    नागपुर: नागपुर जिले के पारशिवनी स्थित अरविन्द इंडो पब्लिक स्कूल की अनियमिताएं, नागरिक हक्क संरक्षण मंच व सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के पदाधिकारियों ने आरटीआई से जानकारी हासिल कर प्रशासन और विद्यार्थियों के अभिभावकों के सामने लायी है. जानकारी के अनुसार पारशिवनी स्थित अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल को सीबीएसई बोर्ड की मान्यता नहीं है केवल प्रशासन की एनओसी है. बावजूद इसके स्कूल अभिभावकों को गलत जानकारी देकर सीबीएसई स्कूल बताकर बच्चों के एडमिशन करा रही थी. यह मामला सामने आते ही कई अभिभावकों ने अपने बच्चों के एडमिशन स्कूल से निकाल लिए. इस स्कूल को केवल पहली से सातवीं तक की क्लासेज की ही अनुमति की जानकारी सामने आयी है.

    लेकिन पिछले 2 साल से स्कूल में गैरकानूनी और अवैध रूप से आठवीं क्लास शुरू थी. साथ ही इस साल नौवीं क्लास भी शुरू की गई थी. वास्तविक रूप से यह दोनों ही क्लास के विद्यार्थी संस्था के ही अरविन्द इंडो पब्लिक स्कुल सावनेर, हेटी सुरला इस सीबीएसई स्कूल के हैं. अतिरिक्त एडमिशन फ़ीस व ट्रांसपोर्ट चार्जेज के लालच में नियमों की अवेलहना कर विद्यार्थियों के भविष्य, सुरक्षा, शैक्षणिक सत्र, स्कुल व शिक्षा को खतरे में डालने का कार्य स्कूल प्रशासन ने किया है. स्कूल के 4 से 5 शिक्षक और शिक्षिका नियमानुसार बी.एड पदविधारक भी नहीं है. स्कूल की प्रिंसिपल यह शिक्षकों की नियमों के खिलाफ भर्ती करती है और विद्यार्थियों, अभिभावकों और शासन को गुमराह कर रही है.

    संस्था की स्कूल रानी लक्ष्मीबाई विद्यालय, अरविंद-इंडो किंडर गार्डन और अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल पारशिवनी के एक ही परिसर में स्थित है. स्कूल की मान्यता लेते समय तीनों स्कूल के प्रस्ताव और आवेदन के साथ छेड़छाड़ करने और एक जैसे ही कागजात देने की बात को भी नकारा नहीं जा सकता. तीनों स्कूलों के मैदान भी एक ही है. स्कूल की सही तरीके से जांच होने पर स्कूल के कई करतुते सामने आ सकती है. सूचना के अधिकारी में और एक जानकारी मिली है कि अरविंद-इंडो पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ने स्कूल में पदस्थ रहते हुए नागपुर यूनिवर्सिटी से रेगुलर एमए की डिग्री ली है. स्कूल की प्रिंसिपल राजेश्री देशमुख ने वर्ष 2015-2016 में समाजशास्त्र में एडमिशन लेने की बात भी सामने आयी है.

    स्काउट गाइड व शालेय क्रीड़ा स्पर्धा में नियम के विरुद्ध सहभाग
    स्कूल के नियम के विरूद्ध चलनेवाली आठवीं और नौवीं के विद्यार्थी पिछले वर्ष और अभी शुरू के शैक्षणिक सत्र में जिला क्रीड़ा अधिकारी कार्यालय और विभिन्न खेलों के संगठन द्वारा आयोजित स्पर्धा में पारशिवनी स्कूल के नाम से ही सहभागी हुए है साथ ही स्काउट गाइड व स्कूल की तरफ से आयोजित सभी स्पर्धा, कार्यक्रम व् परीक्षा में भी सहभाग लिया है. अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल सावनेर के एक ही वर्ग के आधे विद्यार्थी सीबीएसई बोर्ड क्रीड़ा स्पर्धा, आधे विद्यार्थी शालेय क्रीड़ा स्पर्धा डीएसओ और स्काउट गाइड के उपक्रम में सहभागी हुए थे. ऐसे तरीके से लिया गया सहभाग अवैध व् गैरकानूनी होकर इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर फौजदारी गुन्हा दाखिल करने की मांग भी आरटीआई कार्यकर्ता शेखर कोलते ने की है. इस संबंध में सभी विभागों को शिकायत करने की जानकारी भी महासंघ ने दी है.

    हाईकोर्ट में याचिका की जाएगी दाखिल
    स्कुल के इन सभी अनियमिताओ के लिए सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ की ओर से गट शिक्षणाधिकारी, प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षणाधिकारी, शिक्षण संचालक व उपसंचालक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नागपुर यूनिवर्सिटी के कुलगुरु और संचालक, सीबीएसई बोर्ड के संचालक व दक्ष्यता विभाग, जिल्हा क्रीड़ा अधिकारी, क्रीड़ा संचालक व उपसंचालक, स्कॉउट गाईड के अधिकारी, क्रीड़ा मंत्री, शिक्षण मंत्री ,पालकमंत्री को लिखित शिकायत की गई है.

    इस मामले में जल्द से जल्द जांच कर पारशिवनी व सावनेर की प्रिंसिपल, संस्थाचालक, संस्था के शिक्षणाधिकारी इन पर मामला दर्ज करे, पारशिवनी की प्रिंसिपल की एम.ए की डिग्री रद्द की जाए, सावनेर तहसील के अरविंद इंडो पब्लिक स्कुल , हेटी सुरला इस स्कुल की सीबीएसई बोर्ड की मान्यता व एफिलेशन रद्द कर स्कुल को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए, सीबीएसई बोर्ड के शालेय क्रीड़ा स्पर्धा में इस साल से सहभाग रद्द किया जाए. ऐसी मांग महासंघ द्वारा की गई है. अगले दस दिनों में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो सभी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियो को प्रतिवादी बनाकर हाईकोर्ट में याचिका डालने की तैयारी भी की जा चुकी है.

    आरटीआई कार्यकर्ता और महासंघ के पदाधिकारियो की जान को खतरा
    इस बारे में आरटीआई कार्यकर्ता शेखर कोलते ने जानकारी देते हुए बताया कि इन दोनों स्कूलों के बोगस मामले सामने आने के बाद हाईकोर्ट द्वारा कार्रवाई को नकारा नहीं जा सकता. पिछले साल से फोटो, वीडियो, समाचारपत्रों की कटिंग और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी सभी उनके पास मौजूद है. इन दोनों स्कूलों को स्थानिक राजकीय नेताओ का आश्रय होने की वजह से यह मामला पीछे लेने के लिए उनपर दबाव बनाया जा रहा है.

    कोलते ने बताया कि भविष्य में उनके और उनके परिजनों की जान को खतरा भी है. जिसके कारण स्थानिक पुलिस स्टेशन, पुलिस अधीक्षक व पुलिस आयुक्त के पास सुचना पत्र दाखिल करने की जानकारी भी कोलते ने दी है.

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