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    Published On : Mon, Aug 13th, 2018

    बंदूख छोड़ डॉन ने थामी कलम

    नागपुर – नागपुर सेंट्रल जेल में बंद अंडरवल्ड डॉन अरुण गवली ने क्या हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा की राह को अपना लिया है ? क्या डॉन अब शिक्षा के हथियार हो अपनाकर अपना जीवन सुधारना चाहता है ? जिस डॉन के हाँथ में कभी बंदूख होती थी अब उसके हाँथ में किताबें और पेन ने अपनी जगह बना ली है। ऐसा इसलिए कहाँ जा रहा है क्यूँकि डॉन को लेकर जो दिलचस्प जानकारियाँ सामने आ रही है उसके अनुसार उसने अब शिक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। 1 अक्टूबर को गाँधी विचार पर आधारित परीक्षा में 80 में से 74 नंबर लेकर टॉप करने वाला डॉन बीए कोर्स से समाजशास्त्र की पढाई कर रहा है। जिसकी एग्ज़ाम वो दिसंबर में देने वाला है।

    इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय जेल में बंद कैदियों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास बीते लंबे वक्त से कर रहा है। जेल में बंद हजारों कैदी अब तक इग्नु से विभिन्न विषयों में डिग्री ले चुके है। गौरतलब हो की डॉन गवली 12 वी पास नहीं है, और किसी भी ग्रेजुएशन कोर्स के बारहवीं या उसके समकक्ष के पाठ्यक्रम में पास होना जरुरी है। लेकिन इग्नु में विशेष प्रावधान के तहत ग्रेजुएशन कोर्स के लिए एंट्रेन्स एग्जाम पास करने की व्यवस्था की है। इसी व्यवस्था के तहत जेल में बंद गवली ने जुलाई 2017 में एंट्रेन्स एग्जाम दी। जिसमे वो पास हुआ और उसके बाद वो समाजशास्त्र की पढाई कर रहा है। जिसकी प्रथम वर्ष की परीक्षा वो दिसंबर 2018 में देने वाला है।

    इग्नु नागपुर के क्षेत्रीय निदेशक पी शिवस्वरूप ने नागपुर टुडे को बताया की डॉन अरुण गवली उनके विश्वविद्यालय का छात्र है। उसने उन सभी शर्तो को पूरा किया जिसकी आवश्यकता है। सिर्फ गवली ही नहीं जेल में बंद कई कुख्यात अपराधी और संगीन अपराध को अंजाम देने वाले आरोपी जेल में रहकर पढ़ रहे है या पढ़ चुके है। शिक्षा ऐसा हथियार है जिसके माध्यम से हिंसक से हिंसक प्रवृति के आदमी में बदलाव किया जा सकता है। शिक्षा के कारण ऐसा ही बदलाव गवली के जीवन में भी हो रहा है।


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