Published On : Mon, Dec 9th, 2019

कस्तूरचंद पार्क को कब्जें में ले पुरातत्व विभाग,जनता की मांग

नागपुर: कस्तूरचंद पार्क मैदान में तोपों का जखीरा निकलने के बाद आरेंज सिटी का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है. 17 अक्टूबर को 4 और 28 नवंबर को 2 तोपें निकाली गई हैं. इन तोपों का इतिहास 200 वर्ष पुराना है. मैदान से भारी तादाद में तोपें मिलने के बाद भी विभाग खुदाई कर अन्य सामग्री को बाहर निकालने में कोई गंभीर कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है. जनता की मांग है कि पुरातत्व विभाग पार्क को अपने कब्जे में लेकर और भी युद्ध सामग्री निकलने तक खुदाई करते रहे. तब तक पार्क के सौंदर्यीकरण के कार्य को रोक दिया जाए.

परिसर में और भी युद्ध सामग्री बरामद होने की संभावना जताई जा रही है. खुदाई में और भी सामग्री मिलने से युद्ध को लेकर कई ऐतिहासिक राज सामने आने की संभावना है. केपी से वर्तमान में जो तोपें रखी हुई हैं वह भी उसी जमीन से निकली हुई हैं. सभाओं के लिए जाने जाना वाला कस्तूरचंद पार्क अब ऐतिहासिक युद्धभूमि के नाम से पहचाना जा सकता है. विविध संगठनों के पदाधिकारी भी मैदान के गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने रखने की मांग करने लगे हैं, लेकिन इतने दिनों बाद भी प्रशासन की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है. जिला प्रशासन द्वारा मामले पर ध्यान देने की जरूरत है.

मजबूत कटघरे से करें सुरक्षा
विश्वोदय बहुउद्देशीय संस्था के अध्यक्ष देवानंद चौरीवार ने बताया कि कस्तूरचंद पार्क में सौंदर्यीकरण के दौरान की गई खुदाई में पुरातन समय की युद्ध सामग्री और तोप मिली है. यदि खुदाई की गई तो और भी युद्ध सामग्री मिल सकती है. मिली हुई तोपों को मैदान के मध्य स्थान में बनी बारादरी के आसपास स्थापित किया जाए और उसे मजबूत कटघरे से सुरक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि वर्तमान में बारादारी में असामाजिक तत्वों का डेरा लगा है. इस पूरे हिस्से को कवर करने से कोई भी अंदर कब्जा नहीं कर पाएगा. साथ ही ऐतिहासिक वस्तु की सुंदरता भी बनी रहेगी. मैदान पर जो सौंदर्यीकरण का निर्माण कार्य चल रहा है, उसे तुरंत बंद करना चाहिए.


मैदान में ही रखें सभी तोप
डा. दीपक डोंगरे ने बताया कि खुदाई काम पूरा होने के बाद इस दौरान मिलने वाली युद्ध सामग्री को मैदान के एक हिस्से में ही म्यूजियम बनाकर रखा जाना चाहिए. कस्तूरचंद पार्क आरेंज सिटी की पहचान है और उसकी गरिमा को बरकरार रखना आवश्यक है. सिटी के मध्य स्थान में यह पार्क है. लोगों की भावना पर हेरिटेज कमेटी ने दखल लेना चाहिए. जिस तरह मुंबई में शिवाजी पार्क का ऐतिहासिक महत्व है, उसी तरह कस्तूरचंद पार्क का भी महत्व बना रहे. हेरिटेज कमेटी को मैदान के अन्य हिस्सों की खुदाई के लिए मंजूरी देनी चाहिए. खुदाई में निकलीं तोपों को मैदान में ही रखा जाना चाहिए.

एक्सपर्ट से कराए जांच
श्रीसंत गजानन महाराज मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश भोस्कर ने बताया कि वर्तमान में किए जा रहे सौंदर्यीकरण के काम को बंद करना चाहिए. एक्सपर्ट की नियुक्ति कर पूरे पार्क का निरीक्षण किया जाना चाहिए. उसी के आधार पर खुदाई का काम आगे बढ़ाना चाहिए. अभी जो खुदाई हो रही है, उसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं. इस हालत में जिसके हाथ जो लगा, वह कबाड़ में बेच रहा है. तोप भारी होने की वजह से कोई उठा नहीं पाता, वरना तोपों को भी बेच दिया गया होता. जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए.