Published On : Thu, Feb 20th, 2020

एंजियोग्राफी पद्धति द्वारा माइट्रल (Mitral valve ) का सफलतापूर्वक किया ट्रांसप्लांट

मध्य भारत में पहली बार न्यू ईरा हॉस्पिटल ने किया यह काम

नागपुर: न्यू ईरा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा किसी भी प्रकार से शरीर की चीरफाड़ न करते हुए केवल जांघ की नसों के माध्यम से (एंजियोग्राफी पद्धति द्वारा )माइट्रल (Mitral Valve) का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया. 70 वर्षीय मोरेश्वर भावे का 8 वर्ष पहले ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा दिल का नसैर्गिक माइट्रल वॉल्व (Mitral valve) बदल दिया गया था. लेकिन पिछले कुछ महीनो से भावे को फिर से दिल की तकलीफ शुरू होने से उन्होंने न्यू ईरा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रसिद्द कार्डिओलॉजिस्ट डॉ.निधीश मिश्रा से संपर्क किया. भावे की ईको-कार्डिओग्राफी द्वारा जांच की गई तो पता चला की उनके दिल में 5 साल पहले प्रत्यारोपित किया गया माइट्रल वॉल्व (Mitral valve) खराब हो चूका है. इसे बदलने के लिए भावे की उम्र को देखते हुए दूसरी ओपन हार्ट सर्जरी करना काफी जोखिम भरा हो सकता है. जिसके बाद डॉ.निधीश मिश्रा ने निर्णय लिया की भावे के शरीर की किसी भी प्रकार की चीरफाड़ न करते हुए जांघो की नसों के माध्यम से (एंजियोग्राफी पद्धति द्वारा ) उनके दिल का खराब हुआ माइट्रल वॉल्व (Mitral valve) बदल दिया जाए. भावे की सहमति मिलते के बाद न्यू ईरा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ही वॉल्व बदलने की शुरुवात कर दी. ‘ मेक इन इंडिया ‘ अभियान के अंतर्गत भारत में ही निर्माण किया गया मेरिल कंपनी का माइट्रल वॉल्व (Mitral valve) भावे के दिल में प्रत्यारोपित (Transplant ) किया गया. वॉल्व प्रत्यारोपित (Transplant ) होते ही भावे के शरीर का रक्तप्रवाह (Blood-circulation) सामान्य होने लगा.

इस ऑपरेशन को सफल बनाने में न्यू ईरा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट संचालक ( director ) तथा वरिष्ठ कार्डिओलॉजिस्ट (cardiologist ) डॉ.निधीश मिश्रा ( Dr. Nidhish Mishra), हॉस्पिटल के संचालक (Director ) और वरिष्ठ हृदयरोग सर्जन ( Heart surgeon ) डॉ.आनंद संचेती (Dr. Anand sancheti ), संचालक (Director ) एवं वरिष्ठ न्यूरोलॉजिकल (Neurological ) तथा स्पाइनल (Spinal surgeon ) डॉ.नीलेश अग्रवाल (Dr.Nilesh agrawal ) तथा कार्डिओलॉजिस्ट (Cardiologist ) डॉ.महेंद्र मस्के (Dr.Mahendra maske ), हृदयरोग सर्जन (Heart surgeon ) डॉ.सुबुल सिद्दीकी ( Dr.subul siddhiqi ), और डॉ.साहिल बंसल ( Dr.Sahil bansal ) भी इस ऑपरेशन की टीम का हिस्सा थे.