Published On : Wed, Nov 14th, 2018

कार्यादेश देने में मनपा प्रशासन कर रही आनाकानी

बजट के प्रावधान अनुसार निधि समाप्त,टेंडर हो रहे ‘रिकॉल’

नागपुर: नागपुर मनपा की आर्थिक जर्जर स्थिति के कारण इस आर्थिक में जारी हुई अमूमन निविदा प्रक्रियाओं में ठेकेदार वर्ग भाग नहीं लेने के कारण निविदाएं ‘रिकॉल’ हो रही.तो दूसरी ओर निविदा सह कोटेशन प्रक्रिया जिनकी पूर्ण हो गई,उसके कार्यादेश जारी करने में मनपा प्रशासन आनाकानी कर रही हैं.इससे मनपा द्वारा किये जाने वाला विकास कार्य ठप्प सा पड़ गया हैं.उक्त समस्या नए आयुक्त अभिजीत बांगर के लिए बड़ी चुनौती साबित होंगी।

मनपा स्थाई समिति सभापति विक्की कुकरेजा ने २९०० करोड़ का महत्वाकांक्षी बजट पेश किया। क्यूंकि मनपा की आर्थिक स्थिति नाजुक थी इसलिए बजट को प्रशासकीय मंजूरी मिलने के सत्तापक्ष को काफी पापड़ बेलने पड़े.प्रशासन ने भी आर्थिक स्थिति को देखते हुए धीरे-धीरे मदो के तहत प्रस्ताव आमंत्रित करना शुरू किये।

इस दौरान स्थाई समिति सभापति कुकरेजा ने बिना पक्षपात किये नगरसेवकों के मांग अनुसार निधि के सिफारिश पत्र देते रहे,इन्होंने सभापति पद के कोटे की शत-प्रतिशत निधि वितरित कर दिए.महापौर ने अपने कोटे की ५ करोड़ में से साढ़े ४ करोड़ की निधि अपने सलाहकार के निर्देश पर फूंक-फूंक कर वितरित की.इसका बड़ा हिस्सा अपने प्रभाग के विकास कार्यों के लिए दे दिया। सबसे आखिर में उपमहापौर में निधि वितरण शुरू किया और वरिष्ठों के निर्देशानुसार सम्पूर्ण निधि वितरित कर दी.

इस आर्थिक वर्ष में प्रशासन पर कर्ज का बोझ सैकड़ों करोड़ से बढ़कर हजारों करोड़ न हो जाये इसलिए नियमों में बड़ा बदलाव किया गया.अर्थात एक प्रस्ताव लगभग ३ बार सभी ‘टेबल’ से गुजरने के बाद आयुक्त स्तर पर अटकाई जा रही हैं.इसके साथ ही प्रशासन ने सभी जिम्मेदार दिग्गज अधिकारियों को मासिक खर्च की सिमा तय करने से और अड़चनें बढ़ गई.

सवाल यह हैं कि उक्त हजारों करोड़ की निधि वितरित होने के बाद मनपा प्रशासन के सम्बंधित अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार करने और उन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में रोड़ा अटकना शुरू किया,जिसका आज भी सिलसिला जारी हैं.विभाग कोई भी हो एक भी प्रस्ताव की फाइल अधिकारी-कर्मी तेजी से नहीं बढ़ा रहे.इन प्रस्तावों को टेंडर,कोटेशन और कार्यादेश की स्थिति तक लाने के लिए मनपा के ज़ोन से लेकर मुख्यालय के सभी विभागों में नगरसेवकों,पदाधिकारियों और दिग्गज पदाधिकारी या दिग्गज नगरसेवकों के कर्मियों को फाइल लेकर या फाइल के पीछे रेंगते नज़र आ जायेंगे।
सभी सम्बंधित प्रस्ताव सम्बंधित कार्यकारी अभियंता तक पूर्ण होने के बाद टेंडर कमिटी अर्थात मनपा आयुक्त की मंजूरी के लिए महीनों लटक रही.इनकी मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया के लिए भेजी जा रही.

विडम्बना यह हैं कि मनपा प्रशासन ने ठेकेदारों को बकाया देने हेतु इतना तड़पाया कि आज वे टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे,कुछ चुनिंदा टेंडर को छोड़ दिए जाये तो.नतीजा टेंडर ‘रिकॉल’ हो रहे.तो दूसरी ओर कोटेशन स्तर की प्रस्तावों को कार्यादेश देने में प्रशासन काफी आनाकानी कर रहा.जिससे नगरसेवक वर्ग हतप्रभ हैं,कहते फिर रहे इस दफा चुन कर आना काफी महंगा पड़ रहा.

घोषणा के अनुरूप नहीं वितरित की गई निधि
सत्तापक्ष द्वारा खंब ठोक कर वादा कर खुद की पीठ थपथपाई गई थी कि १५० करोड़ के विशेष अनुदान में से लगभग ११५ करोड़ सभी बकायेदारों में वितरित किये जायेंगे,किसी की दीपावली काली नहीं होने देंगे।पदाधिकारियों के घोषणा पर प्रशासन ने पानी फेरते हुए ढाई लाख से ऊपर के बकायेदारों को ४०% बकाया राशि देने का वादा किया था लेकिन दीपावली तक उन्हें मात्र ४-५ लाख देकर अपना पल्ला झाड़ दिए.आखिर कहाँ खर्च कर दी गई विशेष अनुदान की पहली किश्त,आज भी वित्त विभाग में कई फेरे लगाते ठेकेदार वर्ग दिख जायेंगे। क्या सत्तापक्ष इस मामले में निष्क्रिय हैं,या फिर लगातार सत्ता में रहते प्रशासन पर पकड़ ढीली पड़ गई ?

कब आएंगे शेष विशेष अनुदान और बढेंगा जीएसटी !
स्थाई समिति सभापति ने सरकार पर विश्वास जताया था कि नवंबर माह में शेष १७५ करोड़ की बकाया विशेष निधि प्राप्त हो जाएंगी।इसके अलावा जल्द ही नागपुर मनपा का जीएसटी अनुदान ५२ करोड़ से ९० करोड़ मासिक किये जाने की जानकारी दी गई थी.
उक्त ज्वलंत आर्थिक समस्याओं से नए आयुक्त अभिजीत बांगर को निपटना मुश्किल तो नहीं लेकिन इतना आसान भी नहीं दिख रहा.