Published On : Tue, Apr 14th, 2015

अमरावती : एएमसी की होगी सर्जरी स्किल


नये निगमायुक्त ने कहा

14 Chadrakant Gudevar
अमरावती। नये निगमायुक्त चंद्रकांत गुडेवार ने कहा कि अमरावती महानगरपालिका में जिस तरह से काम चल रहा है, उसे देेखते हुये पूरे एएमसी प्रशासन की सर्जरी स्कील करनी होगी. आयुक्त का काम केवल फाइलों पर हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है. बल्कि योज्य अधिकारी से योज्य काम करवा लेना ही आयुक्त का निर्वहन है. 20 वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दी है. शहर में काम करने का समय भले ही कम मिल है, लेकिन शहरी सेवाओं और आवश्यकताओं से भलिभांति परिचित हूं.

समस्या एक जैसी
गुडेवार ने नवभारत से कहा कि राज्य मेें सभी महानगरपालिकाओं की समस्याएं एक जैसी है, लेकिन काम करने की पध्दति से उन समस्याओं को हल किया जा सकता है. जिसमें साफ-सफाई, एलबीटी, कर्मियों का वेतन, ठेकेदारों के बिल और मनपा की सभी जिम्मेदारियां का समावेश है. पदाधिकारियों व सदस्यों को साथ में लेकर ही काम करना मेरा स्वभाव है. छोटे कर्मियों की समस्याओं और उसकी कार्यशैली व क्षमता को परखकर प्रमोट करने का प्रयास भी लगातार करुंगा. ट्रेन से आते समय अमरावती महानगरपालिका के बारे में केवल बुराईयां ही सुनने मिली, लेकिन कम से कम जिस दिन मैं लौटूंगा, उस दिन कुछेक तो महानगरपालिका के बारे में अच्छा बोलेंगे. इसका पूरा ध्यान रखकर ही काम करुंगा.

आयुक्त को 22 अधिकार

  • मिल्ट्री शासन के हिमायती नये निगमायुक्त ने कहा कि आयुक्त को राज्य के मुख्य सचिव की तरह अधिकार प्राप्त है, लेकिन अधिकारों का उपयोग नहीं किये जाने के कारण ही महानगरपालिका की स्थिति खराब होती है. आयुक्त एसी जैसे अधिकारी को सस्पेंड कर सकता है. आयुक्त के कुल 22 अधिकार है. जिसका प्रयोग मैं समय-समय पर करता रहुंगा. अमरावती शहर मेरे लिये नया नहीं है. 2 जून 2006 से 14 अगस्त 2008 तक जिला नियोजन विभाग में काम किया है.
  • चंद्रकांत गुडेवार ने मंगलवार को अवकाश के दिन सुबह 8.30 बजे महानगरपालिका में आयुक्त का पदभार संभाला. इस समय मनपा के सभी विभागों के अधिकारी और प्रमुख कर्मचारी उपस्थित थे. उसके तुरंत बाद गुडेवार आंबेडकर जयंति पर इर्विन चौक में आयोजित समारोह में सहभागी हुये.

भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं
निगमायुक्त ने मनपा प्रशासन के साथ बैठक में साफ कह दिया कि उन्हें पारदर्शी कार्यप्रणाली पसंद है. मैं उसमें का नहीं. जो भ्रष्टाचार करेगा. उसकी शिकायत मैं खुद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से करुंगा. जनता के काम नियोजित समय करना ही अधिकारियों की जिम्मेदारी है. काम करने वालों को प्रमोशन दूंगा. कामचोर अधिकारियों-कर्मियों को किसी भी हाल में नहीं बखशूंगा.