Published On : Wed, Jun 19th, 2019

अंबाझरी जंगल में लगी आग पर हाईकोर्ट का स्वयं संज्ञान

नागपुर: अंबाझरी के संरक्षित वन क्षेत्र में 26 मई की आधी रात लगी आग को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबरों के आधार पर इसे जनहित के रूप में स्वीकार करते हुए मंगलवार को न्यायाधीश रवि देशपांडे और न्यायाधीश विनय जोशी ने इस तरह से शहरों के आसपास स्थित संरक्षित वन क्षेत्र में आग न लगे, इस संदर्भ में क्या उपाय किए जा सकते हैं. इसे लेकर 2 सप्ताह में रिपोर्ट देने के आदेश वन विभाग को दिए. समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार संरक्षित क्षेत्र में लगी आग के कारण लगभग 125 हेक्टेयर पर स्थित वन सम्पत्ति का भारी नुकसान हुआ है. यहां तक कि वन्यजीवों को भी भारी नुकसान पहुंचने की संभावना जताई गई है.

750 हेक्टेयर में है परिसर
प्रादेशिक वन विभाग के अंतर्गत 750 हेक्टेयर का अंबाझरी संरक्षित वन क्षेत्र के एक हिस्से में आग लगी थी. वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार अंबाझरी परिसर में पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां, हिरण, जंगली सुअर जैसे वन्यजीवों का अधिकांश वास है. 26 मई की रात 1 बजे के करीब परिसर आग की लपटों से घिरा हुआ था. परिसर में स्थित एक इमारत की छठवीं मंजिल पर रहनेवाले किरण पाटिल नामक व्यक्ति द्वारा आग दिखाई देते ही घटनास्थल पर पहुंचे थे. इसी दौरान अग्निशमन विभाग के 2 फायर टेंडर भी आग बुझाने पहुंच तो गए, लेकिन संरक्षित क्षेत्र होने से चारों ओर से परिसर बंद होने के कारण और परिसर में प्रवेश के कुछ ही मार्ग होने से वाहन भीतर नहीं जा पा रहे थे.

50 करोड़ का वृक्षारोपण पर खर्च
उल्लेखनीय है कि एक ओर अग्निशमन के वाहन पहुंचने के बावजूद भीतर जाने में हो रही कठिनाई के चलते आग फैलते जा रही थी, वहीं सूचना मिलते ही लगातार अग्निशमन के वाहनों की संख्या भी बढ़ते जा रही थी. इसी बीच किसी तरह वाहनों के प्रवेश को सुनिश्चित किया गया. बताया जाता है कि इसी परिसर में राज्य सरकार की ओर से वृक्षारोपण पर 50 करोड़ रु. खर्च किए थे. पौधों को बड़ा करने के लिए किए गए उपायों के बाद किसी तरह पौधे बड़े तो हो रहे थे, लेकिन अचानक ही आग के हवाले हो गए. जिससे संरक्षित वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा. इस संदर्भ में छपी खबरों को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया.