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    Published On : Fri, May 26th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    भारतीय खान ब्यूधरो, नागपुर में अखिल भारतीय राजभाषा तकनीकी सेमिनार


    नागपुर: भारतीय खान ब्यूधरो, (मुख्या लय) नागपुर में दिनांक 25 मई, 2017 को रंजन सहाय, महानियंत्रक, भारतीय खान ब्यूपरो की अध्यीक्षता में ‘नए परिदृश्य में खनिज संरक्षण, विकास एवं पर्यावरण की चुनौतियां’ विषय पर अखिल भारतीय राजभाषा तकनीकी सेमिनार का आयोजन किया गया । इस अवसर पर सी.एस. गुंडेवार, भूतपूर्व महानियंत्रक, भारतीय खान बयूरो को मुख्यय अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया तथा दीप प्रज्ज्वषलन के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ । सी.एस. गुंडेवार, ने अपने संबोधन में हिंदी में किए जा रहे तकनीकी सेमिनार की भूरि-भूरि प्रशंसा की साथ ही इस प्रकार के तकनीकी सेमिनार को राष्ट्री्य स्तधर पर भी किए जाने हेतु प्रेरित किया । डॉ.पी.के. जैन, मुख्य खनिज अर्थशास्त्रीन एवं राजभाषा अधिकारी द्वारा कार्यक्रम की संक्षिप्ति रूपरेखा रखी गई । इस कार्यक्रम में तकनीकी विषयों पर एक स्माथरिका तथा भारतीय खान ब्यूषरो की गृह पत्रिका, खान भारती का विमोचन किया गया ।

    अपने अध्यिक्षीय भाषण में रंजन सहाय, महानियंत्रक, भारतीय खान बयूरो ने हिंदी से जुड़े समस्तअ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके द्वारा किए जा रहे सराहनीय कार्यों के प्रति बधाई दी तथा एक साथ दो-दो पत्रिकाओं के विमोचन हेतु भारतीय खान ब्यूजरो, प्रकाशन विभाग को भी धन्यएवाद दिया ।

    राजभाषा तकनीकी सेमिनार का कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया जिसमें पूर्वाह्न में कुल 5 आलेख तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन द्वारा प्रस्तुेत किए गए तथा अपराह्न में कुल 6 आलेख शेष तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुपत किए गए । अध्युक्ष के रूप में एस. तियू, खान नियंत्रक (मध्य ) एवं रिपोर्टियर मती वर्षा घरोटे ने प्रथम सत्र में भूमिका निभाई तथा दूसरे सत्र की अध्यसक्षता एस.के. अधिकारी, तथा रिपोर्टियर जे.पी. मिश्रा ने अपनी भूमिका निभाई ।

    कार्यक्रम में मंच संचालन का कार्य प्रमोद एस. सांगोले, उप-निदेशक (राजभाषा) ने किया तथा आभार प्रदर्शन जगदीश अहरवार, हिंदी आशुलिपिक द्वारा किया गया । कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी अनुभाग के सर्व राजीव कुलश्रेष्ठद, वरिष्ठ अनुवादक, असीम कुमार, अनुवादक, किशोर पारधी, अनुवादक, मती मिताली चटर्जी, अनुवादक, प्रदीप कुमार सिन्हाू, हिंदी टंकक एवं ए.के. नाल्हेक का विशेष योगदान रहा ।

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