Published On : Thu, Oct 20th, 2016

अजित जोगी ने विदर्भ राज्य की माँग का किया समर्थन, राज्य में सत्ता परिवर्तन का जताया अंदेशा

ajit jogi

नागपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस से अलग होकर खुद की पार्टी बनाने वाले अजित जोगी ने विदर्भ राज्य को अपना समर्थन दिया है। जोगी बुधवार को नागपुर में थे इस दौरान उन्होंने छोटे राज्यो के विकास और संभावनाओ पर एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार भी रखे। जोगी के मुताबिक वो अपने राजनितिक जीवन के शुरुवात से ही छोटे राज्यो के समर्थक रहे है। कांग्रेस में रहने के दौरान भी वो इस माँग को उठाते रहे थे। जोगी ने कहाँ कि वह सिर्फ विदर्भ के आंदोलन से ही नहीं जुड़े है बल्कि 8 अन्य राज्यो की माँग को लेकर आंदोलन में शामिल है। आज उन्होंने विदर्भ को अपना वैचारिक समर्थन दिया है पर 2018 में छत्तीसगढ़ के चुनाव होने के बाद वो विदर्भ के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस में रहने के दौरान उन्होंने भले ही छोटे राज्यो की माँग लगातार उठाई हो पर कांग्रेस मुख्य तौर पर देश की आजादी के बाद भाषाई आधार पर उसी दौर में हो चुके राज्यो के विभाजन की नीति पर ही चलती रही है।

जोगी ने कहाँ विदर्भ की माँग अन्य राज्यो की माँग से काफी पुरानी है बीजेपी ने सत्ता हासिल करने के बाद विदर्भ देने का वादा किया था जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। वर्तमान राजनितिक स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता नहीं की विदर्भ राज्य का गठन सरकार करेगी। जोगी ने विदर्भ के मुख्यमंत्री होने की वजह से इस क्षेत्र का के विकास की प्रबल संभावना से भी इनकार किया है। उन्होंने कहाँ की मुख्यमंत्री राज्य का होता है उसे सारे राज्य का विचार कर साशन चलाना पड़ता है। विदर्भ के संबंध में नागपुर से होने वाले फैसले ज्यादा प्रभावशाली होंगे नाकि मुंबई और दिल्ली में लिए गए फैसले। महाराष्ट्र में मुंबई और अन्य विकसित इलाको का ज्यादा जोर साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। राष्ट्र के प्रधान के बाद महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है आज से पहले जो भी मुख्यमंत्री बना है वह प्रधानमंत्री के समकक्ष रहा है। आज ऐसी स्थिति नहीं दिखाई देती। जोगी ने कहाँ कि उनका अनुभव कहता है की वर्तमान दौर में जिस तरह बीजेपी का शाषन चल रहा है उनका अनुभव कहता है कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो महाराष्ट्र और हरियाणा में सत्ता परिवर्तन जरूर होगा। केंद्र के कामकाज पर अपनी राय व्यक्त करते हुए जोगी ने कहाँ अगर इसी तरह शाषण चलता रहा तो यह तय है कि 2019 में केंद्र में एक दल की सत्ता नहीं आने वाली।

प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरुरत नहीं कांग्रेस में जो चल रहा है सबको दिख रहा है

अजित जोगी ने पार्टी छोड़ते समय कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी को वादाखिलाफी न करने के वचन से खुद को बंधा बताते हुए सीधे तो कुछ नहीं कहाँ पर व्यंगात्मक लहजे में कहाँ की प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरुरत नहीं होती। उनका इशारा आज ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी के संदर्भ में था। इशारो में जोगी ने भी पार्टी छोड़ने के प्रश्न पर वही बाते कही जो रीता बहुगुणा ने आज कही। उन्होंने छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी प्रतिद्वंदी मानाने से इनकार करते हुए मुख्य मुकाबला बीजेपी और उनकी पार्टी के बीच होने की संभावना जताई। जोगी ने कहाँ जब वो कांग्रेस में शामिल हुए थे तब पार्टी के 411सांसद थे अब 44 बचे है। मन में कटुता भाव से कुछ नहीं कहूँगा पर ऐसी स्थिति में भी पार्टी में कुछ बदलाव नहीं हो रहे तो ऐसा जरूर लगता है की कुछ तो गड़बड़ जरूर है।