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    Published On : Sat, Oct 13th, 2018

    कृषि महाविद्यालय की जमीन बचाने के लिए विद्यार्थी-संगठन सड़क पर

    नागपुर: शहर के बीचोबीच कृषि विश्वविद्यालय की जगह पर सत्ताधारी पक्ष की वक्र दृष्टि है, जिसे हथिया कर विभिन्न उपक्रमों के लिए उपयोग किया जा रहा है. इस चक्कर में विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक जगह कम पड़ते जा रही है. इससे महाविद्यालय की मान्यता खतरे में पड़ती नजर आ रही है. उक्त आरोप अग्रोवेट – अग्रो इंजिनियर मित्र परिवार ने लगाया है.

    उक्त संगठन ने कृषि विश्वविद्यालय की खुली जगह बचाने के लिए मुहिम शुरू की. इस क्रम में कल संगठन की ओर से महराजबाग चौक पर प्रदर्शन किया गया. इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया. आंदोलनकारियों ने कुछ देर तक चक्का जाम भी किया, कुछ समय तक आवाजाही थम सी गई थी. आंदोलनकारियों का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष दिलीप मोहितकर, सचिव प्रणय पराते और कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक किशोर जिचकर ने किया. आंदोलनकारियों ने सर्वप्रथम महाराजबाग चौक स्थित पंजाब राव देशमुख के पुतले के समक्ष एकत्र होकर विश्वविद्यायल की जमीन हड़पने वाले सत्ताधारियो का निषेध किया. इसके बाद रामदास पेठ स्थित वीआईपी रोड के पास ( वनामती के करीब ) कृषि विश्वविद्यालय की खुली जमीन पर वॉकिंग ट्रैक और साइकिलिंग ट्रैक के प्रस्ताव का भी विरोध किया. इस उपक्रम में मनपा और कृषि विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से प्रयासरत है. आंदोलनकारियों की मांग है कि काछिपुरा स्थित विश्वविद्यालय की जमीन से अतिक्रमण हटाकर उक्त उपक्रम शुरू किया जाए.

    उल्लेखनीय यह है कि डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला के अधीनस्त नागपुर में कृषि महाविद्यालय की इकाई है. इस महाविद्यालय के पास ४४६.२१ हेक्टर जमीन है, जिसमें महाराजबाग का भी समावेश है. ब्रिटिशकालीन इस महाविद्यालय में उच्च शिक्षा,संशोधन आदि होता है. महाविद्यालय की कुल ४४६.२१ हेक्टर जमीन में से ५९.३९ हेक्टर जमीन इसके पूर्व शासकीय, अर्धशासकीय संस्था को दिया जा चुका है.

    इसके साथ ही मोरभवन,मोर भवन से लगकर निर्मित हो रही सड़क के लिए कुछ जगह मनपा प्रशासन को हस्तांतरित किया गया. इसके अलावा २६.६९ हेक्टर जमीन जो बजाज नगर,शंकर नगर,रामदासपेठ में स्थित है, जिन पर आज भी अतिक्रमण है, अर्थात कृषि महाविद्यालय अब तक ८६ हेक्टर जमीन गवा चुका है. महाविद्यालय के पास वर्तमान में ३६०.१३ हेक्टर जमीन शेष है. वर्तमान में कृषि विभाग की जमीन पर मेट्रो कार्यालय और महावितरण कार्यालय भी है. इस तरह दिनोदिन कम होती जा रही कृषि महाविद्यालय की जमीन के बचाव में कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थी एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं.

    इस आंदोलन में डॉ. अजय तायवाड़े,डॉ. सुनील सहातपुरे,अरविन्द पाटिल,दिनकर जीवतोडे,लक्ष्मीकांत पडोले, डॉ. अजय गावंडे,डॉ. माधुरी केवाटे,मनोज गोलावार,विजय बाहेकर,रवि शेंडे,डॉ. संजय धोटे,डॉ. मोहन तोटावार,संजय गावंडे,संजय जयवार, भाई देशमुख,डॉ. दिलीप देशमुख,सतीश शीरुलकर,गोविंदराव वाइरले,दीपक झोटिंग,जयंत खलतकर,श्रीकांत पाठक,सुधीर चेके,अजय गुलहाने,डॉ. भाल,डॉ. लक्ष्मीकांत कलंत्री,डॉ. शरद निम्बालकर,प्राची श्रीखंडे,डॉक्टर वैशाली बंथिया,रविंद्र ढोके,पंकज सलोडकर,दीपक चौधरी,राष्ट्रपाल पाटिल,संजीव देशमुख,सुशिल खड़से,डॉ. पंकज कडु,डॉ. विनीता गोटमारे,डॉ. दीपक कडु देवेंद्र मट्ठे,प्रमोद वरंभे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.

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