Published On : Fri, Jul 10th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

२ अगस्त को अग्रकुलमाता माधवी जन्मोत्सव एवं अग्र मेधा सम्मान समारोह

महाराष्ट्र राज्य अग्रवाल सम्मेलन, नागपुर ईकाई द्वारा तैयारियां प्रारंभ
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नागपुर. महाराष्ट्र राज्य अग्रवाल सम्मेलन, नागपुर जिला संगठन की ओर से आगामी २ अगस्त, रविवार को संस्कार जननी, अग्रकुलमाता माधवीजी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास से मनाया जायेगा. इस उपलक्ष में २ अगस्त को श्री अग्रसेन भवन, रविनगर में दोपहर २ बजे से विविध सांस्कृतिक, बौद्धिक कार्यक्रम, हवन-पूजन तथा हाल ही की दसवीं तथा बारहवीं की बोर्ड परिक्षाओं में ७५ प्रतिशत से अधिक गुणों के साथ सफलता प्राप्त करनेवाले समाज के नागपुर जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को ‘अग्र मेधा सम्मान’ से गौरव सत्कार किया जायेगा. अति विशिष्ट उपलब्धि पानेवाली बेटियों और महिलाओं को भी सम्मानित किया जायेगा. कुलदेवी महालक्ष्मी, कुलपिता अग्रसेन जी और कुलमाता माधवीजी की प्रतिमाओं की शृंगारपूर्ण झांकी सजाई जाएगी और पारम्परिक रूप से पूजा अर्चना की जायेगी, नैवेद्य अर्पित किया जायेगा.

भगवान अग्रसेनजी और माता माधवीजी के आदर्श जीवन चरित्र से नई पीढी़ को परिचित कराया जायेगा. अग्रवाल समाज में बालकों, युवा शक्ति को उच्च शिक्षा के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिए प्रेरित किया जायेगा. समारोह के लिये अति विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया जा रहा है. सभी कार्यक्रमों की सूचना निमंत्रण पत्रिका, सोशल मिडिया तथा समाचार पत्रों के माध्यम से शीघ्र ही प्रसारित की जायेगी.

नागपुर जिला अध्यक्ष संदीप बीजे अग्रवाल ने एक विग्यप्ति प्रसारित कर बताया कि समारोह को सफल बनाने हेतु तैयारियां की जा रही हैं. इस हेतु जिला पदाधिकारिओं और सदस्यों की एक सभा गुरुवार ९ जुलाई को संपन्न हुई जिसमें कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा करके निर्णय लिये गये. सम्मेलन के नागपुर विभाग महामंत्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल के मार्गदर्शन में संपन्न हुई सभा में सर्वश्री संदीप अग्रवाल, विशव गर्ग (विक्की), प्रमोद अग्रवाल, प्रल्हाद अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सीए विवेक खेमुका, विनोद अग्रवाल, श्रीकृष्ण बगडिया, अर्पित अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, शशांक अग्रवाल, विपुल अग्रवाल, श्रीमती अनिता अग्रवाल, श्रीमती सविता अग्रवाल, श्रीमती दिप्ती अग्रवाल, श्रीमती अंजु अग्रवाल आदि प्रमुखता से उपस्थित रहे. शीघ्र ही दूसरी सभा भी होगी.

महारानी माधवी की गाथा
किंवदंती है कि नागराज महिधर एवं रानी नागेन्द्री पर मां लक्ष्मी की कृपादृष्टि हुई तो उन्हें एक अत्यंत सुंदर, कोमल, चारु कन्या प्राप्त हुई. ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि यह कन्या स्वयं मां लक्ष्मी का अवतार है. जिस सौभाग्यशाली राजकुमार से इसका विवाह होगा, वह संसार में देवतातुल्य पूजनीय होगा. रूप व गुणों के अनुरूप कन्या का नाम माधवी रखा गया. वह बाल्यकाल से ही सर्वगुण संपन्न थी.

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रूप सौंदर्य, शूरता, वीरता, उदारता, वात्सल्य, विद्वता, दयालुता इत्यादि गुणों का माधवी में अद्भुत सम्मिश्रण था. एक दिन वे घोड़े पर सवार हो उन्मुक्त मन से किसी सुंदरवन में सखियों के साथ विचरण कर रही थीं. वन के राक्षस तथा कूर शेर, चीते आदि नाग कन्या राजकुमारी माधवी के तेज से भयभीत हो गुफाओं में जा छिपे. तभी इंद्र देवता की दृष्टि उन पर पड़ी. इंद्र ने उनके गुणों से आकर्षित हो नाना प्रकार से उनकी प्रशंसा की तथा उन्हें पटरानी बनाना चाहा परंतु माधवी ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. देवराज इंद्र ने तरह-तरह के प्रलोभन दिए, अपना तेजस्वी रूप प्रकट किया परंतु माधवी अप्रभावित रहीं. राजकुमार इंद्र ने क्रोध के वशीभूत हो हाथ आगे बढ़ाना चाहा, पर माधवी के प्रबल तेज के सामने वह गतिहीन हो गया. वह सकपका उठे. उनसे न खड़े रहना बनता था और न ही वहां से जाने की शक्ति शेष थी. इंद्र माधवी के बल, पराक्रम, तेज से छटपटाते रह गए. नागराज ने पुत्री माधवी की इच्छानुसार राजाओं के स्वयंबर में उसका विवाह महाराजा अग्रसेन से कर दिया. इस विवाह के समाचार ने इंद्र को विचलित कर दिया. वह पहले से ही महाराजा अग्रसेन के वैभव से ईर्ष्या कर रहा था. उसने कुपित होकर अग्रसेन के राज्य में वर्षा बंद कर दी. सूखा पड़ गया. राज्य में त्राहि-त्राहि मच गई.

महाराजा अग्रसेन उद्विग्न हो उठे, किंतु महारानी माधवी ने धैर्य न त्यागा. महारानी माधवी अपनी परीक्षा में सफल हुई. महाराज अग्रसेन राजकाज में निपुण महारानी माधवी को राज्यभार सौंपकर स्वयं तपस्या करने वन में चले गए. महारानी माधवी भी कुछ दिनों के बाद ही अपनी दिव्य दृष्टि से सब कुछ जानकर अग्रसेनजी के पास पहुंच गईं और दोनों ने एक साथ मिलकर माता महालक्ष्मी की तपस्या आराधना शुरू कर दी. महालक्ष्मीजी महाराजा-महारानी की इस निष्ठा और भक्तिभाव से बढ़ी प्रसन्न हुईं. बीहड़ सुनसान वन प्रदेश में रात्रि के घोर अंधकार में चहुंओर एक अ‌द्भुत प्रकाश आलोकित हो उठा. स्वयं महालक्ष्मीजी महाराजा-महारानी के समक्ष प्रकट हुईं और उनसे कहा- महाराज, मैं आप पर प्रसन्न हूं. कहो, कहां निवास करूं? महाराज ने माधवी की ओर संकेत किया और विनम्र शब्दों में कहा- हे मां, आप मेरी परम प्रिये पटरानी माधवी में समा जाओ. दिव्य वाणी हुई- हे अग्रसेन, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं,

तुमने नारी का सम्मान किया है. मैं सदा तुम्हारे कुल में निवास करूंगी. जहां कुलवधुओं का सम्मान होगा, वहीं मेरा निवासस्थान होगा. मेरी पूजा होगी और उन पर सभी देवता प्रसन्न होंगे. इसके साथ ही महालक्ष्मी ने इंद्र पर विजय प्राप्ति का वरदान भी दिया और माधवी में समा गईं. इस घटना की जानकारी जब इंद्र को मिली तो वे घबरा गए, नारद मुनि को साथ ले महाराजा अग्रसेन व महारानी माधवी से क्षमायाचना की. अग्रसेन आराध्य पुरुष बन गए. निःसंदेह जब तक संसार में सूर्य और चंद्रमा रहेंगे, तब तक इस संसार में माधवी अग्रसेन के यश की पूजा होती रहेगी. मां लक्ष्मी के वरदान से इस समय भी इन दोनों का निवास, ध्रुवतारे के समीप है और वे अब भी स्वर्ग से अग्र पुत्र-पुत्रियों पर आशीष बिखेर रहे हैं.

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