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    Published On : Sun, Sep 10th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    विसर्जन के बाद तालाबों का ऑक्सिजन हुआ कम


    नागपुर:
    गणेश मूर्तियों के विसर्जन के लिए भले ही कृत्रिम तालाब के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया हो, लेकिन वस्तु स्थिति यह है कि नैसर्गिक तालाबों को खासा नुकसान पहुंचने का खुलासा पर्यावरणविद संस्था की रिपोर्ट में सामने आया है. मूर्ति विसर्जन से पहले संस्था की ओर से सोनेगांव, गांधीसागर व फुटाला तालाब का परीक्षण किया गया था. विसर्जन के बाद तालाबों की स्थिति में आक्सिजन, मटमैलेपन का प्रमाण व अम्लता जैसे मानकों में हुए परिवर्तन को लेकर शनिवार को एक बार फिर संस्था ने परीक्षण किया गया. परीक्षण में जो तथ्य सामने आए है, वो चौकाने वाले हैं. मूर्ति विसर्जन का प्रमाण गांधीसागर व फुटाला तालाब पर दिखाई दिया.

    हालांकि इस वर्ष गांधीसागर में मूर्ति विसर्जन पर पाबंदी लगाते हुए तालाब में ही कृत्रिम तालाब का निर्माण किया गया. उस परिसर में आक्सिजन का प्रमाण 4 मिली ग्राम प्रति लीटर से घटकर 3.5 मिली ग्राम प्रति लीटर हो गया है. इन सब में सोनेगांव तालाब की स्थिति को बेहतर माना जा सकता है. सोनेगांव में अम्लीयता पहले 8.2 थी जो अब 8 है, वहीं मटमैलेपन का प्रमाण 60 था, जो कम होकर 50 हो गया. बारिश होने से तालाब में पानी की मात्रा बढ़ी है और स्थिति सुधर गई है.

    फुटाला सबसे ज्यादा प्रभावित
    फुटाला तालाब की बात करें तो पाबंदी के अभाव में तालाब की हालत बद से बदत्तर हो चली है. जहां अम्लता का प्रमाण 8.5 से घटकर 8.2, मटमैलेपन का प्रमाण 70 से बढ़कर 85 तथा आक्सीजन का प्रमाण 3.5 मिली ग्राम प्रति लीटर से घटकर 3 मिली ग्राम प्रति लीटर रहा गया. इतना ही नहीं तो अमरावती मार्ग व वायुसेना नगर छोर पर यह प्रमाण 2.5 पाया गया है. हालांकि नमूने पाइप की सहायता से लिए गए, सतह की स्थिति और भी भयावह हो सकती है.


    ग्रीन विजिल के कौस्तुभ चटर्जी ने बताया कि तालाबों में कम से कम आकिसीजन का प्रमाण 6 मिलीग्राम बेहतर माना जाता है. लेकिन सोनेगांव तालाब में विसर्जन से पहले 3.5 था, जो घटकर 3 और दो छोर पर 2.5 रह गया है. तालाबों की यह स्थिति फेंके गए निर्माल्य से हुई, जो अब सड़ने लगा है. अब बायोड्रीग्रेडेशन होकर अनएरोबिक कंडिशन बन रही है. आने वाले दिनों में दुर्गा देवी की प्रतिमाओं का विसर्जन भी होगा. ऐसे में जल्द ही सफाई नहीं होने पर आक्सिजन का प्रमाण कम होकर 2 मिली ग्राम प्रति लीटर पहुंच गया तो जलीय जीव की मौत हो सकती है.


    तालाबों की स्थिति विसर्जन से पहले अम्लीयता – सोनेगांव- 8.2, गांधीसागर- 8.5, फुटाला- 8.5 मटमैला (जेटीयू)- सोनेगांव -60, गांधीसागर- 77, फुटाला- 70 आक्सीजन – सोनेगांव- 4.5, गांधीसागर- 4, फुटाला – 3.5 प्रतिशत थी.

    विसर्जन के बाद अम्लीयता – सोनेगांव- 8, गांधीसागर- 8.3, फुटाला- 8.2 मटमैला (जेटीयू)- सोनेगांव -50, गांधीसागर- 80, फुटाला- 85 आक्सीजन – सोनेगांव- 4.5, गांधीसागर- 3.5, फुटाला – 3 व दो छोर पर 2.5 प्रतिशत थी.

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