Published On : Mon, Sep 2nd, 2019

सुधारगृह में शारीरिक अत्याचार के मामले में लापरवही के लिए अधीक्षक और सीडब्लूसी के खिलाफ हो कार्रवाई

आरटीई कमेटी ने की मांग

नागपुर: पाटणकर चौकी स्थित शासकीय बाल सुधारगृह में एक किशोर पर सामूहिक अत्याचार की घटना का मामला सामने आया है. जिसमें पीड़ित बच्चे ने बताया कि पिछले महीने की 24 तारीख़ से उसके साथ सामूहिक अत्याचार हो रहा है, उसी दिन शाम 4 बजे दिनांक 24 अगस्त को राष्ट्रीय बाल हक़ आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो द्वारा इस सुधारगृह का निरीक्षण किया गया था. उसी दौरान इस पीड़ित बच्चे से उसके प्रकरण की बात भी की थी और उसके पश्चात बाल सुधार गृह में अनेक खामियों के विषय में आगाह किया गया था.

अधीक्षक नम्रता चौधरी को, आयोग को आरटीई एक्शन कमेटी और ऐडु फ़र्स्ट चाइल्ड एंड वुमन फ़ाउंडेशन के मो .शाहिद शरीफ़ ने शिकायत की थी की सुधार गृह से अनेक बार किशोर भाग चुके हैं. सुधार गृह में साधारण गुन्हेगार तथा अपराधिक छवि वाले बालकों को अलग रखने की बात भी कही थी . लेकिन आपराधिक छवि वाले बालकों के साथ साधारण अपराध करने वाले बच्चों को रखा जाता है और उन पर अत्याचार होने की जानकारी भी मिली थी. इस बारे में शरीफ ने बताया की यदि समय रहते इस पर ग़ौर किया जाता तो आज इस बच्चे पर इतना गंभीर अत्याचार नहीं होता.

पीड़ित बालक आज भी मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से जूझ रहा है. बाल कल्याण समिति की भी ज़िम्मेदारी है कि वे सुधारगृह का निरीक्षण करें. लेकिन उनके द्वारा न कोई क़दम उठाया गया और इसके साथ ही कमिटी निर्धारित समय के अनुसार मौजूद भी नहीं रहती है .

उन्होंने बताया की बाल कल्याण समिति के पास जब हम जाते है तो वे कहते है कमेटी पूरी आने की है. आप बाद में आना . शरीफ का कहना है कि प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव में अधीक्षक और सीडब्लूसी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा 15,000 बच्चों का प्रशिक्षण लिया गया. जिसमें बच्चे सोशल मीडिया के चपेट में आकर सिजोफ्रेनिया के शिकार हो रहे हैं. जैसा कि जो कृत वो मीडिया में देखते हैं . उसी को अपने जीवन में दोहराते है . इसके कारण बच्चो में अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं . इसकी रोकथाम के लिए जेजे पॉस्को एक्ट और सेक्स एजुकेशन/सोशल मीडिया का परीक्षण की शिक्षा बच्चो को देने की बात भी उन्होंने कही.