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    Published On : Mon, Mar 15th, 2021

    घाटे में चल रही ‘आपली बस सेवा’ को मेट्रो को सौंपने का प्रस्ताव अर्थहीन

    – फिर कचरा संकलन-नियोजन और सीमेंट सड़क निर्माण पर हो रहे खर्च से RETURN ZERO तो इन्हें भी राज्य सरकार के क्रमशः स्वास्थ्य विभाग व लोकनिर्माण विभाग को संभालने के लिए दे देना चाहिए – एमओडीआई फाउंडेशन

    Aapli Bus

    नागपुर : पिछले माह मनपा की परिवहन समिति ने ‘आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपय्या’ के तर्ज पर संचालित की जाने वाली ‘आपली बस सेवा’ को मेट्रो रेल प्रशासन को सौंपने का प्रस्ताव तैयार कर आनन्-फानन में उसे सर्वसम्मत्ति से मंजूरी देकर अंतिम मंजूरी के लिए मनपा आमसभा को भेज दिया,आगामी 19 मार्च 2021 को होने जा रही ऑनलाइन आमसभा में इसे बहुमत से मंजूरी देकर राज्य सरकार को आगे की कार्यवाही/मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा।

    याद रहे कि ‘आपली बस सेवा’ के बेड़े में शामिल लगभग 400 PLUS रोजाना/मासिक/सालाना औसतन किये जा रहे खर्च का आधा हिस्सा कमा कर दे रही हैं.अर्थात मासिक 6 करोड़ की कमाई ‘आपली बसों’ से हो रही और उतना ही नुकसान हो रहा.क्यूंकि यह मनपा की प्राथमिक सेवाओं में से एक सेवा हैं,ऊपर से सेवा पर हो रहे खर्च का आधा वसूल हो रहा ,इसके बावजूद मनपा प्रशासन परिवहन सेवा पर नुकसान का रोना रट हुए समय-समय पर नाना प्रकार के टांग अदने से बाज़ नहीं आ रही.

    मनपा को परिवहन सेवा से सालाना लगभग 72 करोड़ रूपए का नुकसान हो रहा.यह नुकसान भी और कम किया जा सकता हैं बशर्तें खासकर मनपायुक्त राधाकृष्णन बी ,परिवहन सभापति DIMTS के साथ किये गए करार के अनुरूप पेश आए.DIMTS और वर्त्तमान परिवहन समिति सभापति ने कोरोना काल में यात्री कम के नाम पर बड़े पैमाने पर मिलीभगत कर मनपा खजाने को बड़ा चुना लगाया,इसकी जानकारी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सामने हो रही चर्चा के दौरान सार्वजानिक हो चुकी हैं.

    लेकिन इस संदर्भ में कोई ठोस उपाययोजना हेतु गंभीर पहल नहीं की गई बल्कि इस नुकसान से बचने के लिए मनपा को हो रहा सालाना नुकसान भरपाई के लिए मेट्रो को बिना पूछे उन्हें सौंपने का निर्णय लिया जा रहा.मनपायुक्त और परिवहन समिति ने DIMTS और कंडक्टरों के रोजाना कारनामों पर नकेल कसा तो यह घाटा 50% से 30% तक लाया जा सकता हैं,इसके लिए कड़क मेहनत की दरकार हैं,जो मनपा प्रशासन से उम्मीद करना गलत हैं,अगर इतने ही मेहनती होते तो पिछले एक दशक से धीरे-धीरे विभागों का हो रहा निजीकरण की जरुरत नहीं पड़ती।

    चलिए मनपा प्रशासन और परिवहन समिति की उक्त सिफारिश के अनुसार परिवहन सेवा पर मनपा को लगभग 10 करोड़ मासिक खर्च आ रहा लेकिन दूसरी और लगभग 5 करोड़ कमा कर भी यह सेवा दे रही.

    अगर ऐसा ही नुकसान कम करने और मनपा की आर्थिक स्थिति संभालने की दरकार हैं तो मनपा प्रशासन और सत्तापक्ष ने स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत कचरा संकलन-नियोजन और सीमेंट सड़क निर्माण पर की जा रही सैकड़ों करोड़ों की खर्च पर लगाम लगाना चाहिए,इन दोनों से मनपा को एक फूटी कौड़ी भी आय नहीं हो रही.

    कचरा संकलन और नियोजन के लिए 2 ठेकेदार कंपनी तैनात किये गए,दोनों ही कंपनी करार अनुसार काम नहीं कर रही,याने मनपा का मकसद पूरा नहीं हो रहा,सिर्फ लेन-देन कर उन्हें संभाला जा रहा.

    सीमेंट सड़क निर्माण की संकल्पना किसी सत्ताधारी ने लाई थी,क्यूंकि उनका सीमेंट-लोहे कंपनी से समझौता था.इसके निर्माण में लगभग 300 करोड़ खर्च हो चुके,या फिर होने वाले हैं.इसके निर्माण से जमीनों और मनापा की मुलभुत सुविधाओं को नुकसान पहुंचा हैं,सम्पूर्ण सीमेंट सड़क की RIDING QUILITY LOW LEVEL की हैं,ऐसा लगता हैं कि सिर्फ WBM किये गए रोड पर चल रहे हो .

    इसके निर्माण में सत्तापक्ष – प्रशासन की मिलीभगत से बड़ी आर्थिक धांधली हुई हैं,जिसको सार्वजानिक करती ही,उसे CE जैसे उच्च अधिकारी द्वारा मामला दबाने की पूर्ण कोशिश का दौर जारी हैं.इसके लिए मनपा में लोन भी लिए.लेकिन इन सब के बावजूद मनपा को कचरा और सीमेंट सड़क से एक रूपए भी लाभ नहीं हुआ,यह सीमेंट सड़क पर्यावरण के लिए खतरा भी साबित हो रहा,शहर का तापमान अचानक बढ़ गया.जबकि डामर सड़क बेहतरीन RESULT दे रहा था.

    एमओडीआई फाउंडेशन ने कहा कि अगर ऐसी अड़चन और नुकसान हैं तो मनपा प्रशासन और सत्तापक्ष-परिवहन समिति ने कचरा संकलन-नियोजन स्वास्थ्य विभाग को और सीमेंट सड़क आदि सड़क निर्माण कार्य PWD (लोकनिर्माण विभाग) को दे देना चाहिए,इससे मनपा का सालाना बड़ा खर्च बचेगा !


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