महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार, 22 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मेयर पद के आरक्षण की आधिकारिक घोषणा कर दी है। मंत्रालय में आयोजित आरक्षण लॉटरी के बाद साफ हो गया है कि आगामी मेयर चुनावों में महिलाओं का वर्चस्व रहने वाला है।
कुल 29 में से 16 सीटें विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के लिए तय की गई हैं, जबकि 13 सीटें सामान्य वर्ग में रखी गई हैं। इस बार 17 महानगरपालिकाओं में महिला मेयर चुनी जाएंगी, जो शहरी राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सबसे अहम बात यह है कि मुंबई (बृहन्मुंबई), पुणे, नागपुर और नाशिक जैसी प्रमुख महानगरपालिकाएं ‘सामान्य महिला (Open Woman)’ श्रेणी के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अर्थ है कि इन शहरों में अब केवल महिला उम्मीदवार ही मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगी।
बड़े राजनीतिक केंद्रों में बदला चुनावी समीकरण
आरक्षण लॉटरी के नतीजों ने राज्य के बड़े राजनीतिक केंद्रों में नई राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी है।
मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक और नवी मुंबई जैसी हाई-प्रोफाइल महानगरपालिकाएं सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई हैं, जिससे इन शहरों में दलों की रणनीति पूरी तरह बदल गई है।
वहीं, वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड और सोलापूर को पूरी तरह ‘ओपन’ श्रेणी में रखा गया है, जहां किसी भी वर्ग का उम्मीदवार मेयर बन सकता है।
SC, ST और OBC वर्गों को प्रतिनिधित्व
सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए आरक्षण लॉटरी में—
- अनुसूचित जाति (SC) के लिए 3 सीटें तय की गई हैं
- ठाणे (SC)
- जालना और लातूर (SC महिला)
- अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए
- कल्याण-डोंबिवली
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 8 सीटें मिली हैं
- चंद्रपूर (OBC)
- अहिल्यानगर, अकोला और जळगांव (OBC महिला)
सरकार के अनुसार यह रोटेशन प्रणाली सभी सामाजिक वर्गों को शहरी नेतृत्व में अवसर देने के उद्देश्य से लागू की गई है।
पूरी आरक्षण सूची (संक्षेप में)
सामान्य महिला (Open Woman):
मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक, धुळे, मालेगांव, नवी मुंबई
सामान्य (Open):
वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड, अमरावती, छ. संभाजीनगर, सांगली-मिरज-कुपवाड, सोलापूर
SC / SC महिला:
ठाणे (SC), जालना, लातूर (SC महिला)
ST:
कल्याण-डोंबिवली
OBC / OBC महिला:
चंद्रपूर (OBC), अहिल्यानगर, अकोला, जळगांव (OBC महिला)
इस आरक्षण के साथ ही यह साफ हो गया है कि आगामी मेयर चुनावों में महिला नेतृत्व और सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। शहरी सत्ता की तस्वीर अब नए चेहरों और नए समीकरणों के साथ सामने आने वाली है।








