Published On : Thu, Jul 14th, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

वैनगंगा-नलगंगा परियोजना शुरू करने के लिए 80000 करोड़ की जरुरत

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– शिंदे-फडणवीस सरकार से सकारात्मक पहल की आस,गोसीखुर्द बांध से पानी को पश्चिम विदर्भ के खेत-खलियान होंगे उन्नत

नागपुर– मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोसीखुर्द बांध से पानी को पश्चिम विदर्भ की ओर मोड़ने के लिए वैनगंगा-नलगंगा परियोजना शुरू करने का वादा किया है. हालांकि, इस परियोजना पर 80,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तो सवाल यह है कि क्या यह परियोजना वास्तव में शुरू की जाएगी ?

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200 करोड़ रुपये की गोसीखुर्द परियोजना को पूरा करने के लिए निधि आभाव में सरकार को 20 साल लग गए। चूंकि 2,000 करोड़ रुपये खर्च करना भी मुश्किल था, इसलिए राज्य ने आखिरकार केंद्र के मार्फ़त इस परियोजना को पूरा किया।जबकि इस परियोजना का 20 % काम बाकी है। इसमें अब एक नई नलगंगा परियोजना जोड़ी जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह नहीं बताया कि इस नए योजना के लिए निधि की व्यवस्था किस मद से और किसके मदद से करेंगे।

गोसीखुर्द परियोजना ने कई ठेकेदारों को मालामाल कर दिया। उनमें से कुछ बाद में राजनीति में शामिल हो गए। कुछ तो विधायक और मंत्री भी बन गए हैं। यह परियोजना छह-सात वर्षों से चर्चा में है। फडणवीस सरकार के दौरान परियोजना की लागत लगभग 55,000 करोड़ रुपये थी।

नलगंगा परियोजना के लिए गोसीखुर्द से बुलढाणा जिले तक की मुख्य नहर 426 किमी लंबी है। यह परियोजना छह जिलों नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला और बुलढाणा के 15 तहसीलों को कवर करेगी।

विदर्भ में महत्वाकांक्षी परियोजना में वैनगंगा-नलगंगा शामिल था। इस परियोजना से लगभग 54 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होने की उम्मीद है। खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। माना जाता है कि प्रचुर मात्रा में पानी अन्य उद्योगों को बढ़ावा देता है। इस परियोजना की योजना हैदराबाद के राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई हैं।

राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति ने मूल प्रस्ताव में कुछ तकनीकी त्रुटियों निकाली,जिसे तत्काल सुधार दिया गया। परियोजना की लागत 80,000 करोड़ रुपये है।
परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद इसे पर्यावरण, वन विभाग, केंद्रीय जल आयोग और अन्य संबंधित एजेंसियों की मंजूरी लेनी होगी। नलगंगा पश्चिम विदर्भ में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग की समस्या को कम कर सकती है। साथ ही, विदर्भ के अधिकांश हिस्सों में सूखे की स्थिति को दूर किया जा सकता है।

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