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    Published On : Sat, Jul 21st, 2018

    शहर के 5 निजी बड़े हॉस्पिटलों को महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना से हटाया

    नागपुर: शहर के निजी हॉस्पिटलों में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के अंतर्गत अनियमिताएं की शिकायतें मिलने के कारण और मरीजों से पैसे लिए जाने की वजह से बीमा कंपनी ने शहर के 5 हॉस्पिटलों को इस योजना से हटाया है. यह हॉस्पिटल अब इस योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं कर पाएंगे. इन हॉस्पिटलों के नाम श्रीकृष्ण हृद्यालय, क्रिसेंट हॉस्पिटल, मेडिट्रीना हॉस्पिटल, केशव हॉस्पिटल और शतायु हॉस्पिटल है.

    इस योजना के अंतर्गत नागपुर में सरकारी व निजी मिलाकर हॉस्पिटलों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है. इन हॉस्पिटलों में 1 जुलाई 2017 से लेकर अब तक कुल 27 हजार मरीजों के विभिन्न ऑपरेशन और इलाज हुए हैं. इन हॉस्पिटलों को इलाज के बदले बीमा कंपनी की ओर से 54 करोड़ से ज्यादा की रकम दी गई है. बीमा कंपनी द्वारा पैसे मिलने के कारण हॉस्पिटलों को मरीजों से पैसे नहीं लेने चाहिए थे. लेकिन इन हॉस्पिटलों की ओर से मरीजों से लाखों रुपए वसूल किए गए हैं.

    इस योजना के अंतर्गत जब मरीज को भर्ती किया जाता है, तो इस योजना के मंजूर होने तक विभिन्न जांचों के पैसे इनसे लिए जाते थे. नियम के हिसाब से मरीजों को केस मंजूर होने के बाद पैसे वापस मिलने चाहिए. लेकिन हॉस्पिटलों की ओर से पैसे नहीं दिए जाते हैं. यानी यह हॉस्पिटल मरीजों से भी पैसे लेते हैं और बीमा कंपनियों से भी पैसे लेते हैं. यह गोरखधंदा पिछले कई वर्षों से चल रहा था.

    इसमें बीमा कंपनी की ओर से हॉस्पिटलों का निरिक्षण किया गया. जिसके बाद यह मामला बाहर आया है. खासबात यह है की बीमा कंपनी ने ही यह जांच की है. यह कार्रवाई नागपुर के पूर्व जिलाधिकारी सचिन कुर्वे द्वारा कमेटी को शिकायत करने के आधार पर की गई थी. स्वास्थ मंत्री दीपक सावंत ने इस मामले में जांच के आदेश भी दिए हैं.

    क्रिसेंट हॉस्पिटल में भर्ती के परिजनों से भी लगभग 60 हजार रुपए वसूल किए गए. जिसकी मरीज के बेटे कृष्णा श्रीबाते ने लिखित शिकायत दी है. इनका रहना यवतमाल में है और उन्हें वहां से इस हॉस्पिटल में रेफेर किया गया था. मरीज के बेटे ने बताया कि क्रिसेंट में पहुंचने के बाद उन्हें बताया गया कि 1 लाख रुपए मंजूर होंगे लेकिन ऊपर का 60 हजार रुपए आपको हॉस्पिटल में भरना होगा.जिसके बाद श्रीबाते परिवार ने 60 हजार रुपए हॉस्पिटल में भर दिए. बाद में कुछ पैसे मरीज के परिजनों को लौटाए गए थे.

    दूसरे मरीज का मामला भी इसी तरह से था. रियाज अहमद जो इस हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे. उनको बिल 16,930 रुपए का दिया गया. मरीज ने 15 हजार भरे और हॉस्पिटल ने उनसे कहा कि 1,930 रुपए का आपको डिस्काउंट दिया गया है. इस मरीज को एक महीने तक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया. जानकारी के अनुसार नागपुर में हैदराबाद के मशहूर कार्डियक सर्जन को भी बुलाया गया और मरीज का सीएबीसी किया गया. यह पूरा ऑपरेशन इस योजना के तहत किया गया. लेकिन कुछ महीने बाद ही मरीज फिर चेस्ट पेन की शिकायत लेकर हॉस्पिटल पहुंचा.

    एंटी अडल्ट्रेशन कमेटी के चेयरमैन मो. शाहिद शरीफ ने मांग की है कि इन सभी हॉस्पिटलों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए. इसकी रिकवरी होनी चाहिए. इन हॉस्पिटलों में जितनी भी हेरफेर की गई है, उसकी भी रिकवरी की जानी चाहिए. कई मरीजों को और उनके परिजनों को हॉस्पिटल प्रशासन के लोग यह जानकारी भी नहीं देते हैं कि उनका इलाज योजना के तहत किया जा रहा है.

    दूसरे केस में बाहर से डॉक्टर बुलाने के नाम पर हॉस्पिटल ने लूट की है. पैसे लेने के बाद और उसका इलाज होने के बाद भी मरीज की हालत खराब है. शरीफ ने बताया कि नियम यह है कि हॉस्पिटल में ऐसी जगहों पर योजना सम्बंधित जानकारी देने के लिए काउंटर होना चाहिए जहां से सभी मरीजों का ध्यान इनकी तरफ जाए. लेकिन श्रीकृष्णा हृद्यालय में तलघर में इस योजना का काउंटर है और क्रिसेंट में ऊपर के माले पर. टीपीए ने खुद जांच की और इन हॉस्पिटलों को दोषी पाया है. लेकिन अब भी वेबसाइट में इन हॉस्पिटलों को इस योजना के तहत दिखाया जा रहा है.

    इस मामले में श्रीकृष्ण हृद्यालय के डॉ. महेश फुलवाणी ने बताया कि 2012 से मरीजों को इस योजना का लाभ इस हॉस्पिटल में दिया जा रहा था. मरीजों से अतिरिक्त पैसे नहीं लिए गए है और पैसे लिए भी गए है तो उसकी रसीद भी उन्हें दी गई है. सभी मरीजों को पैसे लौटाए गए है और एक ही मरीज है जिसे पैसे देने है. डॉ. फुलवाणी से जब पूछा गया कि कितने मरीजों को पैसे लौटाए गए है और कितने पैसे लौटाए गए हैं तो उन्होंने जानकारी देने से इंकार कर दिया.

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