Published On : Fri, Dec 8th, 2017

कारखाना विभाग से संबंधित ३ अधिकारी निलंबित

NMC-Nagpur
नागपुर: आज मनपा की आमसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक संदीप सहारे के सबूत सहित संगीन आरोपों के मद्देनज़र महापौर ने प्रशासन को कड़क निर्देश दिया कि सम्बंधित तीनों अधिकारियों को निलंबित किया जाए. सत्तापक्ष नेता ने बाकायदा तीनों अधिकारियों के नामों का उल्लेख करते हुए निलंबन की मांग की थी.

संदीप सहारे ने आरोप लगाया था कि मनपा कारखाना विभाग में खरीदी गई सामग्री की कीमत और आज के बाजार भाव में काफी अंतर पाए गए हैं. सहारे के आरोपों का ठोस जवाब देने में सहायक आयुक्त विजय हुमने लड़खड़ा गए थे.

इसी दौरान भाजपा नगरसेवक सतीश होले ने आरोप लगाया कि कारखाना विभाग में एक भी वाहन की दुरुस्ती नहीं होती है,अमूमन सभी वाहनों को बाहर मरम्मत करवाकर उसकी मलाई खाई जा रही है.

सत्तापक्ष नेता जोशी ने महापौर दीपराज पार्डीकर से यह भी मांग की कि इन निलंबित अधिकारियों की जांच १५ दिनों भीतर आयुक्त स्तर पर हो,और इसकी जांच रिपोर्ट अगले आमसभा में पेश किया जाए, जिसका शब्द के साथ अनुमोदन महापौर ने करते हुए प्रशासन को निर्देश दिए.

अनाप-सनाप संपत्ति कर डिमांड पर आयुक्त की उपस्थिति में होगी विशेष सभा
पिछले कुछ दिनों से शहर के मनपा ज़ोन कार्यालय द्वारा नियमित करदाताओं को पिछले वर्षों की तुलना में अनाप-सनाप डिमांड थोपा गया. किसी को ३ तो किसी को १० गुणा अधिक का डिमांड भेजा गया. इस मामले में रोजाना ज़ोन में हंगामा जारी ही था कि निर्दलीय नगरसेविका आभा पांडे ने साइबरटेक के कर्मियों से ही ३ घरों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करवाकर साइबरटेक के साथ मनपा कर विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया तो कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक प्रफ्फुल गुड़धे पाटिल ने एमएमसी एक्ट की अवहेलना कर डिमांड जारी की गई, जारी डिमांड वितरण व वितरित डिमांड को रद्द किया जाए.

आज आमसभा की कार्यवाही शुरू होने के पूर्व उक्त मुद्दे को लेकर भाजपा के दयाशंकर तिवारी व कांग्रेस के प्रफुल गुड़धे पाटिल ने स्थगन प्रस्ताव लाया. निगम सचिव ने उसका बारी-बारी से पठन किया. फिर महापौर ने तिवारी के प्रस्ताव के आधार पर मनपायुक्त की उपस्थिति में विशेष सभा बुलाकर विस्तृत चर्चा करने का निर्देश दिया. महापौर के निर्देश के बाद विपक्ष ने तत्काल वितरित किए जा रहे डिमांड को रोकने की मांग की, लेकिन महापौर ने उनकी बातों को अनसुना कर आगे के कामकाज कि शुरुआत की तो विपक्ष सह बसपा ने हंगामा करते हुए महापौर को घेर लिया. हंगामे के बीच महापौर ने विषय क्रमांक ११८ को छोड़ सभी विषयों को बहुमत के आधार पर मंजूरी प्रदान की.