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    Published On : Thu, Nov 16th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    २५० करोड़ का पदाधिकारी कुकड़े पैदल

    नागपुर: पुरानी कहावत हैं कि अहोदे (पद) की कीमत होती है, न कि पदाधिकारी की. लेकिन नागपुर महानगरपालिका उक्त कहावत के विपरीत चलती है. यहां जिन्हें जरूरत नहीं उन्हें सर्व-सुविधा और जरूरतमंद पदाधिकारियों को मांग के बाद भी वाहन के लिए मिन्नतें करनी पड़ती है. ऐसे ही कुछ दौर से मनपा परिवहन सभापति बंटी कुकड़े गुजर रहे हैं.

    ज्ञात हो कि मनपा में परिवहन सभापति और स्थाई समिति सभापति का ओहदा लगभग बराबरी का है. स्थाई समिति सभापति भले ही २००० करोड़ के मालिक हो लेकिन परिवहन समिति सभापति भी २५० करोड़ का मालिक है. स्थाई समिति का काम कागजों पर दिखाते हुए नगरसेवकों के माध्यम से उनके प्रभागों में नज़र आता हैं तो दूसरी ओर परिवहन सभापति आम सभापतियों से ज्यादा चर्चित व जिम्मेदार पद है. इनके कार्यालय में कम और ‘फील्ड’ पर ज्यादा जरुरत पड़ती है. स्थाई समिति सभापति और परिवहन सभापति को उनके अधिकार के तहत लगभग एक जैसे मूल्य की कार खरीदने का अधिकार दिया गया है. मनपा और परिवहन विभाग की आर्थिक हाल खास्ता होने के कारण परिवहन विभाग अपने सभापति के लिए नए वाहन खरीदने में असमर्थता दिखा रहा है.

    परिवहन विभाग के अनुसार सभापति बंटी कुकड़े पिछले ३-४ दिनों से दोपहिये से आवाजाही कर रहे है. मनपा परिवहन समिति के मार्फ़त लगभग ३५० बसों का संचालन करने वाले सभापति की इस हाल पर प्रशासकीय सुस्ती समझ से परे है. इस मामले में महापौर,सत्तापक्ष की चुप्पी समझ से परे है, कहीं कोई शिष्टाचारी खटास तो नहीं.

    गत रविवार एक विदेश मेहमान की अगवानी करने विमानतल जा रहे थे कि रास्ते में कुकड़े की सरकारी एम्बेसडर ने जवाब दे दिया. इनके अनुसार जब से वे सभापति बने हैं तब से उन्हें दी गई एम्बेसडर( क्रमांक -८२ ) घड़ी-घड़ी धोखा देती रही है. इसलिए उन्हें नियमित आवाजाही के वक़्त पर्यायी दो या चार पहिये वाहन साथ में रखना पड़ता हैं.

    परिवहन सभापति कुकड़े ने १४ नवम्बर २०१७ को मनपायुक्त, परिवहन व्यवस्थापक और मनपा मेकेनिकल अभियंता को पत्र लिख नई वाहन की मांग की है. पत्र के अनुसार पिछले ४ साल पूर्व परिवहन विभाग मनपा में अस्तित्व में आई, तब से आज तक परिवहन सभापति के लिए नई वाहन खरीदी नहीं की गई. तब से लेकर पिछले रविवार तक प्रशासन की ओर से एमएच-३१-डीजेड-८२ क्रमांक एम्बेसडर से सभापति द्वय आवाजाही कर रहे थे. इस ख़राब व जर्जर एम्बेसडर की वजह से आए दिन सभापति का काम बाधित हो रहा है.

    पत्र द्वारा निवेदन किया गया है कि मनपा के वर्ष २०१७-१८ के बजट में परिवहन सभापति के लिए नए वाहन का प्रस्ताव अंकित है, जिसे जल्द से जल्द मंजूरी प्रदान कर खरीदी की जाए. इस मामले में परिवहन व्यवस्थापक ने आर्थिक तंगी की वजह से खरीदी मामले पर हाथ खड़े कर दिए, तो दूसरी ओर मनपा के सामान्य प्रशासन विभाग ने जल्द ही दूसरी दुरुस्त वाहन की व्यवस्था करके देने का आश्वासन दिया है.

    उल्लेखनीय तो यह है कि मनपा के प्रभारी जनसम्पर्क अधिकारी, जैसे कई अधिकारियों के पास बेफिजूल में प्रशासन ने किसी न किसी के दबाव में एक-एक वाहने दे रखे हैं. कम से कम आर्थिक तंगी के मद्देनज़र मनपा प्रशासन खर्च में कमी लाने हेतु वाहनों के किराये, इंधन, मरम्मत खर्चों की समीक्षा कर मनपा को उबारने की पहल करें.


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